महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में Marathwada Mein Barish Ki Kami Se Sukhe Jaise Halat बन गए हैं। मॉनसून की लंबी बेरुखी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। अगस्त महीने में बारिश की भारी कमी और सितंबर के पहले सप्ताह तक पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण सोयाबीन, कपास और अन्य खरीफ फसलों पर संकट गहरा गया है।
बीड जिले में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। लंबे समय तक बारिश नहीं होने से कई खेतों में फसलें सूखने लगी हैं। कई किसान खराब हो चुकी फसलों को खेत से निकालकर पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। Marathwada Mein Barish Ki Kami Se Sukhe Jaise Halat के बीच किसान सरकार से तत्काल राहत की मांग कर रहे हैं।
मराठवाड़ा में सूखे जैसे हालात क्यों बने?
Marathwada Mein Barish Ki Kami Se Sukhe Jaise Halat बनने की सबसे बड़ी वजह मॉनसून की कमजोर बारिश और लंबे समय तक बारिश का अंतराल है। सितंबर के पहले सप्ताह तक मराठवाड़ा में सामान्य से 34 फीसदी से अधिक कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं बीड जिले में बारिश की कमी करीब 49 फीसदी तक पहुंच गई है। बारिश नहीं होने से खेतों की मिट्टी में नमी लगातार कम हो रही है। इसका सीधा असर फसलों की बढ़वार और उत्पादन पर पड़ रहा है। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा नहीं है, उनकी स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है।
बीड में फसलों पर बढ़ा संकट
बीड जिले में इस साल करीब 7 लाख 43 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई की गई थी। इनमें सोयाबीन, कपास, मक्का, अरहर और मूंग प्रमुख फसलें हैं। लगातार बारिश नहीं होने के कारण करीब 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन और कपास की फसल गंभीर संकट में बताई जा रही है। Marathwada Mein Barish Ki Kami Se Sukhe Jaise Halat का सीधा असर किसानों की मेहनत और उनकी आय पर दिखाई दे रहा है। Marathwada Mein Barish Ki Kami Se Sukhe Jaise Halat
सोयाबीन और कपास की फसल सूखने लगी
मराठवाड़ा के बीड, हिंगोली, जालना और परभणी जिलों में बारिश की कमी का असर साफ दिखाई दे रहा है। कई जगह पौधों की बढ़वार रुक गई है और खेतों में फसलें सूखने लगी हैं। किसानों का कहना है कि उन्होंने बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि कार्यों पर बड़ी रकम खर्च की है। अब उत्पादन की उम्मीद कम होती जा रही है। Marathwada Mein Barish Ki Kami Se Sukhe Jaise Halat के कारण किसानों के सामने खेती की लागत निकालना भी चुनौती बन गया है।
जलाशयों में तेजी से घट रहा पानी
बारिश की कमी का असर जलाशयों पर भी दिखाई दे रहा है। मराठवाड़ा के प्रमुख बांधों और जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से घट रहा है। सीना-कोलेगांव बांध का उपयोगी जल भंडार शून्य प्रतिशत तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। माजलगांव बांध में करीब 26 फीसदी और मांजरा बांध में लगभग 12 फीसदी पानी बचा है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने जायकवाड़ी बांध को छोड़कर अन्य प्रमुख जल स्रोतों से सिंचाई के लिए पानी देने पर रोक लगा दी है। उपलब्ध पानी को पेयजल जरूरतों के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है। Marathwada Mein Barish Ki Kami Se Sukhe Jaise Halat अब खेती के साथ-साथ पानी की समस्या को भी गंभीर बना रहे हैं।
450 से ज्यादा गांवों में टैंकर से पानी
मराठवाड़ा में पेयजल संकट भी गहराता जा रहा है। क्षेत्र के 450 से अधिक गांवों में टैंकरों के जरिए लोगों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में 88 से ज्यादा टैंकर प्रभावित गांवों में पानी पहुंचा रहे हैं। किसानों को डर है कि अगर जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसलों के साथ पशुओं के चारे और ग्रामीण इलाकों में पेयजल की समस्या भी बढ़ सकती है। Marathwada Mein Barish Ki Kami Se Sukhe Jaise Halat ने ग्रामीण जीवन को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। Marathwada Mein Barish Ki Kami Se Sukhe Jaise Halat
किसान संगठनों ने सूखा घोषित करने की मांग की
किसान संगठनों ने महाराष्ट्र सरकार से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सूखा घोषित करने की मांग की है। किसान सभा के बीड जिला अध्यक्ष अजय बुरांडे के अनुसार बारिश की कमी, फसल नुकसान और जल स्रोतों में घटता पानी स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। किसानों की मांग है कि सरकार प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वे कराए और राहत पैकेज जारी करे। Marathwada Mein Barish Ki Kami Se Sukhe Jaise Halat को देखते हुए केंद्र सरकार को भी रिपोर्ट भेजकर राहत प्रक्रिया शुरू करने की मांग की जा रही है।
पिछले साल बाढ़, इस साल सूखे की मार
बीड के एक किसान ने बताया कि पिछले साल बाढ़ के कारण उनकी करीब 70 फीसदी जमीन प्रभावित हुई थी। इलाके की दो झीलें टूटने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। इस साल किसान ने करीब डेढ़ लाख रुपये उधार लेकर खेती की, लेकिन लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण फसल बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है। किसान का कहना है कि पिछले साल का फसल बीमा और पर्याप्त मुआवजा भी नहीं मिला।
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महिला किसान फसल उखाड़कर पशुओं को खिला रहीं
बीड की महिला किसान संगीता उबाले ने बताया कि उन्होंने पांच एकड़ में सोयाबीन की खेती की थी। खेती पर करीब दो लाख रुपये खर्च हुए, लेकिन बारिश नहीं होने से पूरी फसल सूखने लगी। उन्होंने बताया कि अब फसल को खेत से निकालकर पशुओं को खिलाना पड़ रहा है। परिवार पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है और बच्चों की पढ़ाई व बेटी की शादी जैसी जिम्मेदारियां भी सामने हैं। Marathwada Mein Barish Ki Kami Se Sukhe Jaise Halat में किसानों को आर्थिक मदद की सबसे ज्यादा जरूरत है।
13 और 14 सितंबर को बारिश की उम्मीद
मौसम विभाग के अनुमान से किसानों को कुछ राहत की उम्मीद जगी है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे कम दबाव वाले क्षेत्र के प्रभाव से 13 और 14 सितंबर को मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है। अगर अच्छी बारिश होती है तो कुछ फसलों को आंशिक राहत मिल सकती है। हालांकि, लंबे समय से नमी की कमी झेल रही फसलों को केवल एक-दो दिन की बारिश से पूरी तरह बचाना मुश्किल हो सकता है।
किसानों के सामने दोहरी चुनौती
Marathwada Mein Barish Ki Kami Se Sukhe Jaise Halat ने किसानों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ खेतों में सोयाबीन और कपास की फसलें सूख रही हैं, वहीं दूसरी तरफ जलाशयों में पानी का स्तर लगातार घट रहा है। किसान संगठनों का कहना है कि सरकार को स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल्द सूखा घोषित करना चाहिए। प्रभावित किसानों का सर्वे कराकर राहत और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करना भी जरूरी है। मौजूदा हालात में Marathwada Mein Barish Ki Kami Se Sukhe Jaise Halat से प्रभावित किसानों को जल्द सरकारी सहायता मिलने की उम्मीद है।

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