Pyaaj Ki Keemat: रसोई में इस्तेमाल होने वाली जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। सबसे ज्यादा असर प्याज के दाम पर पड़ा है। दिल्ली-एनसीआर में प्याज का भाव 60 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गया है। देशभर में भी प्याज की कीमत पिछले साल की तुलना में करीब 90 प्रतिशत तक बढ़ गई है। बढ़ते दामों के कारण आम लोगों के घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ रहा है।
Pyaaj Ki Keemat में क्यों आया इतना उछाल?
बुधवार को प्याज का औसत खुदरा भाव करीब 52.66 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। यह पिछले साल की तुलना में लगभग 90 प्रतिशत अधिक है। वहीं, पिछले एक महीने में प्याज के दाम में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली-एनसीआर में कीमत 60 रुपये प्रति किलो के पार पहुंचने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है। व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, महाराष्ट्र में प्याज की बुवाई कम होने और मानसून में देरी का असर खरीफ प्याज की फसल पर पड़ा है। देश के प्रमुख प्याज उत्पादक राज्य में उत्पादन कम होने की आशंका से बाजार में आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। इसी वजह से Pyaaj Ki Keemat में तेजी देखी जा रही है।
महाराष्ट्र में प्याज उत्पादन घटने की आशंका
महाराष्ट्र देश के प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां खरीफ प्याज की बुवाई और मौसम की स्थिति का सीधा असर बाजार में आने वाली प्याज की मात्रा पर पड़ता है। इस बार बुवाई में कमी और मानसून में देरी के कारण खरीफ प्याज के उत्पादन में करीब 5 से 7 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान लगाया जा रहा है। अगर नई फसल की आवक उम्मीद से कम रहती है तो बाजार में प्याज की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में Pyaaj Ki Keemat अक्टूबर तक ऊंची रहने की संभावना जताई जा रही है। नई फसल की आवक बढ़ने के बाद ही बाजार में कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है।
Pyaaj Ki Keemat: सरकार सस्ते दाम पर बेच रही प्याज
बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतार रही है। उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए करीब 35 रुपये प्रति किलो के रियायती भाव पर प्याज बेचने की व्यवस्था की गई है। सरकारी स्टॉक से प्याज की उपलब्धता बढ़ने पर बाजार में आपूर्ति बेहतर हो सकती है। इससे Pyaaj Ki Keemat पर दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, बाजार में कीमतों में स्थायी राहत नई फसल की आवक बढ़ने के बाद ही मिलने की संभावना है।
चावल के दाम में भी बढ़ोतरी
प्याज के साथ चावल की कीमत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बुधवार को चावल का औसत खुदरा भाव करीब 46.23 रुपये प्रति किलो रहा। पिछले साल की तुलना में चावल की कीमत लगभग 7 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है। चावल आम परिवारों की रसोई में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख खाद्य पदार्थ है। इसलिए इसकी कीमत में बढ़ोतरी से घरेलू खाद्य बजट पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार के पास पर्याप्त चावल का स्टॉक मौजूद है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त स्टॉक को बाजार में उतारा जा सकता है।
सरसों तेल की कीमत ने भी बढ़ाया खर्च
सरसों तेल भी महंगाई की मार से अछूता नहीं रहा है। बुधवार को सरसों तेल का औसत खुदरा भाव करीब 202.14 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। पिछले साल की तुलना में इसकी कीमत लगभग 7 प्रतिशत ज्यादा है। प्याज के साथ खाना पकाने के तेल की कीमत बढ़ने से रसोई का कुल खर्च और बढ़ सकता है। ऐसे में Pyaaj Ki Keemat में आई तेजी के साथ खाद्य तेलों के महंगे होने का असर आम उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर दिखाई दे रहा है।
आलू और टमाटर ने दी थोड़ी राहत
जहां कई जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े हैं, वहीं आलू और टमाटर की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। भारी उत्पादन के कारण आलू का औसत खुदरा भाव पिछले साल की तुलना में करीब 9.5 प्रतिशत घटकर 22.74 रुपये प्रति किलो रह गया है। टमाटर का भाव भी करीब 12 प्रतिशत घटकर 39.07 रुपये प्रति किलो हो गया है। इन दोनों सब्जियों की कीमतों में गिरावट से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है, लेकिन प्याज के महंगे होने के कारण सब्जियों का कुल खर्च अभी भी दबाव में है।
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चना दाल की कीमत में मामूली गिरावट
चना दाल के भाव में भी मामूली गिरावट देखने को मिली है। इसका औसत खुदरा भाव करीब 87.72 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। सरकारी एजेंसियों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद होने के कारण दाल की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिल रही है। NAFED और NCCF जैसी सरकारी एजेंसियों के पास करीब 2 मिलियन टन का स्टॉक मौजूद है। पर्याप्त स्टॉक और बाजार में नियमित आपूर्ति के कारण चना दाल के दाम में फिलहाल बड़ी तेजी नहीं दिखाई दे रही है।
गेहूं की कीमत में मामूली गिरावट
गेहूं के दाम में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई है। इसका औसत खुदरा भाव करीब 31.71 रुपये प्रति किलो रहा। सरकारी भंडार में पर्याप्त गेहूं होने के कारण बाजार में इसकी उपलब्धता को लेकर फिलहाल चिंता नहीं है। भारतीय खाद्य निगम यानी FCI के पास करीब 47.78 मिलियन टन गेहूं का स्टॉक मौजूद है। 1 अक्टूबर के लिए निर्धारित जरूरत करीब 20.52 मिलियन टन है। इस पर्याप्त स्टॉक के चलते Pyaaj Ki Keemat जैसी तेजी गेहूं के बाजार में देखने को नहीं मिली है।
अक्टूबर तक प्याज के भाव पर रहेगी नजर
आने वाले समय में प्याज की नई फसल की आवक बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण रहेगी। अगर खरीफ प्याज की फसल बेहतर रहती है और बाजार में आवक बढ़ती है, तो कीमतों में राहत मिल सकती है। वहीं उत्पादन में कमी और कम आवक की स्थिति में दाम कुछ समय और ऊंचे रह सकते हैं। फिलहाल Pyaaj Ki Keemat आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है।
सरकार बफर स्टॉक के जरिए बाजार में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश कर रही है। नई फसल आने के बाद ही यह साफ होगा कि Pyaaj Ki Keemat में कितनी गिरावट आती है। बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए Pyaaj Ki Keemat पर अक्टूबर तक लगातार नजर बनी रहेगी। अगर आपूर्ति में सुधार होता है तो उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है, लेकिन नई फसल में देरी या उत्पादन में कमी की स्थिति में प्याज के दाम ऊंचे बने रह सकते हैं।

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