आंध्र प्रदेश में इस बार कमजोर मॉनसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। 1 जून से 15 जुलाई के बीच राज्य में सामान्य से 48.3 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। लगातार घटती वर्षा का असर खरीफ सीजन की बुवाई पर साफ दिखाई देने लगा है। Kharif Fasal Par El Nino Ka Asar अब राज्य के कई जिलों में महसूस किया जा रहा है, जहां खेतों में नमी की कमी और सिंचाई के सीमित संसाधनों के कारण किसान परेशान हैं। हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने कृषि विभाग और स्थानीय अधिकारियों को किसानों तक समय पर सलाह पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
Kharif Fasal Par El Nino Ka Asar से बढ़ी खेती की चुनौती
कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष Kharif Fasal Par El Nino Ka Asar सबसे अधिक आंध्र प्रदेश के रायलसीमा और अन्य कम वर्षा वाले क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। अल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ा है, जिससे बारिश का वितरण असमान हो गया है। इसका सीधा असर धान, मक्का, दालों और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ रहा है। कई इलाकों में किसान पर्याप्त नमी नहीं मिलने के कारण बुवाई टालने या वैकल्पिक फसलों की ओर रुख करने पर मजबूर हैं।
कृषि विभाग के विशेष मुख्य सचिव बी. राजशेखर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को मौसम आधारित खेती, जल संरक्षण और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाए, ताकि Kharif Fasal Par El Nino Ka Asar से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
24 जिलों में सामान्य से कम बारिश, चार जिलों में गंभीर स्थिति
मौसम के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 15 जुलाई के बीच राज्य के 24 जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है, जबकि चार जिलों में हालात अधिक गंभीर बने हुए हैं। कई क्षेत्रों में जलाशयों का जलस्तर घट रहा है और खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण खरीफ फसलों का विकास प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती है तो Kharif Fasal Par El Nino Ka Asar और अधिक गहरा सकता है।
रायतू सेवा केंद्रों के माध्यम से किसानों तक पहुंचेगी मौसम आधारित सलाह
राज्य सरकार ने किसानों की सहायता के लिए संचालित 8,489 रायतू सेवा केंद्रों की समीक्षा की है। इनमें से 1,357 केंद्रों को अत्यधिक जोखिम, 2,077 केंद्रों को मध्यम जोखिम और 5,055 केंद्रों को कम जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को मौसम की ताजा जानकारी, फसल प्रबंधन और सरकारी योजनाओं से जुड़ी सलाह लगातार उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्य सचिव जी. साई प्रसाद ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि रायतू सेवा केंद्रों और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए किसानों तक समय पर जानकारी पहुंचाई जाए। साथ ही कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों के लिए पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध रखने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि Kharif Fasal Par El Nino Ka Asar का प्रभाव कम किया जा सके।
कम पानी वाली फसलों और वैज्ञानिक खेती पर सरकार का फोकस
कम बारिश की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की खेती करने की सलाह दे रही है। इसके साथ ही प्री-मॉनसून ड्राई सोइंग (PMDS), प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक खेती के इन तरीकों से Kharif Fasal Par El Nino Ka Asar के बावजूद फसल उत्पादन को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
खरीफ फसलों पर मंडराया संकट, केंद्र से मांगी आर्थिक मदद
मिर्च, प्याज, आम और बागवानी फसलों पर सबसे अधिक खतरा
बागवानी आयुक्त श्रीनिवासुलु के अनुसार मिर्च, प्याज, सब्जियां, आम, संतरा और नींबू जैसी बागवानी फसलें इस बार सबसे अधिक प्रभावित हो सकती हैं। कम बारिश, बढ़ते तापमान और गिरते भूजल स्तर के कारण इन फसलों की पैदावार में कमी आने की आशंका है। विशेषज्ञों ने किसानों को ड्रिप सिंचाई, खेत तालाब, सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग और शेड नेट जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने की सलाह दी है। इन उपायों से Kharif Fasal Par El Nino Ka Asar के कारण होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
मछली पालन पर भी सरकार की विशेष निगरानी
कम बारिश का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है बल्कि एक्वाकल्चर यानी मछली पालन क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। इसलिए सरकार ने अधिकारियों को तालाबों और जलाशयों में पानी के स्तर, पानी की गुणवत्ता और ऑक्सीजन की मात्रा की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। संभावित बीमारियों की रोकथाम के लिए भी पहले से तैयारी करने को कहा गया है ताकि किसानों और मछली पालकों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके। लगातार बदलते मौसम को देखते हुए Kharif Fasal Par El Nino Ka Asar पर कृषि विभाग लगातार नजर बनाए हुए है।
