7000 रुपये प्रति टन की मांग पर अड़े किसान, 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन Maharashtra Mein Ganne Ka Bhav

7000 रुपये प्रति टन की मांग पर अड़े किसान, 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन Maharashtra Mein Ganne Ka Bhav

Maharashtra Mein Ganne Ka Bhav: महाराष्ट्र के गन्ना किसान गन्ने के उचित दाम की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी में हैं। किसान संगठनों की ओर से 7000 रुपये प्रति टन गन्ना भाव की मांग की जा रही है। ऐसे में किसानों के बीच Maharashtra Mein Ganne Ka Bhav को लेकर चर्चा तेज हो गई है। किसान संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर 2 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।

किसानों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में खेती की लागत लगातार बढ़ी है। खाद, बीज, डीजल, बिजली, सिंचाई और मजदूरी पर पहले के मुकाबले काफी अधिक खर्च हो रहा है। इसके बावजूद गन्ने की कीमत में लागत के अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है। यही वजह है कि अब किसान Maharashtra Mein Ganne Ka Bhav बढ़ाकर 7000 रुपये प्रति टन करने की मांग कर रहे हैं।

Maharashtra Mein Ganne Ka Bhav 7000 रुपये करने की मांग

रैयत क्रांति किसान संगठन के महाराष्ट्र अध्यक्ष दीपक भोसले के अनुसार, गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। किसानों को खेती में अधिक खर्च करना पड़ रहा है, लेकिन उनकी आमदनी उस अनुपात में नहीं बढ़ रही है। किसान संगठनों के मुताबिक, वर्तमान में कई चीनी मिलों की ओर से करीब 2200 से 2800 रुपये प्रति टन के आसपास भुगतान किया जा रहा है। इसके मुकाबले किसान 7000 रुपये प्रति टन का भाव मांग रहे हैं। Maharashtra Mein Ganne Ka Bhav

किसानों का कहना है कि Maharashtra Mein Ganne Ka Bhav तय करते समय केवल गन्ने से बनने वाली चीनी को ही नहीं, बल्कि इथेनॉल और दूसरे उत्पादों से होने वाली आय को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। किसानों का तर्क है कि गन्ने से चीनी के अलावा इथेनॉल सहित कई उत्पाद तैयार होते हैं। यदि इन उत्पादों से चीनी मिलों को अतिरिक्त आमदनी होती है, तो उसका उचित हिस्सा गन्ना किसानों को भी मिलना चाहिए।

खेती की लागत बढ़ने से किसान परेशान

गन्ने की खेती में किसानों को लंबे समय तक खेत की देखभाल करनी पड़ती है। सिंचाई, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और कटाई जैसे खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में किसानों के लिए मौजूदा भाव पर गन्ने की खेती करना मुश्किल होता जा रहा है। किसानों का कहना है कि Maharashtra Mein Ganne Ka Bhav बढ़ाए बिना गन्ना उत्पादकों की आय में बड़ा सुधार संभव नहीं है।

उनका कहना है कि सरकार और चीनी मिलों को किसानों की उत्पादन लागत को ध्यान में रखते हुए भाव तय करना चाहिए। किसान नेताओं का यह भी कहना है कि गन्ने की कीमत में बढ़ोतरी का लाभ केवल किसानों को ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा। किसानों की आय बढ़ने से गांवों में खरीदारी और रोजगार से जुड़ी गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

कम बारिश से गन्ने के उत्पादन पर असर की आशंका

महाराष्ट्र के सोलापुर और मराठवाड़ा क्षेत्र देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक इलाकों में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं। यहां की कई चीनी मिलों में गन्ने की रिकवरी भी अच्छी मानी जाती है। किसानों के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में गन्ने से 8 से 11.5 प्रतिशत तक चीनी रिकवरी मिलती है।

हालांकि इस साल राज्य के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की बात कही जा रही है। इससे आने वाले समय में गन्ने के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। कम बारिश का असर सिंचाई और फसल की वृद्धि पर भी पड़ सकता है। ऐसे समय में किसान चाहते हैं कि Maharashtra Mein Ganne Ka Bhav ऐसा तय किया जाए, जिससे उत्पादन लागत और जोखिम की भरपाई हो सके।

15 दिन पहले शुरू हो सकती है गन्ने की पेराई

महाराष्ट्र में इस बार गन्ने का पेराई सत्र सामान्य समय से करीब 15 दिन पहले शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। किसानों के मुताबिक, चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बाजार में नई चीनी जल्दी पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है। अगर पेराई सत्र पहले शुरू होता है तो गन्ने की कटाई और परिवहन की गतिविधियां भी जल्दी शुरू हो सकती हैं। किसानों का कहना है कि पेराई सत्र शुरू होने से पहले ही Maharashtra Mein Ganne Ka Bhav स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि किसानों को अपने उत्पादन की कीमत को लेकर अनिश्चितता न रहे।

2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन

गन्ने के भाव को लेकर किसान संगठन अब महाराष्ट्र से दिल्ली तक आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। किसान नेताओं के मुताबिक, 2 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। इस प्रदर्शन में करीब 5000 किसानों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। किसान संगठन सरकार के सामने गन्ने का उचित भाव, बकाया भुगतान और चीनी उद्योग से होने वाली कमाई में किसानों की हिस्सेदारी जैसे मुद्दे उठाएंगे।

किसान नेताओं का कहना है कि लंबे समय से Maharashtra Mein Ganne Ka Bhav किसानों की प्रमुख चिंताओं में शामिल है। उनका आरोप है कि उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद किसानों को पर्याप्त कीमत नहीं मिल रही है।

8 से 10 किसान संगठन आंदोलन में हो सकते हैं शामिल

किसान नेता नामदेव पवार के मुताबिक, आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए करीब 8 से 10 किसान संगठनों के बीच सहमति बनाने का प्रयास किया जा रहा है। संगठन गांव-गांव जाकर किसानों को आंदोलन से जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। किसान संगठनों की कोशिश है कि नई पेराई शुरू होने से पहले किसानों का पुराना बकाया भुगतान किया जाए। साथ ही आगामी सीजन के लिए गन्ने का बेहतर भाव निर्धारित किया जाए। किसानों का कहना है कि Maharashtra Mein Ganne Ka Bhav केवल एक कीमत का मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे हजारों गन्ना उत्पादक परिवारों की आर्थिक स्थिति जुड़ी हुई है।

सदाभाऊ खोत ने भी किया 7000 रुपये का समर्थन

विधान परिषद सदस्य और किसान नेता सदाभाऊ खोत ने भी गन्ने के भाव को लेकर किसानों की मांग का समर्थन किया है। सोलापुर जिले के कुरुल में आयोजित गन्ना एवं इथेनॉल परिषद में उन्होंने 7000 रुपये प्रति टन का भाव देने की मांग उठाई। खोत ने कहा कि जब तक किसानों को गन्ने का उचित मूल्य नहीं मिलेगा, तब तक गन्ने की कटाई को लेकर किसानों का आंदोलन जारी रह सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से चीनी की कीमतों को लेकर ठोस नीति बनाने की मांग भी की।

खोत का कहना है कि Maharashtra Mein Ganne Ka Bhav तय करते समय चीनी और इथेनॉल उद्योग से होने वाली कमाई को भी ध्यान में रखना जरूरी है। उनका मानना है कि किसानों को भी इस पूरी मूल्य श्रृंखला का उचित लाभ मिलना चाहिए।

चीनी मिलों पर लगाए वजन और रिकवरी में गड़बड़ी के आरोप

सदाभाऊ खोत ने चीनी मिलों पर गन्ने के वजन में कटौती और रिकवरी के आंकड़ों में कथित हेराफेरी के आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की है। किसान नेताओं का कहना है कि किसानों को उनके गन्ने की वास्तविक मात्रा और रिकवरी के आधार पर पारदर्शी भुगतान मिलना चाहिए। इससे Maharashtra Mein Ganne Ka Bhav को लेकर किसानों के बीच बनी असमंजस की स्थिति भी कम हो सकती है। खोत ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो सोलापुर जिले के करीब 4000 किसानों को साथ लेकर बड़ा आंदोलन किया जा सकता है।

किसानों को 7000 रुपये भाव मिलने की उम्मीद

किसान संगठनों का कहना है कि चीनी और इथेनॉल कारोबार में होने वाली कमाई का उचित हिस्सा किसानों तक पहुंचना चाहिए। उनका दावा है कि पिछले वर्षों में उत्पादन लागत में काफी वृद्धि हुई है, इसलिए मौजूदा गन्ना भाव किसानों के लिए पर्याप्त नहीं है। किसानों की मांग है कि सरकार और चीनी मिलें मिलकर ऐसा मूल्य तय करें जिससे खेती की लागत निकलने के साथ किसानों को उचित मुनाफा भी मिल सके। इसी वजह से Maharashtra Mein Ganne Ka Bhav को 7000 रुपये प्रति टन करने की मांग लगातार जोर पकड़ रही है।

सरकार और चीनी मिलों पर बढ़ेगा दबाव

अगर 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में किसान पहुंचते हैं, तो गन्ने के भाव का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ सकता है। महाराष्ट्र में गन्ना किसानों की संख्या काफी अधिक है और चीनी उद्योग राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और चीनी मिलों की ओर से किसानों की मांग पर क्या फैसला लिया जाता है, यह महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल किसान संगठन Maharashtra Mein Ganne Ka Bhav को 7000 रुपये प्रति टन करने की मांग पर अड़े हुए हैं और अपनी मांग के समर्थन में आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब तक गन्ने की उत्पादन लागत, चीनी से होने वाली कमाई और इथेनॉल उद्योग से मिलने वाले लाभ को ध्यान में रखते हुए उचित मूल्य तय नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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