उड़द की खेती कैसे करें? जानें बुवाई से कटाई तक की पूरी प्रक्रिया

Black Gram Cultivation: उड़द (ब्लैक ग्राम) भारत की प्रमुख दलहनी फसलों में से एक है। इसकी खेती खरीफ, रबी और जायद तीनों मौसमों में की जाती है, हालांकि खरीफ सीजन में इसका सबसे अधिक उत्पादन होता है। उड़द की फसल कम लागत में अच्छी आय देने वाली फसल मानी जाती है। यदि किसान उन्नत किस्मों का चयन, समय पर बुवाई और वैज्ञानिक खेती अपनाएं तो प्रति हेक्टेयर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। आइए जानते हैं उड़द की खेती कैसे करें, इसकी पूरी जानकारी। Black Gram Cultivation
उड़द की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी
उड़द की फसल गर्म एवं आर्द्र जलवायु में अच्छी होती है। इसकी अच्छी वृद्धि के लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त माना जाता है।
मिट्टी की बात करें तो अच्छी जल निकासी वाली दोमट, बलुई दोमट और मध्यम काली मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है। मिट्टी का pH 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। जलभराव वाली भूमि में उड़द की खेती नहीं करनी चाहिए। Black Gram Cultivation
खेत की तैयारी कैसे करें?
अच्छी पैदावार के लिए खेत की सही तैयारी जरूरी है।
- सबसे पहले 1 से 2 गहरी जुताई करें।
- इसके बाद 2 से 3 बार कल्टीवेटर या देशी हल चलाकर मिट्टी भुरभुरी करें।
- पाटा लगाकर खेत को समतल कर दें।
- खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें। Black Gram Cultivation

उड़द की उन्नत किस्में
अधिक उत्पादन के लिए प्रमाणित एवं उन्नत किस्मों का चयन करें।
प्रमुख किस्में
- PU-31
- Pant U-31
- Pant U-35
- LBG-752
- TAU-1
- IPU-94-1
- Uttara
- Shekhar-2
अपने क्षेत्र के अनुसार कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित किस्मों का चयन करें। Black Gram Cultivation
बीज का चयन और बीज उपचार
बुवाई के लिए प्रमाणित एवं स्वस्थ बीज का उपयोग करें।
- बीज दर सामान्यतः 15 से 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रहती है।
- बुवाई से पहले बीज को अनुशंसित फफूंदनाशी से उपचारित करें।
- इसके बाद राइजोबियम एवं पीएसबी (PSB) कल्चर से बीज उपचार करने पर जड़ों में गांठें अच्छी बनती हैं और उत्पादन बढ़ता है।
उड़द की बुवाई का सही समय
खरीफ मौसम
- जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के मध्य तक।

रबी मौसम
- सितंबर के अंत से अक्टूबर तक (सिंचित क्षेत्रों में)।
जायद मौसम
- फरवरी से मार्च।
समय पर बुवाई करने से पौधों का विकास अच्छा होता है और रोगों का प्रकोप भी कम रहता है।
बुवाई की सही विधि और बीज दर
- कतार से कतार की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर रखें।
- पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखें।
- बीज को 4 से 5 सेंटीमीटर गहराई पर बोएं।
- सीड ड्रिल या देसी हल से बुवाई करना बेहतर रहता है।
सिंचाई प्रबंधन
खरीफ मौसम में सामान्यतः वर्षा पर्याप्त होती है, फिर भी आवश्यकता पड़ने पर सिंचाई करें।
- फूल आने के समय नमी बनाए रखें।
- फली बनने के समय पानी की कमी नहीं होनी चाहिए।
- जलभराव से बचाव करें क्योंकि इससे जड़ गलन की समस्या हो सकती है। Black Gram Cultivation
खाद एवं उर्वरक प्रबंधन
मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करना सबसे अच्छा रहता है।
सामान्य रूप से—
- 5 से 10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर।
- नाइट्रोजन 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर।
- फास्फोरस 40 से 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर।
- पोटाश 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर (आवश्यकता अनुसार)।
जैविक खाद के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है। Black Gram Cultivation
खरपतवार नियंत्रण
बुवाई के 20 से 25 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई करें।
यदि खरपतवार अधिक हों तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह अनुसार अनुशंसित खरपतवारनाशी का प्रयोग करें। शुरुआती 30 से 40 दिन खरपतवार नियंत्रण के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
उड़द में लगने वाले प्रमुख रोग एवं कीट
प्रमुख रोग
- येलो मोजैक वायरस (पीला मोजैक)
- पत्ती धब्बा रोग
- जड़ गलन
प्रमुख कीट
- सफेद मक्खी
- माहू (एफिड)
- फली छेदक कीट
- थ्रिप्स
रोग एवं कीट दिखाई देने पर कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित दवा का ही प्रयोग करें। Black Gram Cultivation
फसल की देखभाल
- खेत में जलभराव न होने दें।
- समय पर खरपतवार नियंत्रण करें।
- संतुलित उर्वरकों का उपयोग करें।
- रोग और कीट की नियमित निगरानी करें।
- आवश्यकता अनुसार सिंचाई करें।
उड़द की कटाई और भंडारण
उड़द की फसल सामान्यतः 70 से 100 दिन में तैयार हो जाती है।
जब लगभग 80 प्रतिशत फलियां काली होकर पक जाएं, तब कटाई करनी चाहिए। कटाई के बाद फसल को अच्छी तरह सुखाकर दानों को निकालें और सूखी जगह पर भंडारण करें।
उड़द की खेती में लागत और संभावित उत्पादन
उन्नत तकनीक अपनाने पर उड़द की औसत पैदावार 10 से 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त की जा सकती है। सिंचित क्षेत्रों और अच्छी प्रबंधन तकनीक के साथ कई किसान इससे अधिक उत्पादन भी प्राप्त करते हैं। उत्पादन मिट्टी, मौसम, किस्म और फसल प्रबंधन पर निर्भर करता है। Black Gram Cultivation
किसानों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
- हमेशा प्रमाणित बीज का ही उपयोग करें।
- बुवाई से पहले बीज उपचार अवश्य करें।
- समय पर बुवाई करें।
- खेत में जलभराव न होने दें।
- राइजोबियम कल्चर का उपयोग करें।
- रोग और कीट का समय पर नियंत्रण करें।
- संतुलित मात्रा में खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग करें।
निष्कर्ष
उड़द की खेती कम लागत में अधिक लाभ देने वाली दलहनी फसल है। यदि किसान उन्नत किस्मों का चयन, बीज उपचार, संतुलित पोषण, समय पर बुवाई, खरपतवार नियंत्रण और रोग-कीट प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें, तो अच्छी गुणवत्ता के साथ अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। वैज्ञानिक खेती अपनाकर उड़द की फसल से बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है।
