Rajasthan Mein Moong Ka Bhav: राजस्थान में मूंग की नई फसल की आवक तेजी से बढ़ रही है, लेकिन किसानों को मंडियों में उम्मीद के मुताबिक भाव नहीं मिल रहा है। Rajasthan Mein Moong Ka Bhav फिलहाल सरकार की ओर से तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे बना हुआ है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है और सरकारी खरीद जल्द शुरू करने की मांग भी तेज हो रही है।
Rajasthan Mein Moong Ka Bhav MSP से नीचे
राजस्थान की मंडियों में सितंबर की शुरुआत के मुकाबले मूंग के भाव में कुछ सुधार जरूर हुआ है। उपलब्ध मंडी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर की शुरुआत में मूंग का औसत भाव करीब 7,000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास था। 17 सितंबर तक यह बढ़कर करीब 7,960 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया। इसके बावजूद Rajasthan Mein Moong Ka Bhav अभी भी MSP से नीचे है। केंद्र सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए मूंग का MSP 8,780 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। ऐसे में मंडी में मिलने वाला भाव MSP से कम होने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने पर अपेक्षित कीमत नहीं मिल पा रही है। Rajasthan Mein Moong Ka Bhav
किसानों को MSP से करीब 15 फीसदी कम भाव
रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में मूंग का औसत भाव करीब 7,452 रुपये प्रति क्विंटल रहा है। वहीं मूंग का MSP 8,780 रुपये प्रति क्विंटल है। इस हिसाब से किसानों को करीब 1,328 रुपये प्रति क्विंटल कम भाव मिल रहा है। यानी मौजूदा औसत कीमत MSP की तुलना में करीब 15 फीसदी कम है। यही वजह है कि किसान संगठन सरकार से मंडियों में प्रभावी खरीद व्यवस्था शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
राजस्थान में मूंग की आवक में बड़ा इजाफा
इस साल राजस्थान में मूंग की नई फसल मंडियों में तेजी से पहुंच रही है। 1 सितंबर से अब तक करीब 63,000 टन मूंग मंडियों में पहुंचने की जानकारी सामने आई है। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 10 गुना ज्यादा बताई जा रही है। आवक बढ़ने का असर बाजार कीमतों पर भी पड़ता है। जब मंडियों में कम समय में बड़ी मात्रा में फसल पहुंचती है और उसके मुकाबले मांग कमजोर रहती है, तो कीमतों पर दबाव बन सकता है। इसी वजह से किसान मौजूदा Rajasthan Mein Moong Ka Bhav को लेकर चिंतित हैं।
2026-27 में मूंग के MSP में सिर्फ 12 रुपये की बढ़ोतरी
मूंग के भाव को लेकर किसानों की चिंता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2026-27 सीजन के लिए MSP में बहुत मामूली बढ़ोतरी की गई है। केंद्र सरकार ने मूंग का MSP 8,780 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जबकि पिछले साल यह 8,768 रुपये प्रति क्विंटल था। इस तरह एक साल में MSP में केवल 12 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। किसानों और किसान संगठनों का कहना है कि उत्पादन लागत और बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए सरकारी खरीद व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जाना जरूरी है।
Rajasthan Mein Moong Ka Bhav सरकारी खरीद बढ़ाने की मांग
मूंग के मौजूदा भाव को लेकर किसान संगठनों की ओर से सरकारी खरीद व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। किसान नेताओं का कहना है कि अगर सरकार ने मूंग का MSP तय किया है, तो किसानों को उस कीमत के आसपास अपनी फसल बेचने का प्रभावी विकल्प भी मिलना चाहिए। किसानों की मांग है कि NAFED और NCCF जैसी सरकारी एजेंसियों के माध्यम से मूंग की खरीद बढ़ाई जाए। साथ ही खरीद शुरू करने की प्रक्रिया को फसल की आवक के समय के अनुसार बनाया जाए, ताकि किसानों को अपनी तैयार फसल लंबे समय तक रोककर न रखनी पड़े।
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मूंग की खेती का रकबा भी हुआ कम
राजस्थान में इस साल मूंग की बुवाई का क्षेत्र पिछले साल के मुकाबले कम रहा है। वर्ष 2025 में राज्य में मूंग की बुवाई करीब 26.57 लाख हेक्टेयर में हुई थी। वहीं 2026 में यह घटकर करीब 23.17 लाख हेक्टेयर रह गई। राज्य सरकार ने इस साल मूंग के लिए करीब 26.50 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा था। लक्ष्य की तुलना में भी बुवाई कम रही। ऐसे में अगर किसानों को बाजार में लगातार MSP से नीचे भाव मिलता है, तो आने वाले सीजन में मूंग की खेती के रकबे पर इसका असर पड़ सकता है। Rajasthan Mein Moong Ka Bhav
राजस्थान है देश का प्रमुख मूंग उत्पादक राज्य
राजस्थान देश के प्रमुख मूंग उत्पादक राज्यों में शामिल है। वर्ष 2025 के खरीफ सीजन में राज्य में करीब 13.89 लाख टन मूंग उत्पादन हुआ था। देश के कुल मूंग उत्पादन में राजस्थान की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रही है। इसलिए Rajasthan Mein Moong Ka Bhav केवल राज्य के स्थानीय बाजार का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर देश के दाल बाजार और मूंग की आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
आने वाले दिनों में मूंग के भाव पर क्या असर पड़ेगा?
आने वाले दिनों में मूंग की कीमत कई कारकों पर निर्भर करेगी। मंडियों में नई फसल की आवक, मूंग की गुणवत्ता, बाजार में मांग और सरकारी खरीद की स्थिति कीमत को प्रभावित कर सकती है। अगर सरकारी एजेंसियों की खरीद बढ़ती है और बाजार में मांग मजबूत होती है, तो किसानों को बेहतर भाव मिलने की स्थिति बन सकती है। वहीं लगातार बड़ी आवक और कमजोर मांग रहने पर बाजार भाव पर दबाव बना रह सकता है। Rajasthan Mein Moong Ka Bhav
फिलहाल किसानों की नजर मंडियों में मिलने वाले भाव और सरकारी खरीद व्यवस्था पर बनी हुई है। Rajasthan Mein Moong Ka Bhav MSP के करीब पहुंचता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में आवक और सरकारी खरीद की स्थिति पर काफी हद तक निर्भर करेगा।

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