Kapas Ki Kheti Kese Kare Or Iski Top Kisme Konsi Hai; कपास से न केवल रेशा मिलता है, बल्कि कपास के बीज से तेल और खली भी प्राप्त होती है। कपास उद्योग में खेती से लेकर वस्त्र निर्माण तक कई स्तरों पर रोजगार मिलता है। भारत विश्व के प्रमुख कपास उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। भारत में कपास की खेती महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश व राजस्थान में प्रमुखता से की जाती है।
कपास का उपयोग
कपास के रेशे से धागा और कपड़ा बनता है। इसके बीज से कपास का तेल और पशु आहार (खली) मिलती है। इसका उपयोग कुछ औद्योगिक उत्पादों जैसे बैडिंग, रुई, कागज आदि में भी उपयोग होता है। Kapas Ki Kheti Kese Kare Or Iski Top Kisme Konsi Hai

कपास की खेती का समय
खरीफ मौसम की फसल है, जिसे जून से जुलाई के बीच बोया जाता है। कुछ क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा होने पर अप्रैल-मई में भी बुवाई की जाती है। जैसे कि उत्तरी भारत के पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में कपास की बुवाई का समय अप्रैल के अंत से जून की शुरुआत तक होता है। मध्य भारत (महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात)मई के मध्य से जुलाई तक और दक्षिण भारत (तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु) जून से जुलाई का बेहतर माना जाता है। वहीं सिंचाई वाले क्षेत्रों में इसकी बुवाई फरवरी से अप्रैल भी की जा सकती है। Kapas Ki Kheti Kese Kare Or Iski Top Kisme Konsi Hai
कपास की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी Kapas Ki Kheti Kese Kare Or Iski Top Kisme Konsi Hai
कपास (Cotton) एक गहरी जड़ वाली फसल है, जिसे बढ़ने के लिए ऐसी मिट्टी की आवश्यकता होती है जो जलधारण क्षमता, उर्वरता और संतुलित पोषक तत्वों से भरपूर हो। कपास के लिए काली मिट्टी (ब्लैक सॉयल / रेगुर मिट्टी) सबसे सबसे उपयुक्त मिट्टी कपास की खेती के लिए मानी जाती है। यह मिट्टी चिकनी और गहरी होती है, जिसमें जलधारण क्षमता (Water Holding Capacity) बहुत अधिक होती है। इसमें चूना, लोहा, चिपकने वाला पदार्थ (Montmorillonite) जैसे तत्व पाए जाते हैं। इसके अलावा मध्यम काली मिट्टी (Medium Black Soil) भी कपास की खेती के लिएअच्छी है। यह भी अच्छी उपज देती है, लेकिन गहरी काली मिट्टी की तुलना में जल रोकने की क्षमता थोड़ी कम होती है। यदि सिंचाई की सुविधा हो तो यह भी कपास के लिए उपयुक्त है। वहीं जलोढ़ मिट्टी में भी इसकी खेती की जा सकती है बेशर्त हैं यह अच्छी तरह से तैया और उपजाऊ हो। वहीं कपास की खेती बहुत रेतीली मिट्टी, जल जमाव वाली भूमि व अत्यधिक खारी या क्षारीय मिट्टी में नहीं की जा सकती है। कपास की खेती के लिए मिट्टी का pH मान 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए। Kapas Ki Kheti Kese Kare Or Iski Top Kisme Konsi Hai
कपास की खेती के लिए उन्नत किस्में
भारत में कपास कई किस्में लोकप्रिय हैं जिनमें Bt कपास (बीटी कपास), आरएचएचएच-952, एनसीसी-138, एलएचएच-144, सीआईसीआर-2 (CICR-2), डब्ल्यूएचएच-123, सुरजमुखी कपास (Suraj), एफ-1861 (F-1861) आदि है जो बेहतर उपज देने वाली मानी जाती हैं। उन्नत किस्मों का चयन करते समय किसान अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार किस्म का चुनें और बीच प्रमाणित और अनुसंधान संस्थानों से ही खरीदें। इसके अलावा इस संबंध में स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें। Kapas Ki Kheti Kese Kare Or Iski Top Kisme Konsi Hai
कपास की बुवाई का तरीका
कपास की खेती के लिए सबसे पहले खेत की तैयारी करनी चाहिए। इसके लिए सबसे पहले मिट्टी पलटने वाले हल से एक बार खेत की गहरी जुताई करें। इसके बाद 2–3 बार देशी हल या रोटावेटर से जुताई करें। मिट्टी को भुरभुरा बनाएं और अच्छे जल निकास की व्यवस्था करें। अंतिम जुताई के समय 8–10 टन गोबर की खाद प्रति एकड़ डालें। Kapas Ki Kheti Kese Kare Or Iski Top Kisme Konsi Hai
कपास की बुवाई का समय
- उत्तर भारत: मध्य अप्रैल से मई तक
- मध्य भारत: मई के अंत से जून तक (मानसून पूर्व या वर्षा शुरू होने पर)
- दक्षिण भारत: जून से जुलाई तक
कपास की बुवाई के लिए बीज की मात्रा Kapas Ki Kheti Kese Kare Or Iski Top Kisme Konsi Hai
- हाइब्रिड बीटी कपास: 450–600 ग्राम प्रति एकड़
- देशी किस्म: 2.5–3 किग्रा प्रति एकड़
बुवाई से पहले बीज को फफूंदनाशी (थायरम या कार्बेन्डाजिम 2-3 ग्राम/किग्रा बीज) से उपचारित करना चाहिए। नमी बनाए रखने और अंकुरण बढ़ाने के लिए जैव उर्वरक (जैसे राइजोबियम) से भी ट्रीट कर सकते हैं। Kapas Ki Kheti Kese Kare Or Iski Top Kisme Konsi Hai
कपास के बीजों की बुवाई का तरीका
कपास के बीजों की बुवाई करते समय कतार से कतार दूरी 4 से 4.5 फीट (120–135 सेमी) और पौधे से पौधे की दूरी 1.5 से 2 फीट (45–60 सेमी) रखी जाती है। वहीं बुवाई सीधी कतारों में ड्रिल मशीन या देशी हल से करना अच्छा रहता है। बीज को 3–5 सेमी की गहराई पर बोया जाता है। वर्षा न होने की स्थिति में बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए। अंकुरण के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। बुवाई के बाद खेत को 5–7 दिन तक खुला छोड़ दें ताकि खरपतवार जल्दी उगें, फिर उन्हें उखाड़ कर फेंक देना चाहिए। पौधों की संख्या संतुलित रखें, ऐसे में बहुत घनी बुवाई न करें और बुवाई के लिए अनुशंसित कपास की उन्नत किस्में ही प्रयोग करें। Kapas Ki Kheti Kese Kare Or Iski Top Kisme Konsi Hai
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कपास की खेती में खाद और उर्वरक का प्रयोग
कपास में DAP (डाय अमोनियम फॉस्फेट) का उपयोग 100–125 किग्रा/हेक्टेयर बुआई के समय खेत में डालें।
इससे फसल को शुरुआती नाइट्रोजन और फास्फोरस मिलता है। वहीं NPK (19:19:19 या 12:32:16) – मिट्टी जांच के अनुसार उपयुक्त मात्रा में डाल सकते हैं। नाइट्रोजन (N) का टॉप ड्रेसिंग में प्रयोग करें। यूरिया या अन्य नाइट्रोजन उर्वरक का प्रयोग दो बार करना चाहिए। पहली बार 25–30 दिन बाद और दूसरी बार 60–65 दिन के बाद प्रयोग करें। कुल 60–80 किग्रा नाइट्रोजन प्रति हैक्टेयर मिट्टी के अनुसार देना चाहिए। सल्फर, जिंक और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व में सल्फर जो फसल की रेशा क्वालिटी के लिए जरूरी होता है। इसे 15–20 किग्रा सल्फर/हेक्टेयर देना लाभकारी रहता है। जिंक की कमी वाली मिट्टी में 25 किग्रा प्रति हैक्टेयर प्रयोग करना चाहिए। फूल और बॉल्स की अच्छी ग्रोथ के लिए 1 किग्रा बोरॉन प्रति हेक्टेयर फोलियर स्प्रे द्वारा फोलियर स्प्रे (पत्तियों पर छिड़काव) करना चाहिए। फूल आने और बॉल बनने के समय पर 15 दिन के अंतर में NPK 19:19:19 (1%) या 13:00:45 का दो–तीन बार छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा राज्य कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित मिश्रण माइक्रोन्यूट्रिएंट मिक्सचर का उपयोग किया जा सकता है। किसान इस बात कर विशेष ध्यान रखें कि वे वे मिट्टी की जांच कराएं और उसी के अनुसार उर्वरक का संतुलित उपयोग करें। इससे लागत भी बचेगी और उत्पादन भी बढ़ेगा। Kapas Ki Kheti Kese Kare Or Iski Top Kisme Konsi Hai
कपास में सिंचाई प्रबंधन
कपास एक गहरी जड़ वाली फसल है, जिसे उसकी वृद्धि के विभिन्न चरणों में सही समय पर सिंचाई की आवश्यकता होती है। सिंचाई की मात्रा, समय और विधि का फसल की उपज और गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है। कपास की औसतन 6 से 8 बार सिंचाई पर्याप्त होती है जो स्थानीय जलवायु और मिट्टी पर निर्भर करता है। इसका सिंचाई अंतराल आमतौर पर 15–20 दिन का होता है। बीज अंकुरण के लिए बुवाई के तुरंत बाद सिंचाई करनी चाहिए। इसके बाद 20–25 दिन बाद शाखा विकास समय सिंचाई की जाती है। 40–50 दिन बाद कल्ले और फूल निकलते समय सिंचाई करनी चाहिए इससे फूलों की संख्या बढ़ाती है। बॉल्स का आकार और वजन बढ़ाने के लिए 60–75 दिन में सिंचाई करनी चाहिए। इसके बाद 90–100 दिन में बोल पकने के समय सिंचाई करनी चाहिए इससे रेशा भरने और पकाने में सहायता मिलती है। इस बात का ध्यान रखें कि फूल आने और बॉल बनने की अवस्था में नमी की कमी से उपज में भारी गिरावट आ सकती है। ऐसे में निर्धारित समय पर सिंचाई करें। Kapas Ki Kheti Kese Kare Or Iski Top Kisme Konsi Hai
कपास में सिंचाई की विधियां
कपास की सिंचाई की विधियों में नाली (Furrow) विधि सबसे अधिक प्रचलित विधि है। इसमें हर दो कतारों के बीच नाली बनाकर पानी दिया जाता है। इस दौरान मिट्टी में जलभराव न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाता है। इसके अलावा ड्रिप इरिगेशन, स्प्रिंकलर सिस्टम से सिंचाई की जाती है। हालांकि फूल और बॉल बनने के समय स्प्रिंकलर से सिंचाई करने से बचना चाहिए ताकि फूल झड़ें नहीं। सिंचाई के समय कुछ बातों का ध्यान रखें, जैसे– जलभराव से बचें क्योंकि अधिक पानी से जड़ सड़न और पत्तियों में रोग लग सकते हैं। अंतिम सिंचाई बॉल पकने से लगभग 15 दिन पहले रोक दें। तेज बारिश के तुरंत बाद सिंचाई न करें। Kapas Ki Kheti Kese Kare Or Iski Top Kisme Konsi Hai
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कपास की खेती में खरपतवार नियंत्रण
कपास की बोआई के 15–20 दिन बाद पहली निंदाई-गुड़ाई करें। दूसरी गुड़ाई 30–35 दिन बाद करें, जिससे खरपतवार नष्ट हो जाएं। रासायनिक नियंत्रण के लिए बोआई के तुरंत बाद पेंडीमेथालिन 30% EC की 3.3 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर छिड़कें। घास जैसे खरपतवार दिखने पर क्विजालोफॉप-पी-एथाइल या फ्लुआज़िफॉप-पी-ब्यूटाइल दवा का प्रयोग करें। खरपतवारों को दबाने के लिए कपास के साथ मूंग या उड़द की अंतरवर्ती फसल (Intercropping) करें। मल्चिंग करने से भी खरपतवार की बढ़त रुकी रहती है। दवाओं का छिड़काव लेबल के निर्देशानुसार और कृषि विशेषज्ञ की सलाह से करें। खेत में अवांछित खरपतवार समय से हटाते रहें, इससे उत्पादन बढ़ता है। Kapas Ki Kheti Kese Kare Or Iski Top Kisme Konsi Hai

कपास की कटाई और प्राप्त उपज
कपास की पहली चुगाई बॉल फटने के 15–20 दिन बाद करें। कटाई सुबह के समय करें जब ओस कम हो, ताकि रेशा गीला न हो। बॉल्स पूरी तरह फटे हों तभी चुगाई करें, अधपकी बॉल्स से रेशा खराब होता है। हर 15–20 दिन के अंतर पर 3–4 चुगाइयाँ करें। चुनते समय सूखे पत्ते या डंठल न तोड़ें, इससे रेशा की गुणवत्ता घटती है। चुनी गई कपास को छाया में सुखाकर फिर भंडारण करें। उन्नत किस्मों और सही प्रबंधन से 20–25 क्विंटल/हेक्टेयर तक उपज मिल सकती है। पानी की सुविधा और उर्वरक संतुलन अच्छा हो तो उपज और भी अधिक हो सकती है।Kapas Ki Kheti Kese Kare Or Iski Top Kisme Konsi Hai
कपास का भंडारण Kapas Ki Kheti Kese Kare Or Iski Top Kisme Konsi Hai
कपास को अच्छी तरह सूखाकर ही भंडारण करें। सूखे और हवादार कमरे में ही कपास रखें। जमीन से ऊपर लकड़ी के तख्त या प्लेटफॉर्म पर स्टोर करें। सीलन, नमी और कीटों से बचाने के लिए नियमित निरीक्षण करें। बोरियों में भरकर रखें और बोरियों को दीवार से दूर रखें। नमी 8–10% से अधिक न हो, वरना रेशा सड़ सकता है। भंडारण स्थल पर कीट-नियंत्रण के उपाय करें, जैसे नीम की पत्तियां या कीटनाशक आदि। Kapas Ki Kheti Kese Kare Or Iski Top Kisme Konsi Hai
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