किसान संतोष देवी रेगिस्तान में अनार और सेब की खेती कर बनीं ‘अनार क्वीन’ Santosh Devi Khedar Success Story

किसान संतोष देवी रेगिस्तान में अनार और सेब की खेती कर बनीं ‘अनार क्वीन’ Santosh Devi Khedar Success Story

Santosh Devi Khedar Success Story: राजस्थान के सीकर जिले के बेरी गांव की प्रगतिशील किसान संतोष देवी खेदड़ ने अपनी मेहनत, आधुनिक तकनीक और खेती में नए प्रयोगों से एक अलग पहचान बनाई है। पानी की कमी वाले क्षेत्र में अनार, सेब, अमरूद, मौसमी, नींबू और चीकू जैसे फलों की खेती करके उन्होंने साबित किया है कि सही तकनीक अपनाकर कम संसाधनों में भी बागवानी को आगे बढ़ाया जा सकता है। Santosh Devi Khedar Success Story उन किसानों के लिए प्रेरणा है, जो पारंपरिक खेती के साथ बागवानी और पौध उत्पादन के क्षेत्र में अपनी आय बढ़ाना चाहते हैं।

संतोष देवी को अनार की खेती में सफलता के कारण ‘अनार क्वीन’ के नाम से जाना जाता है। अब राजस्थान कृषि आयुक्तालय ने उन्हें प्रदेश का किसान ब्रांड एंबेसडर एवं ट्रेनर नियुक्त किया है। इस जिम्मेदारी के तहत वह किसानों को जैविक, पारंपरिक और प्राकृतिक खेती के गुर सिखाएंगी। Santosh Devi Khedar Success Story

पानी की कमी के बावजूद करती हैं कई फलों की खेती

राजस्थान में कम बारिश और पानी की कमी किसानों के सामने बड़ी चुनौती है। इसके बावजूद संतोष देवी खेदड़ ने अपने खेत में विभिन्न प्रकार के फलदार पौधे तैयार करके बागवानी का एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनके फार्म पर अनार के अलावा सेब की हरमन-99 किस्म, अमरूद, मौसमी, नींबू और चीकू जैसे फल भी उगाए जाते हैं। कम पानी वाले क्षेत्र में बागवानी करने के लिए फसल और किस्म का सही चुनाव जरूरी है। संतोष देवी ने अपने अनुभव से जल प्रबंधन और आधुनिक सिंचाई तकनीकों के महत्व को समझा। उनकी खेती से यह सीख मिलती है कि स्थानीय जलवायु के अनुसार फसलों का चयन करके खेती में नए अवसर तलाशे जा सकते हैं।

बूंद-बूंद सिंचाई तकनीक से मिला फायदा

संतोष देवी की खेती की सबसे बड़ी विशेषता पानी का बेहतर प्रबंधन है। उन्होंने ड्रिप सिंचाई यानी बूंद-बूंद सिंचाई तकनीक को अपनाया। इस विधि में पानी को पाइप और ड्रिपर के माध्यम से सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। इससे पौधों को जरूरत के अनुसार पानी देने में मदद मिलती है और पानी के अनावश्यक इस्तेमाल को कम किया जा सकता है। खासकर राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्रों में बागवानी के लिए सिंचाई का उचित प्रबंधन महत्वपूर्ण होता है। Santosh Devi Khedar Success Story से किसानों को यह सीख मिलती है कि खेती में नई तकनीकों का इस्तेमाल करके सीमित प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।

हर साल तैयार करती हैं एक लाख से ज्यादा पौधे

Santosh Devi Khedar Success Story संतोष देवी खेदड़ ने फल उत्पादन के साथ नर्सरी और पौध उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई है। उनकी नर्सरी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से पंजीकृत है। यहां हर साल एक लाख से अधिक पौधे तैयार किए जाते हैं। उनकी नर्सरी बागवानी में रुचि रखने वाले किसानों के लिए उपयोगी है। यहां किसान फलदार पौधों और खेती से जुड़ी तकनीकों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

उनके फार्म पर कृषि महाविद्यालयों के विद्यार्थी भी खेती के व्यावहारिक तरीकों को समझने के लिए पहुंचते हैं। राजस्थान के अलावा हरियाणा, मध्य प्रदेश और गुजरात के किसान भी उनके फार्म पर प्रशिक्षण लेने आते हैं। इस तरह संतोष देवी अपने अनुभवों के माध्यम से दूसरे किसानों को बागवानी और पौध उत्पादन के लिए प्रेरित कर रही हैं।

Santosh Devi Khedar Success Story राष्ट्रपति भवन में मिला सम्मान

संतोष देवी के कृषि नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। उन्हें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किसानों में शामिल होने का अवसर मिला था। वर्ष 2024 में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने उन्हें इनोवेटिव फार्मर अवॉर्ड से सम्मानित किया। खेती में नए प्रयोगों, बागवानी और सीमित संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी उपलब्धियां बताती हैं कि किसान आधुनिक कृषि तकनीकों, सही फसल चयन और लगातार सीखने की आदत के जरिए खेती में नए रास्ते बना सकते हैं।

राजस्थान की किसान ब्रांड एंबेसडर बनीं संतोष देवी

राजस्थान कृषि आयुक्तालय ने संतोष देवी खेदड़ को प्रदेश का किसान ब्रांड एंबेसडर एवं ट्रेनर नियुक्त किया है। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल की ओर से जारी आदेश के अनुसार, वह विभिन्न स्थानों पर आयोजित किसान प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कार्यशालाओं में भाग लेंगी। Santosh Devi Khedar Success Story

इन कार्यक्रमों में वह किसानों को जैविक, पारंपरिक और प्राकृतिक खेती से जुड़े तरीकों के बारे में जानकारी देंगी। बागवानी, जल प्रबंधन और खेती में नवाचार से जुड़े उनके अनुभव दूसरे किसानों के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं। इस जिम्मेदारी के लिए उन्हें कोटा स्थित श्री रामशांताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र की ओर से हर महीने 11 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। Santosh Devi Khedar Success Story

किसानों के लिए क्या है संतोष देवी की सफलता से सीख?

संतोष देवी खेदड़ की खेती से किसानों को कई महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं। कम पानी वाले क्षेत्रों में खेती करते समय जल प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है। इसके साथ ही स्थानीय जलवायु के अनुकूल फलदार पौधों का चयन, आधुनिक सिंचाई तकनीक और पौध उत्पादन जैसे काम खेती के नए अवसर खोल सकते हैं। किसान अपनी जमीन, पानी की उपलब्धता और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर बागवानी की योजना बना सकते हैं। Santosh Devi Khedar Success Story

हालांकि, किसी भी नई फसल को बड़े स्तर पर लगाने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेना और छोटे क्षेत्र में परीक्षण करना बेहतर रहता है। Santosh Devi Khedar Success Story यह संदेश देती है कि मेहनत, नई सोच और सही तकनीक के साथ खेती को आगे बढ़ाया जा सकता है। रेगिस्तानी क्षेत्र में बागवानी को बढ़ावा देने के उनके प्रयास दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। अब किसान ब्रांड एंबेसडर एवं ट्रेनर के रूप में वह अपने अनुभव अधिक किसानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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