Pakhne se phale kyu fat jate hai kele: फल फटने से केवल दिखावट ही खराब नहीं होती, बल्कि उसकी गुणवत्त भी घट जाती है. इसलिए फल जल्दी ख़राब होने लगते हैं और व्यापारी कम कीमत देते हैं. इसलिए इस समस्या को समझना और समय रहते उपाय करना बहुत जरूरी है.
Pakhne se phale kyu fat jate hai kele
केले की खेती भारत में लाखों किसानों की रोजी-रोटी है. यह एक नकदी फसल है, जो सही देखभाल के साथ अच्छा मुनाफा देती है. लेकिन कई बार ऐसा होता है की जब फसल कटाई के करीब होती है, तब अचानक फल फटने लगते हैं. और ये पल किसान के लिए सबसे निराशाजनक होता है. किसान के पूरे साल की मेहनत के बाद अगर फल ही खराब हो जाएं, तो बाजार में सही दाम मिलना मुश्किल हो जाता है. इस समस्या को ही “फ्रूट क्रैकिंग” कहा जाता है.

आखिर फल फटते क्यों हैं?
केले के फटने की सबसे बड़ा कारण है पानी का असंतुलन. जब पौधे को लंबे समय तक कम पानी मिलता है और फिर अचानक ज्यादा पानी मिल जाता है चाहे वह बारिश से हो या सिंचाई से तो फल के अंदर का हिस्सा तेजी से बढ़ता है. लेकिन छिलकाजल्दी फैल नहीं पाता और बाहर के इस दबाव के फर्क से छिलके पर दरार पड़ जाती है.और फल फट जाता हैं जिससे किसान को ज्यादा भाव भी नहीं मिल पता हैं.Pakhne se phale kyu fat jate hai kele
फल क फटने का कारन पोषक तत्वों की कमी भी होता है. अगर मिट्टी में पोटैशियम, कैल्शियम या बोरॉन कम हो, तो फल का छिलका मजबूत नहीं बन पाता. ऐसे में पकते समय हल्का सा दबाव भी दरार पैदा कर देता है. कई बार तेज गर्मी, फिर अचानक ठंडा मौसम या तेज हवा भी फल को नुकसान पहुंचा देती है.मौसम परिवर्तन से भी फल पर थोडा बहुत असर पड़ता हैं.
सही पोषण से मजबूत बनता है फल
केले की फसल में संतुलित खाद देना बहुत जरूरी होता है. पोटैशियम फल को मजबूत और चमकदार बनाता है. कैल्शियम छिलके की मजबूती बढ़ाता है, जिससे वह दबाव सह सके. इसलिए मिट्टी की जांच करवाकर ही खाद का छिडकाव करना चाहिए.जो फल को अच्छी ग्रोथ दे सके | Pakhne se phale kyu fat jate hai kele
जैविक खाद जैसे गोबर की सड़ी खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी को उपजाऊ बनाती है. इससे जड़ें का विकास अच्छा होता हैं और पौधा पानी को संतुलित तरीके से लेता है. स्वस्थ पौधा ही स्वस्थ फल देता है.
रोगों से बचाव भी जरूरी
कई बार ऐसा होता हैं की फलों में फंगल रोग लग जाते हैं, जिससे छिलका कमजोर हो जाता है. ऐसे में फल जल्दी फटने लगता है. और खेत में नमी ज्यादा रहने पर यह समस्या बढ़ जाती है. इसलिए खेत में पानी जमा न होने दें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह से फफूंदनाशक का उपयोग करें.
फसल की नियमित निगरानी करना बहुत जरूरी है. अगर समय रहते बीमारी पकड़ में आ जाए, तो बड़ा नुकसान टाला जा सकता है.Pakhne se phale kyu fat jate hai kele
सिंचाई का संतुलन ही असली कुंजी
केले की फसल के लिए नियमित और बराबर पानी जरूरी है. ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने से मिट्टी में नमी का स्तर स्थिर रहता है. इससे अचानक पानी की अधिकता नहीं होती और फल सुरक्षित रहते हैं.जिससे फल अच्छा बनता हैं .Pakhne se phale kyu fat jate hai kele
फल के गुच्छों को सहारा देना भी जरूरी है, ताकि उनका वजन तने पर ज्यादा दबाव न डाले. कुछ किसान धूप से बचाने के लिए गुच्छों को पत्तों से ढक देते हैं, जिससे छिलका सुरक्षित रहता है.

सजग किसान ही बचा सकता है फसल
केले का फल फटना कोई लाइलाज समस्या नहीं है.बल्कि अगर किसान पानी, खाद और रोग प्रबंधन पर ध्यान दें, तो इस नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है. खेती में छोटी-छोटी सावधानियां ही बड़े नुकसान से बचाती हैं. सही देखभाल से न केवल उपज अच्छी होगी, बल्कि बाजार में बेहतर कीमत भी मिलेगी Pakhne se phale kyu fat jate hai kele
