हर वर्ष सितंबर से दिसंबर के बीच Onion Price में तेज बढ़ोतरी देखने को मिलती है। इस दौरान बाजार में प्याज की आपूर्ति कम होने से खुदरा कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं। कई बार उपभोक्ताओं को 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक प्याज खरीदना पड़ता है। लेकिन इस बार स्थिति अलग दिखाई दे रही है। खरीफ प्याज का area बढ़ने और उत्पादन अच्छा रहने की संभावना के कारण बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनी रह सकती है। इससे Onion Price में बड़ी बढ़ोतरी होने के आसार कम माने जा रहे हैं।
मॉनसून की धीमी चाल ने बदला खेती का रुख
इस वर्ष कई राज्यों में मॉनसून सामान्य से धीमा रहा और बारिश भी अपेक्षाकृत कम हुई। इसका प्रभाव सबसे ज्यादा उन इलाकों में पड़ा जहां गन्ना और केले जैसी ज्यादा पानी वाली फसलें उगाई जाती हैं। पानी की कमी को देखते हुए किसानों ने इन फसलों की जगह खरीफ प्याज की खेती को प्राथमिकता दी। यही वजह है कि इस बार प्याज का रकबा बढ़ा है और आने वाले महीनों में Onion Price स्थिर रहने की संभावना मजबूत हुई है।
महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में बढ़ी खरीफ प्याज की खेती
महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा खरीफ प्याज उत्पादक राज्य है। इसके अलावा गुजरात, कर्नाटक और राजस्थान में भी बड़े पैमाने पर प्याज की खेती होती है। इस बार इन राज्यों में किसानों ने अधिक क्षेत्र में प्याज की रोपाई की है। यदि मौसम अनुकूल रहा तो उत्पादन बढ़ेगा और बाजार में सप्लाई मजबूत होगी। इससे Onion Price पर दबाव कम रहेगा और उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।
भारत में तीन सीजन में होती है प्याज की खेती
भारत में प्याज की खेती रबी, खरीफ और लेट खरीफ सीजन में की जाती है। कुल उत्पादन का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा रबी सीजन से मिलता है, जबकि करीब 40% उत्पादन खरीफ और लेट खरीफ सीजन से आता है। रबी प्याज की कटाई अप्रैल और मई में होती है, जबकि खरीफ प्याज अक्टूबर और नवंबर में बाजार में पहुंचता है। यही फसल सितंबर से दिसंबर के दौरान Onion Price को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती है।
सितंबर से दिसंबर में क्यों बढ़ते हैं प्याज के भाव?
हर वर्ष अक्टूबर से दिसंबर के बीच रबी प्याज का स्टॉक धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसी समय नई खरीफ फसल पूरी तरह बाजार में नहीं पहुंचती, जिससे सप्लाई घट जाती है। सप्लाई कम होने पर Onion Price तेजी से बढ़ता है। इस बार खरीफ उत्पादन ज्यादा रहने की संभावना के कारण बाजार में प्याज की उपलब्धता बेहतर रह सकती है।
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बेहतर भंडारण व्यवस्था से भी मिलेगा फायदा
महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्याज भंडारण की व्यवस्था में सुधार हुआ है। पहले किसान उपज खराब होने के डर से कम कीमत पर प्याज बेच देते थे, लेकिन अब बेहतर स्टोरेज सुविधाओं के कारण किसान आवश्यकता के अनुसार अपनी उपज बाजार में ला रहे हैं। इससे पूरे सीजन में सप्लाई बनी रहती है और Onion Price में अचानक उछाल आने की संभावना कम हो जाती है।
किसानों को मिल रहे हैं अच्छे भाव
फिलहाल कई मंडियों में किसानों को लगभग 27 से 28 रुपये प्रति किलो तक प्याज का भाव मिल रहा है। बेहतर कीमत मिलने के कारण किसान अपनी उपज को जल्दबाजी में बेचने के बजाय सुरक्षित भंडारण कर रहे हैं। यदि आने वाले महीनों में मांग बनी रहती है तो किसानों को भी अच्छा फायदा मिल सकता है और Onion Price संतुलित रहने की संभावना बनी रहेगी।
उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत
यदि खरीफ प्याज का उत्पादन अनुमान के अनुसार रहता है तो आने वाले महीनों में बाजार में प्याज की कमी नहीं होगी। पर्याप्त सप्लाई रहने से उपभोक्ताओं को महंगा प्याज खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। त्योहारों के सीजन में भी Onion Price सामान्य स्तर पर रहने की उम्मीद की जा रही है।
आने वाले महीनों में क्या रहेगा बाजार का अनुमान?
कृषि क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि मौसम सामान्य बना रहता है और किसी प्राकृतिक आपदा से फसल प्रभावित नहीं होती, तो सितंबर से दिसंबर के दौरान Onion Price में पिछले वर्षों जैसी भारी तेजी देखने को नहीं मिलेगी। बढ़ा हुआ उत्पादन, बेहतर भंडारण और मजबूत सप्लाई बाजार को संतुलित बनाए रखने में सहायता करेंगे। हालांकि अंतिम कीमतें मौसम, मांग, परिवहन और मंडियों में आवक पर निर्भर करेंगी।
