Phal-Sabjiyon Mein Keetnashak Avshesh Ki Jaanch फल और सब्जियां हमारी रोजाना की डाइट का अहम हिस्सा हैं। इनमें कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, लेकिन इनके उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों को लेकर उपभोक्ताओं के मन में कई सवाल रहते हैं। सरकार ने लोकसभा में बताया कि 2023-24 से 2025-26 के बीच 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से फल और सब्जियों के 70,652 सैंपल जांचे गए। इनमें 2,223 सैंपल यानी करीब 3.1 फीसदी में कीटनाशक अवशेष FSSAI की तय MRL सीमा से ज्यादा मिले।ऐसे में Phal-Sabjiyon Mein Keetnashak Avshesh Ki Jaanch को समझना किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए जरूरी हो जाता है।
70 हजार से ज्यादा सैंपल की हुई जांच
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में बताया कि 2023-24 से 2025-26 के दौरान 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 70,652 फल और सब्जियों के सैंपल लिए गए। इन सैंपल की जांच Monitoring of Pesticide Residues at National Level यानी MPRNL परियोजना के तहत की गई। जांच में 2,223 सैंपल ऐसे पाए गए जिनमें कीटनाशक अवशेष FSSAI की तय Maximum Residue Limit यानी MRL से अधिक थे। Phal-Sabjiyon Mein Keetnashak Avshesh Ki Jaanch
इस आंकड़े को आसान भाषा में समझें तो जांच किए गए हर 100 सैंपल में करीब 3 सैंपल ऐसे थे जिनमें अवशेष निर्धारित सीमा से ऊपर पाए गए। Phal-Sabjiyon Mein Keetnashak Avshesh Ki Jaanch से मिलने वाले आंकड़े खाद्य सुरक्षा की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Phal-Sabjiyon Mein Keetnashak Avshesh Ki Jaanch कैसे होती है?
Phal-Sabjiyon Mein Keetnashak Avshesh Ki Jaanch फल और सब्जियों के सैंपल अलग-अलग स्थानों से एकत्र किए जाते हैं। इनमें बाजार, उत्पादन क्षेत्र और जरूरत के अनुसार खेत यानी farm-gate शामिल हो सकते हैं। सैंपल लेने के बाद उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रयोगशाला में भेजा जाता है। प्रयोगशाला में वैज्ञानिक जांच के जरिए यह पता लगाया जाता है कि सैंपल में किसी कीटनाशक का अवशेष मौजूद है या नहीं।
अगर अवशेष मिलता है तो उसकी मात्रा का आकलन किया जाता है। इसके बाद उसकी तुलना निर्धारित MRL से की जाती है। इसी प्रक्रिया के जरिए Phal-Sabjiyon Mein Keetnashak Avshesh Ki Jaanch की जाती है और यह पता लगाया जाता है कि संबंधित सैंपल खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप है या नहीं।
MRL क्या होता है?
MRL का पूरा नाम Maximum Residue Limit है। इसका मतलब किसी खाद्य पदार्थ में मौजूद कीटनाशक अवशेष की अधिकतम निर्धारित सीमा है।फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए किसान कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं। इनके इस्तेमाल के बाद फसल पर बहुत कम मात्रा में रासायनिक अवशेष रह सकते हैं। वैज्ञानिक मूल्यांकन के आधार पर अलग-अलग कीटनाशकों के लिए अधिकतम अवशेष सीमा निर्धारित की जाती है।
अगर किसी फल या सब्जी में अवशेष तय MRL के अंदर है तो वह निर्धारित मानकों के अनुसार स्वीकार्य हो सकता है। वहीं MRL से ज्यादा अवशेष मिलने पर सैंपल तय खाद्य सुरक्षा मानक पर खरा नहीं उतरता। इसलिए Phal-Sabjiyon Mein Keetnashak Avshesh Ki Jaanch में MRL की तुलना सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है।
3.1 फीसदी आंकड़े का क्या मतलब है?
70,652 सैंपल में से 2,223 सैंपल में MRL से ज्यादा कीटनाशक अवशेष पाए गए। वहीं करीब 68,429 सैंपल ऐसे थे जिनमें अवशेष MRL से ज्यादा नहीं मिले।इसलिए 3.1 फीसदी के आंकड़े का यह मतलब नहीं है कि बाजार में बिकने वाली 3.1 फीसदी फल-सब्जियां जहरीली हैं। यह केवल जांच किए गए सैंपल में MRL से अधिक अवशेष मिलने का आंकड़ा है। उपभोक्ताओं के लिए इस अंतर को समझना जरूरी है। Phal-Sabjiyon Mein Keetnashak Avshesh Ki Jaanch से जुड़े आंकड़ों को पूरे बाजार की सभी फल-सब्जियों पर लागू करना सही नहीं होगा।
सैंपल कहां से लिए जाते हैं?
MPRNL परियोजना के तहत अलग-अलग स्थानों से सैंपल एकत्र किए जाते हैं। बाजारों के अलावा जरूरत के अनुसार खेत यानी farm-gate से भी सैंपल लिए जा सकते हैं। सैंपल से जुड़ी जानकारी को रिकॉर्ड किया जाता है। खेत से लिए गए सैंपल की स्थिति में उत्पादन क्षेत्र की जानकारी भी दर्ज की जा सकती है। GPS लोकेशन जैसी जानकारी से किसी सैंपल में अधिक अवशेष मिलने पर उसके संभावित स्रोत का पता लगाने में मदद मिल सकती है। इस तरह Phal-Sabjiyon Mein Keetnashak Avshesh Ki Jaanch केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सैंपल संग्रह और उसकी जानकारी दर्ज करने की प्रक्रिया भी शामिल होती है।
प्रयोगशाला में क्या जांच की जाती है?
सैंपल प्रयोगशाला पहुंचने के बाद उसमें मौजूद संभावित कीटनाशक अवशेषों का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाता है। जांच में यह पता लगाया जाता है कि संबंधित सैंपल में किसी विशेष कीटनाशक का अवशेष मौजूद है या नहीं।अवशेष मिलने पर उसकी मात्रा का आकलन किया जाता है और फिर संबंधित कीटनाशक के निर्धारित MRL से तुलना की जाती है। इस तुलना के आधार पर पता चलता है कि सैंपल निर्धारित सीमा के अंदर है या उससे अधिक। यही वजह है कि Phal-Sabjiyon Mein Keetnashak Avshesh Ki Jaanch खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा की निगरानी का अहम हिस्सा है।
2005 से हो रही है निगरानी
देश में कीटनाशक अवशेषों की निगरानी के लिए MPRNL परियोजना की शुरुआत 2005-06 में हुई थी। सरकार के अनुसार वर्तमान में इस व्यवस्था के तहत 40 प्रयोगशालाएं काम कर रही हैं। इनमें पांच नई प्रयोगशालाएं भी शामिल हैं।यह व्यवस्था 22 राज्यों को कवर करती है और परियोजना को 2028-29 तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। इसके अलावा 21 राज्यों में राज्य स्तरीय समितियां भी बनाई गई हैं। इन समितियों का उद्देश्य किसानों और अन्य संबंधित लोगों के बीच Good Agricultural Practices यानी GAP और Integrated Pest Management यानी IPM को बढ़ावा देना है।
किसानों के लिए सही कीटनाशक इस्तेमाल जरूरी
कीटनाशक फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन इनका इस्तेमाल सही मात्रा और सही समय पर करना जरूरी है।जरूरत से ज्यादा कीटनाशक का इस्तेमाल या फसल की कटाई के बहुत करीब रसायनों का छिड़काव करने से फसल में अवशेष अधिक रहने की संभावना हो सकती है। इसलिए किसानों को फसल के अनुसार अनुशंसित दवा का इस्तेमाल करना चाहिए।दवा की मात्रा और छिड़काव के बाद कटाई से पहले निर्धारित अंतराल का पालन करना भी जरूरी है। इससे Phal-Sabjiyon Mein Keetnashak Avshesh Ki Jaanch में तय मानकों को पूरा करने की दिशा में मदद मिल सकती है।
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Integrated Pest Management से कम हो सकता है रासायनिक इस्तेमाल
Integrated Pest Management यानी IPM ऐसी कृषि पद्धति है जिसमें फसल सुरक्षा के लिए केवल रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जाती है।इसमें जैविक नियंत्रण, फसल प्रबंधन, कीटों की निगरानी और अन्य वैज्ञानिक उपाय शामिल होते हैं। जरूरत पड़ने पर ही रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है। IPM को बढ़ावा देने का उद्देश्य फसल को सुरक्षित रखने के साथ अनावश्यक रासायनिक इस्तेमाल को कम करना भी है। Phal-Sabjiyon Mein Keetnashak Avshesh Ki Jaanch
क्या फल और सब्जियां खाना बंद कर दें?
3.1 फीसदी सैंपल में MRL से अधिक अवशेष मिलने के आंकड़े के आधार पर फल और सब्जियां खाना बंद करने की जरूरत नहीं है। फल और सब्जियां संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।उपभोक्ताओं को बाजार से फल और सब्जियां खरीदने के बाद उन्हें साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। खाने से पहले सामान्य खाद्य स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है।हालांकि, केवल धोने से हर प्रकार के कीटनाशक अवशेष पूरी तरह खत्म हो जाएंगे, ऐसा मानना सही नहीं है। सुरक्षित खाद्य उत्पादन के लिए खेत से लेकर बाजार तक वैज्ञानिक निगरानी जरूरी है।
भारत का फल-सब्जी कारोबार भी बढ़ा
भारत फल और सब्जियों का बड़ा उत्पादक होने के साथ इनके कारोबार में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। सरकार के अनुसार भारत लगातार फल और सब्जियों का नेट एक्सपोर्टर रहा है। 2016-17 में भारत ने करीब 2.45 अरब डॉलर के फल और सब्जियों का निर्यात किया था। 2025-26 में यह बढ़कर करीब 3.93 अरब डॉलर हो गया।
इसी अवधि में निर्यात की मात्रा करीब 49.5 लाख टन से बढ़कर 58.2 लाख टन हो गई। घरेलू मांग बढ़ने के साथ फल और सब्जियों का आयात भी बढ़ा है। ऐसे में निर्यात के साथ घरेलू बाजार में खाद्य गुणवत्ता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।Phal-Sabjiyon Mein Keetnashak Avshesh Ki Jaanch जैसी निगरानी व्यवस्था इसी खाद्य गुणवत्ता को सुनिश्चित करने में मदद करती है।
