कमजोर मॉनसून का रबी फसलों पर असर देश में 15% कम बारिश, रबी बुवाई पर बढ़ी चिंता Rabi Fasal Par Sukhe Ka Asar 2026

कमजोर मॉनसून का रबी फसलों पर असर देश में 15% कम बारिश, रबी बुवाई पर बढ़ी चिंता Rabi Fasal Par Sukhe Ka Asar 2026

Rabi Fasal Par Sukhe Ka Asar 2026: देश में इस साल कमजोर मॉनसून और बारिश की कमी के बीच रबी फसल पर सूखे का असर 2026 को लेकर चिंता बढ़ गई है। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी शुरू होने के साथ कई इलाकों में सूखे और कम बारिश जैसी परिस्थितियां सामने आई हैं। इसका असर आने वाले रबी सीजन में मिट्टी की नमी, सिंचाई व्यवस्था, बुवाई और फसल उत्पादन पर पड़ सकता है। इसी स्थिति को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने रबी सीजन की तैयारियों पर चर्चा के लिए दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया है।

देश में 15 फीसदी बारिश की कमी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 22 सितंबर 2026 के बीच देश में 706.9 मिमी बारिश हुई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 832.4 मिमी होती है। इस तरह देश में करीब 15 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई। बारिश की यह कमी ऐसे समय में सामने आई है, जब किसान खरीफ फसल के बाद रबी सीजन की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में Rabi Fasal Par Sukhe Ka Asar 2026 कई कृषि क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण चिंता का विषय बन गया है। Rabi Fasal Par Sukhe Ka Asar 2026

52.5 फीसदी क्षेत्र में सूखे या कम बारिश की स्थिति

IIT गांधीनगर के India Drought Monitor के मुताबिक 16 सितंबर तक देश के करीब 52.5 फीसदी क्षेत्र में सूखे या शुष्क परिस्थितियां दर्ज की गईं। करीब एक महीने पहले यह आंकड़ा 38.9 फीसदी था। पश्चिमी और दक्षिणी भारत में स्थिति अपेक्षाकृत अधिक गंभीर बताई गई है। पश्चिमी भारत के लगभग 79 फीसदी और दक्षिणी भारत के करीब 67 फीसदी क्षेत्र को सूखे या कम बारिश से प्रभावित बताया गया। इन परिस्थितियों में रबी फसलों की बुवाई से पहले खेत में उपलब्ध नमी और सिंचाई के पानी की स्थिति महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए Rabi Fasal Par Sukhe Ka Asar 2026 को लेकर किसानों के साथ कृषि विभाग भी तैयारियों पर जोर दे रहा है।

रबी फसलों की बुवाई पर क्या असर पड़ेगा?

रबी सीजन में गेहूं, चना, सरसों, जौ और मसूर जैसी प्रमुख फसलों की खेती की जाती है। इन फसलों के लिए बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी और आगे की सिंचाई व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। यदि बारिश की कमी के कारण मिट्टी में नमी कम रहती है, तो कुछ क्षेत्रों में किसानों को सिंचाई पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है। वर्षा आधारित खेती वाले इलाकों में इसका प्रभाव ज्यादा दिखाई दे सकता है। हालांकि इसका वास्तविक असर क्षेत्रवार बारिश, मिट्टी की स्थिति, सिंचाई सुविधा और आने वाले मौसम पर निर्भर करेगा। Rabi Fasal Par Sukhe Ka Asar 2026

कृषि मंत्रालय ने बुलाई दो दिन की बैठक

रबी सीजन की तैयारियों को लेकर कृषि मंत्रालय ने 28 और 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय रबी सम्मेलन आयोजित किया है। इसमें राज्यों के कृषि मंत्री और अधिकारी रबी सीजन की रणनीति पर चर्चा करेंगे। बैठक में फसल योजना, बीज और उर्वरक की उपलब्धता, पानी का प्रबंधन तथा कम बारिश वाले क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक कृषि रणनीतियों जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया जा रहा है। कृषि मंत्रालय राज्यों के साथ मिलकर संभावित परिस्थितियों के अनुसार तैयारी कर रहा है।

कमजोर मॉनसून से बढ़ी किसानों की चिंता

2026 में मॉनसून को लेकर शुरुआत से ही सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाया गया था। IMD ने बाद में पूरे देश के लिए मौसमी बारिश का अनुमान LPA के 90 फीसदी तक किया था। आधिकारिक अनुमान में सामान्य से कम बारिश की संभावना बताई गई थी। अब मॉनसून सीजन में वास्तविक बारिश सामान्य से कम रहने के कारण पानी और कृषि व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसका असर मौजूदा खरीफ फसलों के साथ आने वाली रबी फसलों पर भी पड़ सकता है। Rabi Fasal Par Sukhe Ka Asar 2026

अल नीनो से भी बढ़ी मौसम की चिंता

कमजोर मॉनसून के बीच अल नीनो की स्थिति भी कृषि और मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सामान्य तौर पर अल नीनो की स्थिति भारतीय मॉनसून पर असर डाल सकती है, हालांकि इसका प्रभाव हर वर्ष और हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं होता। इसलिए Rabi Fasal Par Sukhe Ka Asar 2026 को समझते समय केवल बारिश के आंकड़ों को देखना पर्याप्त नहीं है। मिट्टी की नमी, जलाशयों में पानी, भूजल, सिंचाई सुविधाएं और सर्दियों के दौरान मौसम भी रबी उत्पादन को प्रभावित करेंगे।

कम बारिश वाले क्षेत्रों में किसानों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

कम बारिश वाले क्षेत्रों में किसानों को रबी फसल की बुवाई से पहले खेत में नमी की स्थिति जरूर जांचनी चाहिए। जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां पानी की उपलब्धता के अनुसार फसल योजना बनाना उपयोगी रहेगा। किसानों को अपने क्षेत्र के कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार फसल और किस्म का चयन करना चाहिए। कम पानी की स्थिति में वैकल्पिक या कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने की तैयारी भी कुछ प्रभावित क्षेत्रों में की जा रही है। Rabi Fasal Par Sukhe Ka Asar 2026

रबी फसल उत्पादन पर क्या पड़ेगा असर?

फिलहाल Rabi Fasal Par Sukhe Ka Asar 2026 का अंतिम आकलन करना जल्दबाजी होगा। बारिश की कमी निश्चित रूप से चिंता बढ़ा रही है, लेकिन रबी फसल का वास्तविक उत्पादन आने वाले महीनों में मिट्टी की नमी, सिंचाई, तापमान, बुवाई का समय और सर्दियों की बारिश जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। सरकार की ओर से रबी सीजन की शुरुआत से पहले तैयारियों पर जोर दिया जा रहा है, ताकि कम बारिश वाले क्षेत्रों में किसानों को संभावित समस्याओं से निपटने के लिए आवश्यक रणनीति और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें।

Rabi Fasal Par Sukhe Ka Asar 2026: किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

इस साल बारिश में कमी और देश के कई हिस्सों में सूखे जैसी परिस्थितियों ने रबी सीजन की तैयारी को महत्वपूर्ण बना दिया है। खासकर वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों में पानी और मिट्टी की नमी की उपलब्धता पर नजर रखना जरूरी होगा। आने वाले समय में रबी बुवाई का क्षेत्र, सिंचाई की स्थिति और मौसम का रुख यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगा कि Rabi Fasal Par Sukhe Ka Asar 2026 कितना व्यापक रहता है।

author
Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

Related Articles

1 Comment

Avarage Rating:
  • 0 / 10

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *