Kharif Ki Buwai 2026: बारिश से बढ़ी खरीफ बुवाई, 894 लाख हेक्टेयर के पार पहुंचा रकबा

Kharif Ki Buwai 2026: बारिश से बढ़ी खरीफ बुवाई, 894 लाख हेक्टेयर के पार पहुंचा रकबा

देशभर में मानसून की सक्रियता का सीधा असर Kharif Ki Buwai 2026 पर देखने को मिल रहा है। पिछले सप्ताह हुई अच्छी बारिश के कारण किसानों ने तेजी से खेतों में बुवाई और रोपाई का कार्य पूरा किया। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार 31 जुलाई तक देश में Kharif Ki Buwai 2026 का कुल रकबा 894.22 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। हालांकि यह पिछले वर्ष के मुकाबले 2.9 प्रतिशत कम है, लेकिन बुवाई का अंतर लगातार घट रहा है। सबसे अच्छी प्रगति तिलहन फसलों में देखने को मिली है, जबकि धान, दलहन, कपास और मोटे अनाज की बुवाई अभी भी पिछले साल के स्तर से पीछे है।

अच्छी बारिश से तेज हुई Kharif Ki Buwai 2026

25 जुलाई से 31 जुलाई के बीच देशभर में लगभग 107 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 94.5 लाख हेक्टेयर था। लगातार बारिश मिलने से किसानों को खेत तैयार करने और समय पर बुवाई करने का बेहतर अवसर मिला। यही वजह है कि Kharif Ki Buwai 2026 की गति पिछले सप्ताह के मुकाबले काफी तेज रही।

894.22 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा कुल बुवाई रकबा

कृषि मंत्रालय के अनुसार 31 जुलाई तक Kharif Ki Buwai 2026 के तहत कुल 894.22 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है। पिछले वर्ष इसी समय तक यह रकबा 920.72 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार कुल बुवाई में केवल 2.9 प्रतिशत की कमी रह गई है। यह सामान्य खरीफ बुवाई क्षेत्र 1,104.46 लाख हेक्टेयर का लगभग 81 प्रतिशत है।

धान की बुवाई अभी भी पिछले साल से कम

देश की सबसे महत्वपूर्ण खरीफ फसल धान की रोपाई में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन Kharif Ki Buwai 2026 के दौरान धान का रकबा अभी भी पिछले वर्ष से कम बना हुआ है।31 जुलाई तक धान की रोपाई 301.49 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह 308.39 लाख हेक्टेयर थी। यानी धान की बुवाई में लगभग 2.2 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।सरकार ने खरीफ 2026 के लिए 1231.5 लाख टन चावल उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगस्त में भी मानसून अनुकूल रहा तो उत्पादन लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

दलहन की बुवाई में सुधार के संकेत

Kharif Ki Buwai 2026 के आंकड़ों के अनुसार दलहन की बुवाई 95.18 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह 101.60 लाख हेक्टेयर थी। हालांकि पिछले सप्ताह के मुकाबले कमी कम होकर 6.3 प्रतिशत रह गई है।अरहर की बुवाई 34.91 लाख हेक्टेयर, मूंग की 29.22 लाख हेक्टेयर और उड़द की 21.08 लाख हेक्टेयर में हुई है। उड़द का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ा है, जो किसानों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

तिलहन में Kharif Ki Buwai 2026 ने बनाया नया रिकॉर्ड

इस बार Kharif Ki Buwai 2026 में सबसे बेहतर प्रदर्शन तिलहन फसलों का रहा है। तिलहन की कुल बुवाई 172.32 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जबकि पिछले वर्ष यह 171.13 लाख हेक्टेयर थी। यानी इस सीजन में पहली बार तिलहन का रकबा पिछले साल से अधिक हो गया है।सरकार ने खरीफ 2026 में 2.89 करोड़ टन तिलहन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें सोयाबीन और मूंगफली का सबसे बड़ा योगदान रहने की उम्मीद है।

सोयाबीन और मूंगफली की स्थिति

सोयाबीन की बुवाई 117.68 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले वर्ष से थोड़ी कम है। वहीं मूंगफली का रकबा बढ़कर 43.06 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। तिलहन की बेहतर प्रगति से किसानों को आने वाले समय में बेहतर उत्पादन की उम्मीद है।

कपास की बुवाई में हल्की गिरावट

Kharif Ki Buwai 2026 के दौरान कपास की बुवाई 103.54 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह 106.06 लाख हेक्टेयर थी। यानी कपास का कुल रकबा लगभग 2 प्रतिशत कम दर्ज किया गया है।

गन्ना, जूट और मेस्ता की बुवाई पूरी

गन्ने की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है और इसका कुल रकबा 57.58 लाख हेक्टेयर रहा है। वहीं जूट और मेस्ता की बुवाई भी पूरी हो चुकी है तथा इनका रकबा बढ़कर 6.33 लाख हेक्टेयर हो गया है।

मोटे अनाज की बुवाई अब भी पीछे

Kharif Ki Buwai 2026 के तहत मोटे अनाज (श्री अन्न) की बुवाई 157.77 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह 170.60 लाख हेक्टेयर थी। यानी कुल रकबा 7.5 प्रतिशत कम है।फसलवार आंकड़ों के अनुसार ज्वार 12.16 लाख हेक्टेयर, बाजरा 57.44 लाख हेक्टेयर, रागी 1.87 लाख हेक्टेयर और मक्का 83.56 लाख हेक्टेयर में बोई गई है। इनमें अधिकांश फसलों का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में कम दर्ज किया गया है।

अगस्त का मौसम तय करेगा आगे की तस्वीर

विशेषज्ञों का मानना है कि Kharif Ki Buwai 2026 में अगस्त का महीना बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। यदि मानसून सामान्य बना रहता है तो धान, दलहन और मोटे अनाज की बुवाई में तेजी आ सकती है। वहीं तिलहन की रिकॉर्ड बुवाई इस सीजन को किसानों और देश के खाद्य तेल उत्पादन के लिए काफी सकारात्मक बना सकती है।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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