Parali Burning 2026 : हर वर्ष धान की कटाई के बाद पराली जलाने की समस्या देश के कई राज्यों में गंभीर रूप ले लेती है। इससे वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। इस चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। सरकार का लक्ष्य किसानों को आधुनिक मशीनों, आर्थिक सहायता और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से पराली जलाने से रोकना तथा उसके बेहतर उपयोग को बढ़ावा देना है।
पराली प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार की बड़ी तैयारी Parali Burning 2026
नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री Bhupender Yadav की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पराली प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और किसानों के लिए वैकल्पिक समाधान पर विस्तृत चर्चा की गई। सरकार का उद्देश्य केवल पराली जलाने की घटनाओं को रोकना नहीं है, बल्कि किसानों को ऐसे विकल्प उपलब्ध कराना है जिससे वे पराली को आय के स्रोत के रूप में उपयोग कर सकें।
2026-27 के लिए 544 करोड़ रुपये का बजट मंजूर
केंद्र सरकार ने पराली प्रबंधन योजना के तहत वर्ष 2026-27 के लिए 544.15 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इसमें से 272.07 करोड़ रुपये की पहली किस्त राज्यों को जारी भी की जा चुकी है। इस राशि का उपयोग किसानों को आधुनिक कृषि मशीनें उपलब्ध कराने, कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने और पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास में किया जाएगा।
किसानों को मिलेंगी 46 हजार से ज्यादा पराली प्रबंधन मशीनें
राज्यों ने इस वर्ष किसानों तक 46,000 से अधिक पराली प्रबंधन मशीनें पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा 910 नए कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जहां किसान कम लागत पर मशीनें किराये पर ले सकेंगे। साथ ही 141 नई पराली उपयोग परियोजनाएं भी शुरू की जाएंगी। इन परियोजनाओं का उद्देश्य पराली को जलाने के बजाय उसका उपयोग जैव ऊर्जा, खाद और अन्य औद्योगिक कार्यों में करना है। Parali Burning 2026
2026 में निकल सकती है 2.76 करोड़ टन पराली
कृषि मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2026 में धान की कटाई के दौरान लगभग 2.76 करोड़ टन पराली उत्पन्न हो सकती है। इतनी बड़ी मात्रा में पराली का सुरक्षित और वैज्ञानिक प्रबंधन करना सरकार और राज्यों के लिए एक बड़ी चुनौती है। इसी कारण केंद्र सरकार राज्यों की कार्य योजनाओं की लगातार समीक्षा कर रही है ताकि कटाई के मौसम से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी की जा सकें। Parali Burning 2026
अब तक 4,266 करोड़ रुपये की दी जा चुकी है सहायता
सरकार ने बताया कि वर्ष 2018-19 से अब तक पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा Indian Council of Agricultural Research को पराली प्रबंधन के लिए 4,266 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की जा चुकी है। इस सहायता के माध्यम से किसानों तक 3.54 लाख से ज्यादा पराली प्रबंधन मशीनें पहुंचाई गई हैं, जिससे कई क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। Parali Burning 2026
NCR में तैनात होगा ‘पराली सुरक्षा बल’
पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी निगरानी रखने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के 14 जिलों की लगभग 70 तहसीलों में विशेष ‘पराली सुरक्षा बल’ तैनात किया जाएगा। इस विशेष दल का कार्य पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी करना, किसानों को जागरूक करना तथा वैकल्पिक प्रबंधन तकनीकों को बढ़ावा देना होगा। सरकार का मानना है कि इस पहल से दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर को कम करने में मदद मिलेगी। Parali Burning 2026
पराली से कमाई के नए अवसर
सरकार किसानों को यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि पराली केवल कृषि अवशेष नहीं, बल्कि अतिरिक्त आय का स्रोत भी बन सकती है। किसान पराली को बायोगैस प्लांट, एथेनॉल प्लांट, पेलेट और ब्रिकेट निर्माण इकाइयों तथा थर्मल पावर प्लांटों को बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। इससे न केवल उनकी कमाई बढ़ेगी बल्कि प्रदूषण की समस्या भी कम होगी। Parali Burning 2026
ये भी देखें : मॉनसून की सुस्ती से दलहन फसलों पर असर, कम बारिश के चलते 43% कम हुई बुवाई
पराली जलाने से मिट्टी को होता है नुकसान
विशेषज्ञों के अनुसार पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद आवश्यक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही मिट्टी में रहने वाले लाभकारी सूक्ष्म जीव भी समाप्त हो जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है। वहीं जिन खेतों में पराली को मिट्टी में मिलाया गया, वहां मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार और फसल उत्पादन में वृद्धि देखने को मिली है। Parali Burning 2026
टिकाऊ खेती की दिशा में सरकार के प्रयास
केंद्र सरकार कम अवधि में तैयार होने वाली और कम पानी की आवश्यकता वाली धान की किस्मों को बढ़ावा दे रही है। साथ ही डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) जैसी आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इन तकनीकों से धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच ज्यादा समय मिलेगा, जिससे किसानों को पराली जलाने की आवश्यकता कम होगी और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलेगा। Parali Burning 2026
निष्कर्ष
पराली जलाने की समस्या को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है। 544 करोड़ रुपये के बजट, 46 हजार से अधिक मशीनों की उपलब्धता, एनसीआर में ‘पराली सुरक्षा बल’ की तैनाती और किसानों को वैकल्पिक आय के अवसर प्रदान करने जैसे कदम इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। यदि किसान पराली को संसाधन के रूप में अपनाते हैं तो इससे प्रदूषण कम होगा, मिट्टी की सेहत सुधरेगी और कृषि आय में भी बढ़ोतरी होगी। Parali Burning 2026
