वैश्विक तनाव से यूरिया और DAP की बढती कीमतों से , बुवाई से पहले बढ़ी भारत की चिंता Veshvik tanav se urea or DAP ki badhti kimato se, buvai se pahle badhi bharat ki chinta

वैश्विक तनाव से यूरिया और DAP की बढती कीमतों से , बुवाई से पहले बढ़ी भारत की चिंता Veshvik tanav se urea or DAP ki badhti kimato se, buvai se pahle badhi bharat ki chinta

भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए यह स्थिति चिंताजनक मानी जा रही है, क्योंकि आने वाले महीनों में बुवाई का मौसम शुरू होने वाली है. ऐसे समय में उर्वरकों की कीमतों का बढ़ जाना किसानों और सरकार दोनों के लिए चुनौती बन सकता है.

दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब खेती से जुड़ी चीजों पर भी दिखाई देने लगा है. खासतौर पर यूरिया और डीएपी जैसे प्रमख खाद की कीमतों में तेजी बताई जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण खाद की लागत तेजी से बढ़ रही है.

दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब खेती से जुड़ी चीजों पर भी दिखाई देने लगा है. खासतौर पर यूरिया और डीएपी जैसे प्रमुख उर्वरकों की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण खाद की कीमत तेजी से बढ़ रही है.Veshvik tanav se urea or DAP ki badhti kimato se, buvai se pahle badhi bharat ki chinta

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1000 डॉलर प्रति टन तक पहुंच सकती है कीमत

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, उर्वरक उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि डीएपी की कीमत जल्द ही 1,000 डॉलर प्रति टन तक पहुंच सकती है. पिछले सप्ताह तक डीएपी की कीमत लगभग 850 डॉलर प्रति टन के करीब थी, लेकिन वैश्विक तनाव और आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण इसमें तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. हालांकि यूरिया की कीमत को 1,000 डॉलर प्रति टन तक पहुंचने में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन बाजार के संकेत बताते हैं कि इसकी कीमतें भी तेजी से ऊपर जा सकती हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार , हाल ही में मिस्र ने यूरिया की खरीद लगभग 492 डॉलर प्रति टन की दर से तय की थी. लेकिन जैसे ही अमेरिका और इजरायल के गठबंधन द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की खबर सामने आई, बाजार में अचानक से उछाल आ गया और यूरिया की कीमत करीब 530 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई. इसी तरह 19 फरवरी के आसपास मिस्र ने डीएपी की खरीद करीब 750 डॉलर प्रति टन की दर से तय की थी.

आयात पर निर्भरता से बढ़ी चिंता

खाद बाजार की एक खास बात यह भी है कि इनकी कीमतें किसी बड़े कमोडिटी एक्सचेंज पर तय नहीं होतीं. इसके बजाय आपूर्ति करने वाले देश और कंपनियां मांग और उपलब्धता के आधार पर कीमत तय करती हैं.

इतिहास बताता है कि वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमत पहले भी 2022 की शुरुआत में 1,000 डॉलर प्रति टन से ऊपर जा चुकी है और 2021 में यह 900 डॉलर प्रति टन से अधिक रही थी.

भारत में बढ़ रही मांग और घट रहा उत्पादन

फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) के आंकड़े बताते हैं कि देश में यूरिया की मांग लगातार बढ़ रही है. अप्रैल से दिसंबर 2025-26 के बीच भारत में यूरिया की बिक्री 3.8% बढ़कर 31.16 मिलियन टन तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 30.02 मिलियन टन थी. इसके विपरीत घरेलू उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है. इसी अवधि में भारत में यूरिया का उत्पादन लगभग 3% घटकर 22.44 मिलियन टन रह गया. इस अंतर को पूरा करने के लिए भारत को ज्यादा मात्रा में यूरिया लाना पड़ा. आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान यूरिया का आयात 85.3% से बढ़कर लगभग 8 मिलियन टन तक पहुंच गया.

सरकार को दखल देना पड़ा

2024-25 में यूरिया का आयात करीब 20% घटकर 5.65 मिलियन टन रह गया था, जबकि 2023-24 में यह 7.04 मिलियन टन था. लेकिन बाद में जब कई राज्यों से कमी की शिकायतें आने लगीं तो सितंबर में सरकार ने बड़े पैमाने पर आयात करने का फैसला किया और संबंधित एजेंसियों को क्रमिक रूप से टेंडर जारी करने के निर्देश दिए.

होर्मुज जलडमरूमध्य से बढ़ा जोखिम

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने उर्वरक बाजार को और अस्थिर बना दिया है. खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. कतर भारत को हर साल लगभग 27 मिलियन टन LNG की आपूर्ति करता है, जो भारत की कुल LNG आयात का लगभग 40% है. लेकिन हाल ही में कतर के कुछ ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले के बाद उत्पादन प्रभावित हुआ है. इसके अलावा ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की खबरों ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है. भारत को मिलने वाली लगभग 55% LNG इसी समुद्री रास्ते से होकर आती है.

डेनमार्क की प्रमुख लॉजिस्टिक्स कंपनी मर्स्क (Maersk), जो वैश्विक कंटेनर व्यापार का करीब 15 से 20 प्रतिशत संभालती है, ने भी इस क्षेत्र में अपने संचालन को अनिश्चितकाल के लिए रोकने की घोषणा कर दी हैVeshvik tanav se urea or DAP ki badhti kimato se, buvai se pahle badhi bharat ki chinta

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कृषि व्यापार पर असर की आशंका

इंडियन माइक्रो फर्टिलाइजर्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IMMA) के अध्यक्ष राहुल मिर्चंदानी का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की बाधा भारत के कृषि व्यापार को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है. उनके मुताबिक यदि इस समुद्री मार्ग में जोखिम बढ़ता है तो खादों सल्फर , फॉस्फोरिक एसिड और अन्य जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति में देरी हो सकती है. इससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा और बीमा प्रीमियम भी महंगा हो सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया में सल्फर का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया में तेल और गैस के प्रसंस्करण से प्राप्त होता है. यदि शिपिंग में बाधा आती है तो सल्फर आधारित उर्वरकों की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं. इसका सीधा असर किसानों की लागत पर पड़ेगा और खेती के मौसम में खाद की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है.

सब्सिडी पर भी बढ़ सकता है दबाव

भारत में किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध कराने के लिए सरकार भारी सब्सिडी देती है. लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने से सरकार के लिए यह बोझ और बढ़ सकता है. वर्तमान बीते वर्ष में फॉस्फेटिक और पोटाश (P&K) उर्वरकों पर सब्सिडी के लिए बजट अनुमान में 49,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसे बाद में संशोधित अनुमान में बढ़ाकर 60,000 करोड़ रुपये कर दिया गया. इसके बावजूद अगले बजट में इस राशि को घटाकर 54,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि भारत इन उर्वरकों के लिए 90% से अधिक आयात पर निर्भर है

इसी तरह यूरिया पर सब्सिडी को भी बीते वर्ष 2027 के लिए 7.6 प्रतिशत घटाकर 1,16,805 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह संशोधित अनुमान के अनुसार 1,26,475 करोड़ रुपये थी.

आने वाले समय में क्या रह सकती है स्थिति

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ सप्ताह उर्वरक बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे. अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होता है और ऊर्जा आपूर्ति सामान्य रहती है तो कीमतों में स्थिरता आ सकती है.

लेकिन यदि हालात लंबे समय तक अस्थिर बने रहते हैं तो यूरिया और डीएपी जैसी जरूरी खादों की कीमतें और बढ़ सकती हैं. इसका सीधा असर भारत के किसानों, कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है.Veshvik tanav se urea or DAP ki badhti kimato se, buvai se pahle badhi bharat ki chinta

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