सरसों-चना के दाम ने पकड़ी रफ्तार, MSP से 21% तक ऊपर भाव Sarson Aur Chane Ke Mandi Bhav

सरसों-चना के दाम ने पकड़ी रफ्तार, MSP से 21% तक ऊपर भाव Sarson Aur Chane Ke Mandi Bhav

Sarson Aur Chane Ke Mandi Bhav: नई रबी फसल की बुवाई शुरू होने से पहले Sarson Aur Chane Ke Mandi Bhav में तेजी देखने को मिल रही है। राजस्थान समेत कई प्रमुख मंडियों में सरसों और चने के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP से ऊपर चल रहे हैं। भरतपुर मंडी में सरसों का भाव 8,000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक पहुंच गया है, जबकि चना 7,000 से 7,200 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बिक रहा है।

सरसों के भाव MSP से 21 फीसदी तक ऊपर

मौजूदा Sarson Aur Chane Ke Mandi Bhav में सरसों की कीमत किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। भरतपुर मंडी में पिछले सीजन की सरसों 8,000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक के भाव पर कारोबार कर रही है। वहीं, 2027-28 मार्केटिंग सीजन के लिए सरसों का MSP 6,613 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इस तरह सरसों का मौजूदा बाजार भाव MSP से करीब 21 फीसदी अधिक है। किसानों को सरकारी खरीद के बजाय खुले बाजार में अपनी सरसों बेचने पर बेहतर कीमत मिल रही है।

विदेशी खाद्य तेल महंगा होने का असर

Sarson Aur Chane Ke Mandi Bhav में तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल बाजार की स्थिति को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की कीमतें ऊंची रहने से घरेलू बाजार में सरसों जैसे तिलहन की मांग मजबूत हुई है। भारत अपनी खाद्य तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर घरेलू तिलहन की मांग बढ़ सकती है, जिसका असर सरसों के बाजार भाव पर देखने को मिल रहा है।

चने का भाव भी MSP से ऊपर

मौजूदा Sarson Aur Chane Ke Mandi Bhav में चने की कीमत भी मजबूत बनी हुई है। देश के कुल दलहन उत्पादन में चने की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी मानी जाती है। इस समय कई मंडियों में चना 7,000 से 7,200 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बिक रहा है। वहीं, अगले मार्केटिंग सीजन के लिए चने का MSP 5,958 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इस आधार पर चने का मौजूदा बाजार भाव MSP से लगभग 17 फीसदी अधिक है।

चने की कीमतों में तेजी से कारोबारियों की चिंता

Sarson Aur Chane Ke Mandi Bhav में चने की कीमत बढ़ने से दाल कारोबारियों की चिंता भी बढ़ी है। कारोबारियों का कहना है कि यदि चने की कीमत लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है तो इसका असर दाल की खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है। इसी वजह से कारोबारियों ने सरकार से बफर स्टॉक में रखे चने को बाजार में जारी करने की मांग की है। उनका मानना है कि बाजार में चने की उपलब्धता बढ़ने से कीमतों पर कुछ दबाव कम हो सकता है।

सरकार के पास चने का बफर स्टॉक

बताया जा रहा है कि सरकारी एजेंसियों नाफेड और NCCF के पास करीब 20 लाख टन चने का बफर स्टॉक मौजूद है। कारोबारियों के अनुसार, इस स्टॉक का कुछ हिस्सा बाजार में उतारने से आपूर्ति बढ़ सकती है। हालांकि, Sarson Aur Chane Ke Mandi Bhav की आगे की दिशा नई रबी फसल की बुवाई, मौसम और उत्पादन पर भी निर्भर करेगी। नई फसल की आवक बढ़ने के बाद बाजार में कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है।

नई रबी फसल की बुवाई पर किसानों की नजर

सरसों और चने की नई फसल की बुवाई का समय नजदीक है। ऐसे में Sarson Aur Chane Ke Mandi Bhav किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण हो गए हैं। मौजूदा भाव मजबूत रहने से किसानों का इन फसलों की ओर रुझान बढ़ सकता है। हालांकि, किसानों को केवल मौजूदा बाजार भाव के आधार पर फसल का फैसला नहीं करना चाहिए। बुवाई से पहले स्थानीय बाजार, मौसम, सिंचाई सुविधा, उत्पादन लागत और संभावित उपज को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

गेहूं के MSP में 25 रुपये की बढ़ोतरी

सरकार ने रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं के MSP में भी बढ़ोतरी की है। 2026-27 सीजन के लिए गेहूं का MSP 2,610 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि पिछले सीजन में यह 2,585 रुपये प्रति क्विंटल था। गेहूं के MSP में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। सरकार का जोर तिलहन और दलहन का उत्पादन बढ़ाने पर भी है, ताकि खाद्य तेल और दालों के लिए आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

किसानों के लिए क्या है मौजूदा भाव का मतलब?

मौजूदा Sarson Aur Chane Ke Mandi Bhav किसानों के लिए फिलहाल बेहतर कीमत का संकेत दे रहे हैं। MSP से ऊपर भाव मिलने के कारण किसान खुले बाजार में अपनी उपज बेचकर अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन बाजार भाव में तेजी हमेशा एक जैसी नहीं रहती। इसलिए किसानों के लिए मंडी के दैनिक भाव, स्थानीय मांग और नई फसल की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।

आगे कैसे रहेंगे सरसों और चने के भाव?

आने वाले दिनों में Sarson Aur Chane Ke Mandi Bhav पर नई फसल की बुवाई, मौसम, उत्पादन अनुमान, घरेलू मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार का प्रभाव रहेगा। नई फसल की आवक बढ़ने से बाजार में आपूर्ति बढ़ सकती है। वहीं, खाद्य तेल और दालों की मांग मजबूत रहने पर कीमतों को समर्थन मिल सकता है। ऐसे में किसानों और कारोबारियों की नजर अब नई रबी फसल और मंडियों में होने वाले अगले बदलाव पर रहेगी।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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