बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों के लिए Varsha Aadharit Kshetra Vikas Yojana आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण विकल्प बन रही है। इस योजना के तहत किसानों को सिर्फ एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय खेती के साथ पशुपालन, मछली पालन, बागवानी और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इससे किसानों के लिए आय के कई स्रोत तैयार हो सकते हैं और मौसम से जुड़े जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।
वर्ष 2014-15 से संचालित इस कार्यक्रम का उद्देश्य वर्षा आधारित क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों की आमदनी बढ़ाना और उन्हें मौसम के उतार-चढ़ाव से होने वाले नुकसान से बचाना है। योजना के तहत किसानों को एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाने के लिए आर्थिक सहायता के साथ प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
Varsha Aadharit Kshetra Vikas Yojana का क्या है उद्देश्य?
Varsha Aadharit Kshetra Vikas Yojana का मुख्य उद्देश्य बारिश पर निर्भर कृषि क्षेत्रों में किसानों की आय को बढ़ाना और खेती को अधिक टिकाऊ बनाना है। बारिश की अनिश्चितता के कारण इन क्षेत्रों में किसानों को कई बार फसल खराब होने का जोखिम रहता है। ऐसे में एकीकृत खेती किसानों के लिए आय के वैकल्पिक स्रोत तैयार करने में मदद करती है। इस मॉडल में किसान फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, बागवानी, मछली पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियां जोड़ सकते हैं। किसी एक गतिविधि में नुकसान होने पर दूसरी गतिविधियों से आमदनी प्राप्त होने की संभावना बनी रहती है।
एक खेत में कई गतिविधियों को दिया जाता है बढ़ावा
Varsha Aadharit Kshetra Vikas Yojana के तहत किसानों को एक ही कृषि क्षेत्र में अलग-अलग फसलों और कृषि आधारित गतिविधियों को जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसमें मल्टी-क्रॉपिंग यानी एक से अधिक फसलों की खेती, क्रॉप रोटेशन, इंटर-क्रॉपिंग और मिक्स्ड क्रॉपिंग जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जाता है। एकीकृत खेती से किसान उपलब्ध जमीन, पानी और अन्य संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके साथ ही खेती के अलावा पशुपालन, बागवानी या मधुमक्खी पालन से अतिरिक्त आमदनी का रास्ता भी तैयार किया जा सकता है।
20 हेक्टेयर के क्लस्टर में तैयार होता है मॉडल
Varsha Aadharit Kshetra Vikas Yojana को क्लस्टर आधारित तरीके से लागू किया जाता है। इसके तहत एक या एक से अधिक आसपास के गांवों को मिलाकर करीब 20 हेक्टेयर क्षेत्र का क्लस्टर तैयार किया जाता है। इस क्लस्टर में स्थानीय मिट्टी, जलवायु, पानी की उपलब्धता और किसानों की जरूरत के अनुसार एकीकृत कृषि प्रणाली का मॉडल विकसित किया जाता है। क्लस्टर व्यवस्था से किसानों को सामूहिक रूप से नई कृषि तकनीकों को अपनाने और सफल मॉडल को दूसरे किसानों तक पहुंचाने में मदद मिलती है। इसके अलावा अलग-अलग सरकारी योजनाओं को एक साथ जोड़कर किसानों तक लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है।
किसान परिवार को 30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता
Varsha Aadharit Kshetra Vikas Yojana के तहत एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाने वाले किसान परिवारों को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। प्रति किसान परिवार 30 हजार रुपये की सहायता दी जाती है। इस राशि का इस्तेमाल किसान एकीकृत कृषि प्रणाली से जुड़ी आवश्यक गतिविधियों को शुरू करने में कर सकते हैं। इसके अलावा प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण से संबंधित गतिविधियों के लिए प्रत्येक क्लस्टर को 10 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाती है। योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि किसानों को नई तकनीक और बेहतर कृषि प्रबंधन की जानकारी देकर उनकी क्षमता बढ़ाना भी है।
15.73 लाख किसानों को मिल चुका है लाभ
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कार्यक्रम की शुरुआत से दिसंबर 2025 तक राज्यों को एकीकृत कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए 2,251.98 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता दी जा चुकी है। Varsha Aadharit Kshetra Vikas Yojana के तहत करीब 9.53 लाख हेक्टेयर भूमि को शामिल किया गया है और लगभग 15.73 लाख किसानों को लाभ मिला है। योजना के माध्यम से बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों को कृषि के साथ अतिरिक्त गतिविधियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे किसानों के लिए आय के नए स्रोत विकसित करने और केवल एक फसल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
KVK किसानों को दे रहे एकीकृत खेती की ट्रेनिंग
Varsha Aadharit Kshetra Vikas Yojana को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने में कृषि विज्ञान केंद्र यानी KVK की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। KVK किसानों को उनके क्षेत्र की जलवायु और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल की जानकारी और प्रशिक्षण देते हैं। वर्ष 2024-25 में KVK की ओर से 4,416 प्रदर्शन किए गए और विभिन्न एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल पर 96,013 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। इन प्रशिक्षणों का उद्देश्य किसानों को खेती के साथ दूसरी कृषि आधारित गतिविधियों को जोड़ने की जानकारी देना है।
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2025-26 में 343.86 करोड़ रुपये का आवंटन
Varsha Aadharit Kshetra Vikas Yojana के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कार्यक्रम लागू करने के लिए 343.86 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस योजना के जरिए बारिश पर निर्भर किसानों को फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, बागवानी, मछली पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। एकीकृत कृषि मॉडल किसानों को उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और आय के विभिन्न स्रोत तैयार करने में मदद कर सकता है।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?
बारिश पर निर्भर खेती में मौसम की अनिश्चितता किसानों के लिए बड़ी चुनौती होती है। यदि किसान केवल एक फसल पर निर्भर रहता है, तो बारिश कम या अधिक होने की स्थिति में उसकी पूरी आय प्रभावित हो सकती है। Varsha Aadharit Kshetra Vikas Yojana इसी जोखिम को कम करने के लिए खेती के साथ दूसरी गतिविधियों को जोड़ने पर जोर देती है। इससे किसान फसल उत्पादन के अलावा पशुपालन, बागवानी, मछली पालन या मधुमक्खी पालन से भी आमदनी प्राप्त करने की कोशिश कर सकते हैं। इस तरह एकीकृत कृषि प्रणाली किसानों के लिए आय के कई विकल्प तैयार करने और वर्षा आधारित क्षेत्रों में खेती को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में उपयोगी कदम साबित हो सकती है।
