Karela Farming Success Story in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के किसान नारायण प्रसाद वर्मा ने पारंपरिक धान की खेती के साथ करेले की खेती शुरू कर अपनी आमदनी बढ़ाने की मिसाल पेश की है। आधुनिक कृषि तकनीक, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग का इस्तेमाल करने से उन्हें एक एकड़ में करीब 12 टन करेला उत्पादन मिला। खेती का खर्च निकालने के बाद उन्हें करीब ₹1.07 लाख का शुद्ध मुनाफा हुआ। यह Karela Farming Success Story in Chhattisgarh उन किसानों के लिए प्रेरणा है, जो पारंपरिक खेती के साथ सब्जियों और उद्यानिकी फसलों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाना चाहते हैं।
नारायण प्रसाद वर्मा ने धान के साथ शुरू की करेले की खेती
महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम टेंगराही निवासी नारायण प्रसाद वर्मा के पास कुल 1.06 हेक्टेयर कृषि भूमि है। पहले वे मुख्य रूप से धान की खेती करते थे। हालांकि, सीमित आमदनी को देखते हुए उन्होंने खेती में बदलाव करने का फैसला लिया। उन्होंने धान के साथ उद्यानिकी फसलों की खेती शुरू की और करेले को अपनी प्रमुख सब्जी फसल के रूप में चुना। सही तकनीक और बेहतर प्रबंधन के कारण उन्हें करेले की खेती में अच्छी सफलता मिली। नारायण प्रसाद की Karela Farming Success Story in Chhattisgarh बताती है कि किसान फसल विविधीकरण के जरिए अपनी कृषि आय को बढ़ा सकते हैं।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिला अनुदान
करेले की खेती को बढ़ावा देने में सरकारी योजना ने भी किसान की मदद की। वर्ष 2025-26 में सब्जी क्षेत्र विस्तार योजना के तहत उन्हें एक हेक्टेयर में करेला उगाने के लिए ₹24 हजार का अनुदान मिला। इसके अलावा सब्जी फसलों के लिए 0.50 हेक्टेयर क्षेत्र में सपोर्ट सिस्टम लगाने के लिए ₹5 हजार का अनुदान भी दिया गया। यह राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे किसान के बैंक खाते में पहुंचाई गई। सरकारी सहायता मिलने से किसान को आधुनिक तकनीक अपनाने और सब्जी की खेती का विस्तार करने में आर्थिक मदद मिली।
ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग से बढ़ा उत्पादन
नारायण प्रसाद ने करेले की खेती में ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और आधुनिक कृषि यंत्रों का इस्तेमाल किया। ड्रिप सिंचाई से पौधों तक जरूरत के अनुसार पानी पहुंचाने में मदद मिली, जिससे पानी की बचत हुई। वहीं, मल्चिंग तकनीक से खेत में नमी बनाए रखने और खरपतवार को नियंत्रित करने में मदद मिली। आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से फसल की देखभाल भी आसान हुई और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर हुई। Karela Farming Success Story in Chhattisgarh
एक एकड़ में मिला 12 टन करेले का उत्पादन
नारायण प्रसाद वर्मा को करेले की खेती में बेहतर उत्पादन मिला। उन्होंने एक एकड़ में करीब 12 टन करेला पैदा किया। फसल तैयार होने के बाद बाजार में उचित भाव मिलने से उनकी आमदनी अच्छी रही। खेती पर हुए खर्च को निकालने के बाद उन्हें करीब ₹1.07 लाख का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। यही वजह है कि Karela Farming Success Story in Chhattisgarh अब दूसरे किसानों के लिए भी चर्चा का विषय बन रही है। Karela Farming Success Story in Chhattisgarh
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करेले की खेती से बढ़ी किसान की आमदनी
पहले नारायण प्रसाद मुख्य रूप से धान की खेती पर निर्भर थे। धान के साथ सब्जियों की खेती शुरू करने से उन्हें अतिरिक्त आमदनी का मौका मिला। करेले की फसल में आधुनिक तकनीक और सरकारी सहायता का इस्तेमाल करके उन्होंने कम जमीन में बेहतर उत्पादन हासिल किया। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी मदद मिली।
दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बनी यह सफलता
नारायण प्रसाद वर्मा की सफलता यह दिखाती है कि किसान अगर पारंपरिक खेती के साथ फसल विविधीकरण अपनाएं और आधुनिक कृषि तकनीकों का इस्तेमाल करें, तो खेती को ज्यादा लाभकारी बनाया जा सकता है। किसानों को अपनी जमीन, पानी और स्थानीय बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सब्जी और उद्यानिकी फसलों का चयन करना चाहिए।
साथ ही पात्रता के अनुसार सरकारी योजनाओं और अनुदान का लाभ लेना भी फायदेमंद हो सकता है। महासमुंद के किसान नारायण प्रसाद वर्मा की Karela Farming Success Story in Chhattisgarh इस बात की मिसाल है कि सही फसल का चुनाव, आधुनिक तकनीक और सरकारी सहायता मिलकर खेती से होने वाली आमदनी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
