पिछले 10 सालों में परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) भारत में टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की एक अहम योजना बन गई है। PKVY Scheme
मिट्टी की खराब होती गुणवत्ता, पानी का प्रदूषण और रसायनों के बढ़ते असर को देखते हुए, सरकार ने साल 2015 में इस योजना की शुरुआत की थी। इसका मकसद जैविक खेती को बढ़ावा देना, किसानों की आमदनी बढ़ाना और खेती को लंबे समय तक सुरक्षित बनाना है। PKVY Scheme

PKVY Scheme
परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) क्या है?
परिचय: PKVY, राष्ट्रीय सतत् कृषि मिशन (NMSA) के तहत मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन (SHM) का एक हिस्सा है।इस योजना का मुख्य उद्देश्य जैविक खेती को बढ़ावा देना है, ताकि मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर हो सके और खेती लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहे।इसमें भारत के लिए सहभागी गारंटी प्रणाली (PGS) को भी बढ़ावा दिया जाता है। यह एक भरोसे पर आधारित स्थानीय सर्टिफिकेशन सिस्टम है, जिसमें किसान और उपभोक्ता दोनों शामिल होते हैं।
PGS-India, थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन से अलग है और इसमें किसान खुद मिलकर एक-दूसरे के उत्पादन की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हैं। PKVY Scheme
वित्तपोषण पैटर्न और पात्रता:
इस योजना में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर खर्च उठाती हैं, जिसमें सामान्य राज्यों के लिए अनुपात 60:40 (केंद्र: राज्य) होता है। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 रखा गया है, यानी ज्यादा हिस्सा केंद्र सरकार देती है। संघ शासित प्रदेशों में इस योजना का पूरा खर्च (100%) केंद्र सरकार ही उठाती है। PKVY Scheme
पात्रता:
इस योजना के लिए सभी किसान और संस्थाएँ आवेदन कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए अधिकतम भूमि सीमा 2 हेक्टेयर तय की गई है।

परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) की प्रमुख विशेषताएँ:
क्लस्टर आधारित तरीका:
इस योजना में किसानों को लगभग 20 हेक्टेयर के समूह (क्लस्टर) में जोड़ा जाता है, जिससे संसाधनों का सही उपयोग हो, लागत कम हो और खेती के तरीके एक जैसे रहें।
पूरी प्रक्रिया में सहयोग:
यह योजना किसानों को खेती से लेकर प्रोसेसिंग, सर्टिफिकेशन और बाजार में बेचने तक हर चरण में मदद देती है।
प्रशिक्षण और मार्गदर्शन:
किसानों को जैविक खेती की तकनीक, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और अलग-अलग फसलों की खेती के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है।
मार्केट से जुड़ाव:
किसानों को सीधे स्थानीय और बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद की जाती है, जिससे उनकी आमदनी बढ़ सके।
जैविक खेती पोर्टल:
यह एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जहां किसान अपने जैविक उत्पाद सीधे ग्राहकों को बेच सकते हैं।
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इस योजना के तहत मिलने वाले प्रमुख लाभ:
PKVY के अंतर्गत जैविक खेती अपनाने वाले किसानों को 3 साल में प्रति हेक्टेयर ₹31,500 तक की आर्थिक सहायता दी जाती है।
इस राशि का बड़ा हिस्सा खेत में इस्तेमाल होने वाले जैविक खाद और अन्य जरूरी इनपुट्स (ऑन-फार्म और ऑफ-फार्म) के लिए दिया जाता है, ताकि किसान आसानी से जैविक खेती शुरू कर सकें।
भारत में जैविक प्रमाणन के प्रकार:
तृतीय-पक्ष प्रमाणन (NPOP):
यह प्रमाणन मान्यता प्राप्त एजेंसियों द्वारा किया जाता है। इसमें उत्पादन, प्रोसेसिंग, व्यापार और निर्यात के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया जाता है। इससे किसानों को अपने जैविक उत्पाद विदेशों में बेचने का मौका मिलता है।
सहभागी गारंटी प्रणाली (PGS-इंडिया):
यह एक किसान-केंद्रित और समुदाय आधारित प्रणाली है, जिसमें किसान मिलकर एक-दूसरे की खेती के तरीकों की जांच करते हैं और उत्पाद को जैविक मानते हैं। यह खासतौर पर देश के अंदर बिक्री के लिए उपयोगी है और छोटे व सीमांत किसानों के लिए ज्यादा फायदेमंद है।

