Noida Farmers के लिए लंबे समय से लंबित कई मांगों पर बड़ी राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। नोएडा प्राधिकरण और भारतीय किसान परिषद के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठक में 5 प्रतिशत विकसित भूखंड, भूमि अधिग्रहण मुआवजे में बढ़ोतरी, मूल काश्तकारों की परिभाषा का विस्तार और लंबित मामलों के समयबद्ध समाधान जैसे अहम मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई। प्राधिकरण ने किसानों की समस्याओं का जल्द निस्तारण करने का भरोसा दिया है, जिससे Noida Farmers के बीच नई उम्मीद जगी है।
Noida Farmers की समस्याओं के समाधान के लिए हुई अहम बैठक
भारतीय किसान परिषद के गौतम बुद्धनगर जिला अध्यक्ष रविराज सिंह चौहान ने जानकारी दी कि नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) कृष्णा करुणेश की अध्यक्षता में किसानों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत बैठक आयोजित की गई। बैठक में भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, आबादी निस्तारण, विकसित भूखंड आवंटन और अन्य लंबित मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई।
किसान परिषद की ओर से किसानों की विभिन्न समस्याओं को विस्तार से रखा गया, जिन पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख अपनाया। बैठक के दौरान सीईओ ने आश्वासन दिया कि किसानों की सामान्य समस्याओं का समाधान अगले छह महीने के भीतर करने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि किसान संगठन ने स्पष्ट किया कि समाधान की प्रगति की समीक्षा के लिए जल्द ही एक और बैठक आयोजित की जाएगी।
Noida Farmers को एक महीने के भीतर मिल सकता है भूखंड आवंटन पत्र
बैठक में विकसित भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया को तेज करने पर भी सहमति बनी। नोएडा प्राधिकरण ने बताया कि सभी वर्क सर्किलों से रिपोर्ट मंगाई जा रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद पात्र किसानों को एक महीने के भीतर आवंटन पत्र जारी करने का प्रयास किया जाएगा।
इसके अलावा भूलेख विभाग में लंबित मामलों को भी एक महीने के भीतर नियोजन विभाग को भेजने का निर्णय लिया गया है ताकि फाइलों का निस्तारण तेजी से हो सके। इस फैसले से Noida Farmers को लंबे समय से लंबित मामलों में राहत मिलने की उम्मीद है।
वेंडिंग जोन में भी मिलेगा Noida Farmers को लाभ
बैठक के दौरान वेंडिंग जोन में मूल काश्तकारों को आरक्षण देने का प्रस्ताव भी सामने आया। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो स्थानीय किसानों और उनके परिवारों को रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं। इससे खेती के साथ-साथ वैकल्पिक आय के साधन भी विकसित होंगे और Noida Farmers की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की संभावना है।
Noida Farmers के लिए मुआवजे में बढ़ोतरी का प्रस्ताव
भूमि अधिग्रहण मुआवजे को लेकर भी बैठक में बड़ा फैसला लिया गया। प्रस्ताव के अनुसार मुआवजे की दर में 10 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर तक बढ़ोतरी करने पर सहमति बनी है। इसके अलावा अतिरिक्त 5 प्रतिशत औसत धनराशि को भी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।
पहले यह राशि लगभग 22 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर थी, जिसे बढ़ाकर 45 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर करने की तैयारी की जा रही है। यदि यह प्रस्ताव बोर्ड से मंजूर होता है तो बड़ी संख्या में Noida Farmers को आर्थिक रूप से सीधा लाभ मिलेगा।
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100 प्रतिशत मुआवजा लेने वाले Noida Farmers को भी मिल सकती है राहत
बैठक में उन किसानों के लिए भी राहत का प्रस्ताव रखा गया जिन्होंने पहले ही 100 प्रतिशत मुआवजा प्राप्त कर लिया है। प्रस्ताव के अनुसार यदि ऐसे किसान अपने प्राप्त मुआवजे का 10 प्रतिशत वापस जमा करते हैं तो उन्हें 5 प्रतिशत विकसित भूखंड देने का प्रस्ताव अगली बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत हो जाता है तो वर्षों से विकसित भूखंड की मांग कर रहे Noida Farmers को बड़ा फायदा मिल सकता है।
मूल काश्तकारों की परिभाषा का होगा विस्तार
बैठक में मूल काश्तकारों की परिभाषा को भी विस्तारित करने पर सहमति बनी। प्रस्ताव के अनुसार गौतम बुद्ध नगर के निवासियों को भी मूल काश्तकार मानते हुए 5 प्रतिशत विकसित भूखंड आवंटित करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।इस फैसले से बड़ी संख्या में Noida Farmers को सरकारी योजनाओं और विकसित भूखंड का लाभ मिलने की संभावना बढ़ गई है।
भारतीय किसान परिषद ने क्या कहा?
भारतीय किसान परिषद का कहना है कि किसानों के अधिकारों की लड़ाई लगातार जारी रहेगी। संगठन के अनुसार वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और प्राधिकरण की ओर से मिले सकारात्मक संकेत किसानों के हित में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।परिषद ने यह भी कहा कि प्रस्तावों को जल्द लागू कराने और किसानों को वास्तविक लाभ दिलाने के लिए आगामी बैठकों में भी लगातार फॉलो-अप किया जाएगा।
Noida Farmers के लिए क्या बदल सकता है?
यदि बैठक में लिए गए प्रस्तावों को बोर्ड की मंजूरी मिल जाती है तो Noida Farmers को 5 प्रतिशत विकसित भूखंड, बढ़ा हुआ भूमि अधिग्रहण मुआवजा, लंबित मामलों का तेज निस्तारण, वेंडिंग जोन में प्राथमिकता और मूल काश्तकार की विस्तारित परिभाषा जैसे कई बड़े लाभ मिल सकते हैं। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ वर्षों से लंबित मांगों के समाधान का रास्ता भी साफ हो सकता है।
