खरीफ में खेती के लिए बेस्ट है रागी की VL-400 वैरायटी, जानें बीज की कीमत, खासियत और खेती का पूरा तरीका Best Ragi Variety VL 400 for Kharif Season

खरीफ में खेती के लिए बेस्ट है रागी की VL-400 वैरायटी, जानें बीज की कीमत, खासियत और खेती का पूरा तरीका Best Ragi Variety VL 400 for Kharif Season

Best Ragi Variety VL 400 for Kharif Season: देश में मोटे अनाज (श्री अन्न) को बढ़ावा मिलने के बाद रागी (फिंगर मिलेट/मडुआ) की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है। केंद्र और राज्य सरकारें किसानों को मोटे अनाजों की खेती के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही हैं, क्योंकि ये फसलें कम पानी में अच्छी पैदावार देती हैं और जलवायु परिवर्तन के दौर में भी बेहतर प्रदर्शन करती हैं। रागी एक अत्यंत पौष्टिक अनाज है, जिसमें कैल्शियम, आयरन, फाइबर, प्रोटीन और कई आवश्यक खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण रागी से बने आटा, बिस्किट, दलिया और अन्य हेल्दी उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में किसानों के लिए रागी की खेती अच्छी आमदनी का विकल्प बनती जा रही है। यदि आप भी इस खरीफ सीजन में रागी की खेती करना चाहते हैं, तो VL-400 उन्नत किस्म आपके लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। Best Ragi Variety VL 400 for Kharif Season

किसानों को ऑनलाइन मिलेगा प्रमाणित रागी का बीज

रागी की खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) किसानों को प्रमाणित बीज ऑनलाइन उपलब्ध करा रहा है। किसान घर बैठे एनएससी के ऑनलाइन स्टोर से रागी की उन्नत किस्म VL-400 का बीज ऑर्डर कर सकते हैं। प्रमाणित बीज का उपयोग करने से बेहतर अंकुरण, शुद्ध किस्म और अधिक उत्पादन मिलने की संभावना बढ़ जाती है। ऑनलाइन खरीदारी की सुविधा के कारण किसानों को बीज के लिए अलग-अलग बाजारों में भटकने की जरूरत नहीं पड़ती और बीज सीधे उनके घर तक पहुंच जाता है। Best Ragi Variety VL 400 for Kharif Season

VL-400 रागी वैरायटी की क्या हैं खासियत? Best Ragi Variety VL 400 for Kharif Season

VL-400 रागी की एक उन्नत और बायो-फोर्टिफाइड किस्म है, जिसे ICAR-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (VPKAS), अल्मोड़ा द्वारा विकसित किया गया है। यह किस्म अधिक उत्पादन, जल्दी पकने और कई प्रमुख रोगों के प्रति बेहतर प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती है। इसकी फसल लगभग 98 से 102 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान समय पर कटाई कर अगली फसल की तैयारी भी आसानी से कर सकते हैं।

अनुकूल परिस्थितियों में यह किस्म औसतन 30 से 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने की क्षमता रखती है। मजबूत पौधे, अच्छी दाना गुणवत्ता और बेहतर पोषण मूल्य के कारण यह किस्म किसानों के साथ-साथ उपभोक्ताओं के बीच भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। Best Ragi Variety VL 400 for Kharif Season

VL-400 रागी बीज की कीमत कितनी है?

यदि आप इस खरीफ सीजन में VL-400 रागी की खेती करना चाहते हैं, तो राष्ट्रीय बीज निगम के ऑनलाइन स्टोर पर इसका 5 किलोग्राम का पैकेट फिलहाल लगभग 20 प्रतिशत की छूट के साथ 400 रुपये में उपलब्ध है। किसान बीज खरीदने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर इसकी उपलब्धता, कीमत और डिलीवरी से जुड़ी जानकारी जरूर जांच लें, क्योंकि समय-समय पर कीमतों में बदलाव हो सकता है। Best Ragi Variety VL 400 for Kharif Season

रागी की खेती के लिए सही समय और उपयुक्त मिट्टी

रागी खरीफ मौसम की प्रमुख फसल है, जिसकी बुवाई मुख्य रूप से जून से जुलाई के बीच की जाती है। अच्छी पैदावार के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। खेत की मिट्टी में जल निकासी की उचित व्यवस्था होना बेहद जरूरी है, क्योंकि जलभराव होने पर पौधों की जड़ें प्रभावित होती हैं और उत्पादन में कमी आ सकती है।

खेत की तैयारी के दौरान पहली गहरी जुताई करने के बाद 2 से 3 बार हल या कल्टीवेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरी बना लेना चाहिए। अंतिम जुताई के समय गोबर की सड़ी हुई खाद या कम्पोस्ट मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसल का विकास बेहतर होता है। Best Ragi Variety VL 400 for Kharif Season

रागी की बुवाई कैसे करें?

रागी की बुवाई के लिए सीड ड्रिल (ड्रिल विधि) सबसे उपयुक्त मानी जाती है, क्योंकि इससे बीज समान दूरी पर गिरते हैं और अंकुरण अच्छा होता है। जिन किसानों के पास सीड ड्रिल उपलब्ध नहीं है, वे समतल खेत में छिड़काव विधि (ब्रॉडकास्टिंग) से भी बुवाई कर सकते हैं। हालांकि इस विधि में बाद में निराई-गुड़ाई करके पौधों की उचित दूरी बनाए रखना जरूरी होता है। समय पर बुवाई और सही विधि अपनाने से पौधों का विकास अच्छा होता है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है। Best Ragi Variety VL 400 for Kharif Season

सिंचाई और फसल प्रबंधन

रागी ऐसी फसल है जिसे अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती और यह सामान्य वर्षा में भी अच्छी तरह तैयार हो जाती है। हालांकि लंबे समय तक सूखे की स्थिति बनने पर आवश्यकता अनुसार हल्की सिंचाई करनी चाहिए। वहीं खेत में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए, क्योंकि जलभराव से पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं।

बुवाई के लगभग 20 से 25 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई करनी चाहिए और आवश्यकता अनुसार दूसरी निराई भी करें, ताकि खरपतवार नियंत्रण में रहे और पौधों को पर्याप्त पोषण मिल सके। सही पोषण प्रबंधन और समय पर देखभाल से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर होते हैं। Best Ragi Variety VL 400 for Kharif Season

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