Kam Barish Me Fasal Kaise Bachaye: देश में मानसून की अनिश्चितता और अल-नीनो (El Niño) के संभावित प्रभाव को देखते हुए किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मिलकर ऐसे जिलों की पहचान की है जहां कमजोर मानसून का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है।
देशभर के 315 जिलों को कमजोर मानसून के जोखिम वाले क्षेत्रों में रखा गया है, जबकि 111 जिले, जहां सिंचाई की सुविधा 25 प्रतिशत से भी कम है, सबसे संवेदनशील माने गए हैं। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ICAR और ICAR-CRIDA ने जिला कृषि आकस्मिक योजनाओं (District Agriculture Contingency Plans) को सक्रिय कर दिया है ताकि किसान समय रहते सही निर्णय लेकर अपनी फसल और आय दोनों को सुरक्षित रख सकें। Kam Barish Me Fasal Kaise Bachaye
बारिश कम हो तो घबराएं नहीं, खेती की रणनीति बदलें
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि कम बारिश का मतलब खेती में नुकसान होना जरूरी नहीं है। यदि किसान समय पर फसल चयन, जल संरक्षण, आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करें तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। मौसम के अनुसार खेती की रणनीति बदलना ही सबसे बड़ा समाधान माना जा रहा है। Kam Barish Me Fasal Kaise Bachaye
1. एक ही फसल पर निर्भर न रहें, फसल विविधीकरण अपनाएं
विशेषज्ञों की पहली सलाह है कि किसान पूरे खेत में केवल एक ही फसल की बुवाई न करें। यदि पूरी खेती धान जैसी अधिक पानी वाली फसल पर आधारित होगी और बारिश सामान्य से कम हुई तो पूरा उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए खेत के अलग-अलग हिस्सों में कम पानी वाली फसलें, दलहन और मोटे अनाज शामिल करें। इससे जोखिम कम होगा और किसी एक फसल के खराब होने पर दूसरी फसल से आय प्राप्त हो सकेगी। Kam Barish Me Fasal Kaise Bachaye
2. कम पानी वाली वैकल्पिक फसलें चुनें
यदि मानसून समय पर नहीं पहुंचता या सामान्य से कम बारिश होती है तो ICAR किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की खेती करने की सलाह देता है। मोटे अनाज जैसे बाजरा, ज्वार, कोदो, कुटकी और कांगनी (फॉक्सटेल मिलेट) कम पानी में भी अच्छी पैदावार देते हैं। वैज्ञानिकों ने SIA-3156, रेनाडु, महानंदी और गरुड़ जैसी उन्नत किस्मों की भी सिफारिश की है।
इसके अलावा कुल्थी, लोबिया और सेम जैसी दलहनी फसलें भी कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए बेहतर विकल्प हैं। ये फसलें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद करती हैं क्योंकि ये प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन स्थिरीकरण का कार्य करती हैं। कम पानी में तैयार होने वाली सब्जियां जैसे बरबटी, ग्वार फली, लौकी, गिलकी और तोरई भी किसानों को कम समय में अच्छी नकद आय दिला सकती हैं। Kam Barish Me Fasal Kaise Bachaye
3. धान की खेती में अपनाएं DSR तकनीक
यदि किसान धान की खेती करना चाहते हैं और बारिश सामान्य नहीं है तो डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक सबसे बेहतर विकल्प मानी जा रही है। इस तकनीक में धान की नर्सरी तैयार करने और रोपाई की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार DSR तकनीक अपनाने से 25 से 30 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। साथ ही श्रम लागत कम होती है, सिंचाई का खर्च घटता है और फसल भी जल्दी तैयार हो जाती है। हालांकि इस तकनीक में बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होना आवश्यक है और बीज उपचार व उचित बीज दर का विशेष ध्यान रखना चाहिए। Kam Barish Me Fasal Kaise Bachaye
4. खेत की नमी बचाने पर दें सबसे ज्यादा ध्यान
कम बारिश की स्थिति में खेत में मौजूद नमी को लंबे समय तक बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए कृषि विशेषज्ञ मल्चिंग तकनीक अपनाने की सलाह देते हैं। फसल की कतारों के बीच पुआल, सूखी पत्तियां या प्लास्टिक मल्च बिछाने से मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है और वाष्पीकरण कम होता है। Kam Barish Me Fasal Kaise Bachaye
इसके साथ ही ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली अपनाने से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है, जिससे पानी की बचत होती है और फसल की वृद्धि भी बेहतर रहती है। सरकार इन आधुनिक सिंचाई प्रणालियों पर विभिन्न योजनाओं के तहत सब्सिडी भी उपलब्ध करा रही है। Kam Barish Me Fasal Kaise Bachaye
5. मानसून में देरी हो तो कम अवधि वाली किस्मों की बुवाई करें
यदि जुलाई के मध्य तक पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो किसान सामान्य अवधि वाली किस्मों के बजाय कम अवधि में पकने वाली किस्मों का चयन करें। ICAR-CRIDA की आकस्मिक कृषि योजनाओं में ऐसी कई किस्मों की सिफारिश की गई है जो कम समय और कम पानी में भी अच्छी उपज देती हैं।
वैज्ञानिक बीज उपचार को भी बेहद जरूरी मानते हैं। उपचारित बीजों से अंकुरण बेहतर होता है और देर से बोई गई फसल रोगों से भी सुरक्षित रहती है। यदि धान की रोपाई संभव न हो तो उसी खेत में मोटे अनाज या दलहनी फसलें लगाना अधिक लाभदायक विकल्प हो सकता है। Kam Barish Me Fasal Kaise Bachaye
6. पशुओं के लिए पहले से करें चारे की व्यवस्था
कम बारिश का असर केवल फसलों तक सीमित नहीं रहता बल्कि पशुओं के लिए हरे चारे की भी कमी हो सकती है। इसलिए कृषि वैज्ञानिक किसानों को पहले से चारे का भंडारण करने की सलाह देते हैं। ज्वार और बाजरा जैसी चारा फसलें उगाकर भविष्य की जरूरत पूरी की जा सकती है। सरकार भी आवश्यकता पड़ने पर अन्य क्षेत्रों से चारा उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है। Kam Barish Me Fasal Kaise Bachaye
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7. सरकारी योजनाओं और वैज्ञानिक सलाह का पूरा लाभ उठाएं
कम बारिश जैसी परिस्थितियों में सरकारी योजनाएं किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत फसल नुकसान की भरपाई की जा सकती है। किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से समय पर खेती के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जबकि PM-KISAN योजना से मिलने वाली सहायता राशि का उपयोग बीज, खाद और सिंचाई पर किया जा सकता है। Kam Barish Me Fasal Kaise Bachaye
इसके अलावा किसान सारथी प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसान देशभर के 730 से अधिक कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), 100 से अधिक ICAR संस्थानों और 65 कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों से सीधे सलाह प्राप्त कर सकते हैं। यह सेवा मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल, व्हाट्सएप, किसान कॉल सेंटर और कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से उपलब्ध है। Kam Barish Me Fasal Kaise Bachaye
कृषि वैज्ञानिकों की किसानों को अंतिम सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश समय पर होगी या नहीं, यह किसी के नियंत्रण में नहीं है। लेकिन सही फसल का चयन, आधुनिक खेती तकनीकों का उपयोग, खेत में नमी का संरक्षण, जल प्रबंधन और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना पूरी तरह किसान के हाथ में है। यदि किसान समय रहते अपनी खेती की रणनीति बदलते हैं तो कम बारिश की स्थिति में भी अच्छी पैदावार और बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है।
इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विभाग या ICAR के विशेषज्ञों से संपर्क कर अपने जिले की मिट्टी, जलवायु और फसल के अनुसार वैज्ञानिक सलाह लेकर ही खेती से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लें। Kam Barish Me Fasal Kaise Bachaye
