Kapas Bhav Latest News : देश में कपास उत्पादक किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी और घरेलू स्तर पर मॉनसून की धीमी प्रगति के कारण कपास की कीमतों में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। भारतीय कपास निगम (CCI) के अनुसार पिछले कुछ दिनों में कपास के दाम करीब 1,100 रुपये प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) तक बढ़ चुके हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक मांग, सीमित आवक और बुवाई में कमी के चलते आने वाले समय में भी कपास के दाम मजबूत बने रह सकते हैं। Kapas Bhav Latest News
अंतरराष्ट्रीय बाजार की तेजी का दिखा असर
वैश्विक कपास बाजार में पिछले कुछ सप्ताह से तेजी बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय फ्यूचर्स मार्केट में कपास की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसका सीधा प्रभाव भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) की फसल समिति के अध्यक्ष अतुल गनात्रा के अनुसार ICE दिसंबर फ्यूचर्स की कीमतें 75 सेंट प्रति पाउंड से बढ़कर लगभग 80 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंच गई हैं।
इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कपास की मांग मजबूत हुई है और भारतीय बाजार को भी इसका समर्थन मिला है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब वैश्विक बाजार में कपास के दाम बढ़ते हैं तो निर्यात संभावनाएं बेहतर होती हैं, जिससे घरेलू बाजार में भी कीमतों को मजबूती मिलती है। Kapas Bhav Latest News
मॉनसून की देरी से प्रभावित हुई कपास की बुवाई
इस वर्ष देश के कई हिस्सों में मॉनसून की धीमी प्रगति ने कपास की बुवाई को प्रभावित किया है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार 19 जून 2026 तक देश में कपास की बुवाई लगभग 25 प्रतिशत कम हुई है। इस साल अब तक 17.13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 22.82 लाख हेक्टेयर था।
मॉनसून की अनिश्चितता और पर्याप्त वर्षा न होने के कारण किसानों ने बुवाई को टाल दिया है, जिससे कुल रकबे में गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो कुछ क्षेत्रों में बुवाई का रकबा बढ़ सकता है, लेकिन शुरुआती देरी का असर उत्पादन पर पड़ सकता है। Kapas Bhav Latest News
विदर्भ में अब तक शुरू नहीं हो सकी व्यापक बुवाई
महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र देश के प्रमुख कपास उत्पादक इलाकों में गिना जाता है। हालांकि इस बार यहां अधिकांश क्षेत्रों में कपास की बुवाई अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। केवल वे किसान जिनके पास ड्रिप सिंचाई जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, सीमित स्तर पर बुवाई कर पाए हैं। सामान्य तौर पर विदर्भ क्षेत्र में कपास की बुवाई जुलाई के मध्य तक जारी रहती है। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस वर्ष यहां कपास का रकबा लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, बशर्ते समय पर पर्याप्त वर्षा हो जाए। Kapas Bhav Latest News
अंतरराष्ट्रीय फ्यूचर्स बाजार में बनी हुई है मजबूती
कपास के वैश्विक फ्यूचर्स बाजार में भी मजबूती बनी हुई है। जुलाई ICE फ्यूचर्स लगभग 76.05 सेंट प्रति पाउंड और दिसंबर ICE फ्यूचर्स करीब 79.67 सेंट प्रति पाउंड के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। इन मजबूत संकेतों का असर भारतीय बाजार में भी देखने को मिल रहा है। निर्यातकों और कपड़ा उद्योग की मांग बढ़ने के कारण कपास की भौतिक कीमतों को समर्थन मिल रहा है। Kapas Bhav Latest News
CCI की बिक्री में आई तेजी
सरकारी खरीद एजेंसी भारतीय कपास निगम (CCI) की बिक्री में भी हाल के दिनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। व्यापारिक सूत्रों के अनुसार पिछले सप्ताह लगभग 7 लाख बेल कपास की बिक्री हुई है। यह दर्शाता है कि बाजार में मांग मजबूत बनी हुई है और खरीदार लगातार स्टॉक जुटाने में लगे हुए हैं। अच्छी गुणवत्ता वाले कपास की मांग विशेष रूप से अधिक बनी हुई है। Kapas Bhav Latest News
वर्तमान में क्या हैं कपास के ताजा दाम? Kapas Bhav Latest News
कपास के मौजूदा बाजार भावों की बात करें तो भारतीय कपास निगम (CCI) लगभग 62,500 रुपये से 63,200 रुपये प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) के दाम पर कपास बेच रहा है। वहीं मल्टीनेशनल कंपनियां CCI की तुलना में लगभग 1,000 रुपये प्रति कैंडी अधिक कीमत वसूल रही हैं। इसके अलावा पुनर्विक्रेता (Resellers) भी CCI के मुकाबले 300 से 500 रुपये अधिक दाम मांग रहे हैं। कीमतों में यह अंतर दर्शाता है कि बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाले कपास की मांग लगातार बनी हुई है और खरीदार ऊंचे दाम देने को तैयार हैं। Kapas Bhav Latest News
देश में कितना उपलब्ध है कपास का स्टॉक?
देश में वर्तमान समय में कपास का कुल उपलब्ध स्टॉक लगभग 182.50 लाख बेल (प्रति बेल 170 किलोग्राम) बताया जा रहा है। इसमें से करीब 94 लाख बेल कपास स्पिनिंग मिलों के पास मौजूद है। वहीं भारतीय कपास निगम (CCI) के पास लगभग 25.50 लाख बेल कपास का बिना बिका स्टॉक रखा हुआ है। इसके अलावा जिनिंग मिलों, MCX गोदामों और निजी व्यापारियों के पास मिलाकर लगभग 63 लाख बेल कपास उपलब्ध है। इससे स्पष्ट होता है कि देश में कपास की कुल उपलब्धता पर्याप्त है, लेकिन उच्च गुणवत्ता वाले कपास की मांग अभी भी बाजार को मजबूती दे रही है। Kapas Bhav Latest News
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किसानों के लिए क्या है बाजार संकेत?
कृषि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मॉनसून सामान्य रहता है और वैश्विक बाजार में तेजी बनी रहती है, तो कपास के दाम आने वाले समय में भी मजबूत बने रह सकते हैं। हालांकि उत्पादन और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा। यदि बुवाई में और देरी होती है या मौसम प्रतिकूल रहता है, तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। Kapas Bhav Latest News
निष्कर्ष
कमजोर मॉनसून, बुवाई में 25 प्रतिशत की गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत मांग के चलते भारत में कपास की कीमतों में उल्लेखनीय उछाल आया है। CCI के अनुसार कपास के दाम 1,100 रुपये प्रति कैंडी तक बढ़ चुके हैं। वर्तमान में बाजार को वैश्विक फ्यूचर्स बाजार, सीमित आवक और मजबूत मांग का समर्थन मिल रहा है। यदि यही स्थिति बनी रहती है तो आने वाले महीनों में कपास उत्पादक किसानों को बेहतर भाव मिलने की संभावना बनी रह सकती है। Kapas Bhav Latest News
