Monsoon Rainfall 2026: साल 2026 का दक्षिण-पश्चिम मॉनसून किसानों के लिए किसी रोलर-कोस्टर से कम नहीं रहा। जून महीने में Monsoon Rainfall 2026 पर अल नीनो (El Niño) का असर साफ दिखाई दिया, जिसके कारण देशभर में सामान्य से काफी कम बारिश हुई। नतीजतन खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई, जलाशयों का जलस्तर घटा और कई राज्यों में सूखे जैसे हालात बन गए। हालांकि जुलाई के पहले सप्ताह में मौसम ने अचानक करवट बदली और Monsoon Rainfall 2026 ने जबरदस्त वापसी करते हुए देश के कई हिस्सों में रिकॉर्ड बारिश दर्ज की। इस बारिश ने खेतों में फिर से हरियाली लौटा दी, धान की रोपाई को रफ्तार मिली और किसानों के चेहरों पर दोबारा उम्मीद दिखाई देने लगी।
जून में कमजोर रहा Monsoon Rainfall 2026, खरीफ बुवाई पर पड़ा बड़ा प्रभाव
जून 2026 किसानों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 1 जून से 30 जून 2026 के बीच पूरे देश में केवल 99.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 165.3 मिमी है। यानी जून महीने में लगभग 40 प्रतिशत कम बारिश हुई।
कम वर्षा का सीधा असर खरीफ सीजन पर पड़ा। 29 जून 2026 तक देश में खरीफ फसलों की बुवाई केवल 182.72 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो सकी, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 236.46 लाख हेक्टेयर था। यानी Monsoon Rainfall 2026 की कमजोरी के कारण खरीफ बुवाई में लगभग 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दालों जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ती गई।
अल नीनो के असर से कई राज्यों में बने सूखे जैसे हालात
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जून में अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून की प्रगति काफी धीमी रही। इसका सबसे अधिक असर मध्य और पश्चिम भारत के राज्यों पर देखने को मिला।
17 जून 2026 तक के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार—
- छत्तीसगढ़ में सामान्य से लगभग 65% कम वर्षा दर्ज हुई।
- गुजरात क्षेत्र में लगभग 100% वर्षा की कमी दर्ज की गई।
- मध्य महाराष्ट्र में करीब 99% वर्षा घाटा रहा।
- कई जिलों में जलाशयों का स्तर तेजी से गिर गया।
- धान की नर्सरी और रोपाई का कार्य प्रभावित हुआ।
लगातार कम बारिश के कारण किसानों को बुवाई टालनी पड़ी और कई स्थानों पर दोबारा खेत तैयार करने की स्थिति बन गई।
उत्तर प्रदेश और बिहार में भी बढ़ी किसानों की चिंता
देश के सबसे बड़े कृषि राज्यों उत्तर प्रदेश और बिहार भी Monsoon Rainfall 2026 की कमजोरी से अछूते नहीं रहे।
जून के अंत तक—
- उत्तर प्रदेश में सामान्य 95.9 मिमी के मुकाबले केवल 47.6 मिमी वर्षा हुई, जो लगभग 50 प्रतिशत कम थी।
- बिहार में सामान्य 163.3 मिमी के मुकाबले केवल 87.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई, यानी लगभग 47 प्रतिशत की कमी रही।
इन दोनों राज्यों में धान की खेती पूरी तरह मानसूनी बारिश पर निर्भर रहती है। ऐसे में कम वर्षा के कारण धान की रोपाई प्रभावित हुई और किसानों को सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ा।
जुलाई के पहले सप्ताह में Monsoon Rainfall 2026 ने लिया बड़ा यू-टर्न
जून की निराशा के बाद जुलाई के पहले सप्ताह में मौसम ने पूरी तस्वीर बदल दी। 1 जुलाई से 8 जुलाई 2026 के बीच देश के कई हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई। इस दौरान Monsoon Rainfall 2026 ने कई राज्यों में सामान्य से कहीं अधिक वर्षा दी, जिससे सूखे जैसे हालात तेजी से खत्म होने लगे। खेतों में पर्याप्त नमी पहुंची और खरीफ फसलों की बुवाई दोबारा गति पकड़ने लगी।
गुजरात और महाराष्ट्र में रिकॉर्ड बारिश से बदली खेती की तस्वीर
जुलाई के पहले सप्ताह में पश्चिम भारत सबसे अधिक लाभान्वित हुआ।
साप्ताहिक वर्षा आंकड़ों के अनुसार—
- मध्य महाराष्ट्र में सामान्य से लगभग 266 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई।
- गुजरात क्षेत्र में लगभग 156 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई।
- सौराष्ट्र एवं कच्छ में करीब 158 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई।
- कोंकण और गोवा क्षेत्र में लगभग 108 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज हुई।
यह वही क्षेत्र थे जहां जून के दौरान पानी की भारी कमी देखी जा रही थी। जुलाई की बारिश ने जलाशयों, तालाबों और खेतों को फिर से भर दिया।
मध्य प्रदेश में भी सामान्य हुई बारिश
मध्य प्रदेश में भी Monsoon Rainfall 2026 ने राहत पहुंचाई।
- पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से लगभग 90 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई।
- पूर्वी मध्य प्रदेश में भी वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो गई और सामान्य स्तर के आसपास पहुंच गई।
इसका लाभ सोयाबीन, मक्का और धान जैसी खरीफ फसलों को मिलने की संभावना है।
धान उत्पादक राज्यों में तेज हुई रोपाई
जुलाई की बारिश का सबसे अधिक फायदा उन राज्यों को मिला जहां धान प्रमुख खरीफ फसल है।
छत्तीसगढ़
देश के “धान के कटोरे” कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में जून के अंतिम सप्ताह तक लगभग 67 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई थी। लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में यहां 100 प्रतिशत के आसपास सामान्य वर्षा दर्ज होने से खेतों में पर्याप्त पानी पहुंच गया और धान की रोपाई तेजी से शुरू हो गई।
उत्तर प्रदेश
पूर्वी उत्तर प्रदेश में वर्षा घाटा काफी कम हुआ और स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी सामान्य से बेहतर वर्षा दर्ज होने से किसानों को राहत मिली।
बिहार
हालांकि बिहार के कुछ हिस्सों में अभी भी वर्षा की कमी बनी हुई है, लेकिन जुलाई की शुरुआती बारिश ने खेतों में पर्याप्त नमी उपलब्ध कराई है, जिससे धान की रोपाई दोबारा शुरू हो गई है।
खरीफ फसलों की बुवाई में आएगी तेजी
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के दौरान यदि Monsoon Rainfall 2026 सामान्य बना रहता है तो खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने की संभावना है।
विशेष रूप से इन फसलों को लाभ मिलेगा—
- धान
- मक्का
- सोयाबीन
- बाजरा
- मूंग
- उड़द
- कपास
समय पर पर्याप्त वर्षा मिलने से फसल की शुरुआती वृद्धि बेहतर होगी और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
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किसानों को राहत, लेकिन जलभराव से सावधानी जरूरी
भारी वर्षा जहां अधिकांश किसानों के लिए राहत लेकर आई है, वहीं कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश के कारण जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियां भी बनी हैं।
कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि—
- खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी सुनिश्चित करें।
- धान के अलावा अन्य खरीफ फसलों में जलभराव न होने दें।
- उर्वरकों का प्रयोग वर्षा रुकने के बाद करें।
- फसल में रोग एवं कीट प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें।
- मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर रखें।
कृषि अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई की शुरुआत में हुई अच्छी बारिश भारतीय कृषि के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। यदि आगामी सप्ताहों में Monsoon Rainfall 2026 सामान्य बना रहता है तो खरीफ उत्पादन में सुधार हो सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ खाद्यान्न उत्पादन और देश की खाद्य सुरक्षा को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
मौसम विशेषज्ञों की राय
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि Monsoon Rainfall 2026 ने जून की भारी कमी की भरपाई करने की दिशा में मजबूत शुरुआत की है। हालांकि मानसून का प्रदर्शन पूरे सीजन के आधार पर ही आंका जाएगा। यदि जुलाई और अगस्त में भी अच्छी बारिश जारी रहती है तो खरीफ सीजन सामान्य रहने की उम्मीद बढ़ जाएगी। फिलहाल जुलाई के पहले सप्ताह की रिकॉर्ड वर्षा ने किसानों की चिंता काफी हद तक कम कर दी है और देश के अधिकांश कृषि क्षेत्रों में खेती का काम फिर से पूरी रफ्तार पकड़ चुका है। Monsoon Rainfall 2026
