देशभर में मॉनसून के सक्रिय होने के बाद Kapas Buwai Ka Rakba 100 Lakh Hectare Ke Paar 2026 का बड़ा अपडेट सामने आया है। इस खरीफ सीजन में किसानों ने तेजी से कपास की बुवाई पूरी की है और अब तक 100 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कपास बोई जा चुकी है। तेलंगाना, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में पिछले साल की तुलना में कपास का रकबा बढ़ा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश होती रही तो इस बार कपास का उत्पादन भी बेहतर रह सकता है।
मॉनसून के बाद बढ़ी कपास बुवाई की रफ्तार
इस वर्ष मॉनसून की शुरुआत देर से होने के कारण कई राज्यों में कपास की बुवाई 20 से 30 दिन तक प्रभावित रही। हालांकि जुलाई के अंतिम सप्ताह में अच्छी बारिश होने के बाद किसानों ने तेजी से बुवाई पूरी की। इसी का परिणाम है कि Kapas Buwai Ka Rakba 100 Lakh Hectare Ke Paar 2026 का आंकड़ा अब 100 लाख हेक्टेयर से आगे निकल चुका है।
100 लाख हेक्टेयर से अधिक पहुंचा कपास का रकबा
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) की फसल समिति के अध्यक्ष अतुल गणात्रा के अनुसार, देश में अब तक 100 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कपास की बुवाई हो चुकी है। पिछले वर्ष इसी समय लगभग 103 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई दर्ज की गई थी। हाल की अच्छी बारिश से उन इलाकों में भी किसानों को राहत मिली है, जहां पहले वर्षा की कमी के कारण बुवाई नहीं हो पा रही थी। इसी वजह से Kapas Buwai Ka Rakba 100 Lakh Hectare Ke Paar 2026 इस सीजन का महत्वपूर्ण कृषि अपडेट बन गया है।
25 अगस्त तक बढ़ाई गई कपास बुवाई की समय सीमा
CAI ने बताया कि मॉनसून में देरी को देखते हुए इस वर्ष कपास की बुवाई की अंतिम तिथि 25 अगस्त तक बढ़ा दी गई है। संगठन का अनुमान है कि 20 अगस्त तक सरकार का 120 लाख हेक्टेयर कपास बुवाई लक्ष्य पूरा किया जा सकता है। फिलहाल देशभर में प्रतिदिन लगभग 50,000 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हो रही है, जिससे Kapas Buwai Ka Rakba 100 Lakh Hectare Ke Paar 2026 का आंकड़ा आगे और बढ़ने की संभावना है।
तेलंगाना, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में बढ़ा रकबा
इस सीजन में तेलंगाना, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में कपास की खेती का क्षेत्र बढ़ा है।आंध्र प्रदेश में कपास का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 31 प्रतिशत बढ़ा है। तेलंगाना में लगभग 4 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है और यहां कुल 17.64 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हो चुकी है। मध्य प्रदेश में कपास का रकबा बढ़कर 5.79 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। इन आंकड़ों से साफ है कि Kapas Buwai Ka Rakba 100 Lakh Hectare Ke Paar 2026 का सबसे अधिक लाभ इन राज्यों को मिला है।
गुजरात और महाराष्ट्र की स्थिति
27 जुलाई तक गुजरात में लगभग 20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है, जो पिछले वर्ष के 20.16 लाख हेक्टेयर से थोड़ा कम है। हालांकि राज्य सरकार द्वारा ₹14,000 प्रति एकड़ सब्सिडी की घोषणा और हालिया बारिश के बाद यहां कपास का रकबा 7 से 10 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है।महाराष्ट्र में इस वर्ष 35.76 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास बोई गई है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 37.89 लाख हेक्टेयर था। इसके बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर Kapas Buwai Ka Rakba 100 Lakh Hectare Ke Paar 2026 का लक्ष्य मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है।
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सितंबर के पहले सप्ताह से शुरू हो सकती है नई कपास की आवक
कपास विशेषज्ञों का कहना है कि देश के अधिकांश कपास उत्पादक क्षेत्रों में फसल की स्थिति फिलहाल अच्छी बनी हुई है। यदि आगे भी पर्याप्त बारिश होती रही तो पौधों की वृद्धि और बेहतर होगी। उत्तर भारत और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में लगभग 15 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जल्दी बोई गई कपास की आवक सितंबर के पहले सप्ताह से मंडियों में शुरू होने की संभावना है। इससे Kapas Buwai Ka Rakba 100 Lakh Hectare Ke Paar 2026 का सकारात्मक असर बाजारों में भी देखने को मिल सकता है।
तेलंगाना में पूरी हुई कपास बुवाई
रायचूर के कपास कारोबारी रामानुज दास बोब के अनुसार, तेलंगाना में कपास की बुवाई पूरी हो चुकी है और अच्छी बारिश के कारण फसल की स्थिति बेहतर बनी हुई है। कर्नाटक के रायचूर और आंध्र प्रदेश के अडोनी क्षेत्र में भी वर्षा से फसल को लाभ मिला है। हालांकि जिन इलाकों में बारिश देर से हुई, वहां पौधों की ऊंचाई पर कुछ असर पड़ सकता है। इसके बावजूद इस वर्ष कुल कपास रकबा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक रहने की संभावना है, जिससे Kapas Buwai Ka Rakba 100 Lakh Hectare Ke Paar 2026 के साथ उत्पादन में भी बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है.
