Shankar Soren Farming Success Story in Jharkhand: झारखंड के बोकारो जिले के जरीडीह प्रखंड के किसान शंकर सोरेन ने खेती में उपलब्ध जमीन का बेहतर इस्तेमाल कर आमदनी बढ़ाने का अनोखा तरीका अपनाया है। उनकी खेती का मॉडल अब दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। Shankar Soren Farming Success Story in Jharkhand यह बताती है कि अगर किसान खेती की सही तकनीक और उपलब्ध जमीन का समझदारी से इस्तेमाल करे, तो कम जमीन से भी अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है।
शंकर सोरेन ने मचान विधि से नेनुआ की खेती के साथ खाली बचने वाली जमीन में मक्का उगाने का प्रयोग किया। एक ही खेत में दो फसलों की खेती करके उन्होंने उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जोखिम को भी कम किया है। किसान के मुताबिक, इस मॉडल से एक एकड़ जमीन से करीब 1.50 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हो सकता है।
कई पीढ़ियों से खेती कर रहा है किसान का परिवार
Shankar Soren Farming Success Story in Jharkhand की शुरुआत शंकर सोरेन के खेती से जुड़े पारिवारिक अनुभव से होती है। उनके परिवार में कई पीढ़ियों से खेती की जाती रही है। शंकर सोरेन भी लंबे समय से खेती को अपना व्यवसाय बनाकर काम कर रहे हैं। पिछले कई वर्षों से वह नेनुआ की खेती कर रहे हैं। खेती करते समय उन्होंने देखा कि मचान विधि से नेनुआ की बेल ऊपर चढ़ जाती है और फसल के नीचे तथा आसपास की कुछ जमीन खाली रह जाती है। इसी खाली जगह को उन्होंने अतिरिक्त उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने का फैसला किया।
मचान विधि से नेनुआ की खेती में बचती थी जमीन
नेनुआ की खेती के लिए मचान विधि किसानों के बीच काफी उपयोगी मानी जाती है। इसमें बेल को जमीन पर फैलाने के बजाय मचान के सहारे ऊपर चढ़ाया जाता है। इससे पौधे को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है और खेत में काम करना भी आसान हो जाता है। शंकर सोरेन ने देखा कि मचान विधि से खेती करने पर फसलों के बीच करीब 6 से 8 फीट तक की जगह खाली रह जाती है। Shankar Soren Farming Success Story in Jharkhand में यही सोच सबसे महत्वपूर्ण रही कि खाली जमीन को बेकार छोड़ने के बजाय वहां दूसरी फसल लगाई जाए।
नेनुआ के साथ मक्का लगाने का किया प्रयोग
खाली जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए शंकर सोरेन ने मक्का की खेती शुरू की। उन्होंने जून महीने में एक एकड़ खेत में नेनुआ और मक्का की एक साथ खेती का प्रयोग किया। किसान के अनुसार, मक्का के पौधे उचित दूरी मिलने पर अच्छी तरह विकसित हो सकते हैं। Shankar Soren Farming Success Story in Jharkhand
इसलिए नेनुआ की मचान वाली खेती के बीच बचने वाली जगह में मक्का लगाने का विकल्प उन्हें बेहतर लगा। इस तरह एक ही खेत में दो अलग-अलग फसलों का उत्पादन लेने का अवसर मिला। Shankar Soren Farming Success Story in Jharkhand किसानों को यह संदेश देती है कि खेत में मौजूद हर हिस्से का सही उपयोग करके उत्पादन और आमदनी दोनों को बढ़ाया जा सकता है।
60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती हैं दोनों फसलें
शंकर सोरेन के मुताबिक, नेनुआ की फसल करीब 60 से 65 दिनों में तैयार हो जाती है। वहीं मक्का की फसल लगभग 70 दिनों में तैयार होने की स्थिति में आ जाती है। इस वजह से दोनों फसलों से लगभग एक ही समय के आसपास उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। एक एकड़ जमीन में इस तरीके से करीब 40 क्विंटल नेनुआ और 25 क्विंटल मक्का का उत्पादन मिलने का अनुमान है। इस हिसाब से दोनों फसलों को मिलाकर करीब 65 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हो सकता है। Shankar Soren Farming Success Story in Jharkhand
एक एकड़ से करीब 1.50 लाख रुपये का मुनाफा
Shankar Soren Farming Success Story in Jharkhand का सबसे आकर्षक पहलू इससे होने वाली संभावित आमदनी है। किसान शंकर सोरेन के अनुसार, एक एकड़ में नेनुआ और मक्का की संयुक्त खेती करने में लगभग 45 हजार रुपये तक की लागत आती है। अगर दोनों फसलों से कुल 65 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता है और औसतन 30 से 35 रुपये प्रति किलो का बाजार भाव मिलता है, तो कुल आमदनी करीब 1.95 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। Shankar Soren Farming Success Story in Jharkhand
खेती की लागत घटाने के बाद लगभग 1.50 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा मिलने की संभावना बनती है। हालांकि वास्तविक मुनाफा बाजार भाव, उत्पादन, मौसम, मजदूरी, सिंचाई और अन्य खेती लागत के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
दो फसलों की खेती से कम होता है जोखिम
एक ही खेत में दो फसलों की खेती करने का एक बड़ा फायदा यह है कि किसान की आमदनी सिर्फ एक फसल पर निर्भर नहीं रहती। अगर किसी कारण से नेनुआ का बाजार भाव कमजोर रहता है, तो मक्का से मिलने वाली आमदनी किसान के लिए सहारा बन सकती है। इसी तरह किसी एक फसल के उत्पादन पर मौसम या अन्य परिस्थितियों का असर पड़ने पर दूसरी फसल से नुकसान की भरपाई करने में मदद मिल सकती है। Shankar Soren Farming Success Story in Jharkhand इसी वजह से मिश्रित और स्मार्ट खेती की संभावनाओं को सामने लाती है।
खेती में हर इंच जमीन का करें इस्तेमाल
शंकर सोरेन का मानना है कि किसानों को उपलब्ध जमीन का अधिक से अधिक उपयोग करने की कोशिश करनी चाहिए। यदि किसी फसल की खेती के दौरान खेत का कोई हिस्सा खाली बचता है और वहां दूसरी फसल उगाने की पर्याप्त जगह है, तो उसका इस्तेमाल अतिरिक्त उत्पादन के लिए किया जा सकता है। उनका खेती मॉडल खासतौर पर छोटे और सीमित जमीन वाले किसानों के लिए उपयोगी विचार पेश करता है। बिना खेत का क्षेत्रफल बढ़ाए दूसरी फसल को शामिल करके किसान अपनी कुल उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर सकता है।
दूसरे किसानों के लिए बनी प्रेरणा
Shankar Soren Farming Success Story in Jharkhand अब केवल एक किसान की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि यह खेती में नए प्रयोग की मिसाल भी बन रही है। शंकर सोरेन ने अपने अनुभव के आधार पर दिखाया है कि पारंपरिक खेती के साथ नए प्रयोग करके किसान अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। उनका मानना है कि किसानों को खेती में प्रयोग करने से डरना नहीं चाहिए। हालांकि किसी भी नई फसल संयोजन को अपनाने से पहले स्थानीय मिट्टी, मौसम, पानी की उपलब्धता, फसल की दूरी और बाजार की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।
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कम जमीन में ज्यादा कमाई का तरीका
Shankar Soren Farming Success Story in Jharkhand से यह सीख मिलती है कि खेती में सिर्फ जमीन का आकार ही कमाई तय नहीं करता, बल्कि जमीन के सही इस्तेमाल की रणनीति भी महत्वपूर्ण होती है। नेनुआ की मचान खेती के बीच खाली जगह में मक्का उगाकर शंकर सोरेन ने एक खेत से दो फसलों का उत्पादन लेने की कोशिश की है। इस मॉडल में एक तरफ नेनुआ से आमदनी मिलती है, वहीं दूसरी तरफ खाली जमीन में उगाई गई मक्का की फसल अतिरिक्त आय का जरिया बनती है। यही वजह है कि उनका खेती मॉडल किसानों के बीच चर्चा का विषय बन रहा है।
किसानों को क्या सीख मिलती है?
Shankar Soren Farming Success Story in Jharkhand किसानों को यह सीख देती है कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करके खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है। खेत में खाली बचने वाली जमीन को दूसरी उपयुक्त फसल के लिए इस्तेमाल करना एक ऐसा तरीका हो सकता है, जिससे कुल उत्पादन बढ़ाने की संभावना बनती है। शंकर सोरेन ने नेनुआ और मक्का को एक साथ उगाकर यह दिखाने की कोशिश की है कि फसल संयोजन और स्मार्ट खेती के जरिए किसान अपनी आय के नए रास्ते तलाश सकते हैं।
हालांकि इस तरह की खेती शुरू करने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना और अपने क्षेत्र के बाजार का आकलन करना बेहतर रहेगा। Shankar Soren Farming Success Story in Jharkhand उन किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है, जो अपनी मौजूदा जमीन से अधिक उत्पादन और आमदनी हासिल करना चाहते हैं। नेनुआ की मचान खेती के साथ मक्का को शामिल करने का उनका प्रयोग खेती में उपलब्ध हर इंच जमीन के बेहतर इस्तेमाल की सोच को सामने रखता है।

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