महाराष्ट्र में लगातार हो रही मॉनसूनी बारिश के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने किसानों के लिए नए IMD फसल टिप्स जारी किए हैं। कोंकण, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ के किसानों को धान, रागी, सोयाबीन, कपास, अरहर, मूंगफली और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई, रोपाई, जल निकासी और फसल सुरक्षा को लेकर जरूरी सलाह दी गई है।
मौसम विभाग का कहना है कि जहां अत्यधिक बारिश हो रही है, वहां नई बुवाई से बचना चाहिए, जबकि पर्याप्त वर्षा वाले क्षेत्रों में मिट्टी में उचित नमी बनने के बाद ही बुवाई करना बेहतर रहेगा।
कोंकण में नई बुवाई टालने की सलाह
भारी से बहुत भारी बारिश को देखते हुए IMD फसल टिप्स के अनुसार कोंकण क्षेत्र के किसानों को धान, रागी और सब्जियों की नई नर्सरी तैयार नहीं करनी चाहिए। यदि पहले से नर्सरी तैयार है तो उसमें जमा अतिरिक्त पानी तुरंत निकाल दें ताकि पौधों की जड़ों को नुकसान न पहुंचे।मूंगफली और कद्दू वर्गीय सब्जियों जैसे खीरा, ककड़ी, करेला, लौकी, तोरई, चिचिंडा, नेनुआ और लाल कद्दू की बुवाई भी फिलहाल टालने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा आम, नारियल, काजू और सुपारी के नए बाग लगाने का कार्य भी मौसम सामान्य होने तक स्थगित रखने को कहा गया है।धान और रागी की नर्सरी में इस समय खाद और रासायनिक दवाओं का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि लगातार बारिश के कारण उनका प्रभाव कम हो सकता है।
धान की रोपाई करते समय इन बातों का रखें ध्यान
सिंधुदुर्ग और रत्नागिरी जिलों में जहां बारिश कम हो, वहां 21 से 27 दिन पुराने धान के पौधों की रोपाई की जा सकती है। IMD फसल टिप्स के अनुसार रोपाई के बाद खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था जरूर करें ताकि जलभराव से पौधों की वृद्धि प्रभावित न हो।
मध्य महाराष्ट्र में किन खरीफ फसलों की करें बुवाई
मध्य महाराष्ट्र के जिन क्षेत्रों में 80 से 100 मिमी तक बारिश दर्ज की गई है, वहां किसान कपास, सोयाबीन, अरहर, उड़द, मूंग, बाजरा, मूंगफली और मक्का जैसी खरीफ फसलों की बुवाई कर सकते हैं।
वहीं जिन इलाकों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, वहां खेत तैयार करने का कार्य जारी रखें और जल्दबाजी में बुवाई न करें। ऐसे क्षेत्रों में कम अवधि में तैयार होने वाली फसल किस्मों को प्राथमिकता देना अधिक लाभदायक रहेगा। यह सलाह भी IMD फसल टिप्स का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सब्जियों और फलों की जल्द करें कटाई
लगातार बारिश के कारण तैयार सब्जियां और फल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए IMD फसल टिप्स के अनुसार किसान तैयार उपज की जल्द कटाई करें और उसे सुरक्षित व सूखी जगह पर भंडारित करें।केले की खेती करने वाले किसान पौधों को मजबूत सहारा दें ताकि तेज हवा और बारिश के दौरान पौधे गिरने से बच सकें।
मराठवाड़ा के किसानों के लिए जरूरी सलाह
मराठवाड़ा में बिजली गिरने, तेज हवा और भारी बारिश की संभावना को देखते हुए किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।जिन क्षेत्रों में पिछले तीन से पांच दिनों के दौरान 75 से 100 मिमी तक वर्षा हो चुकी है, वहां कपास, अरहर, उड़द, मूंग, मूंगफली और मक्का की बुवाई जारी रखी जा सकती है।यदि पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है तो किसान बुवाई में जल्दबाजी न करें। पर्याप्त नमी बनने के बाद ही खेतों में बीज डालें।
जहां खेतों में पर्याप्त नमी उपलब्ध है वहां भिंडी, करेला, तोरई और कद्दू जैसी सब्जियों की सीधी बुवाई की जा सकती है। वहीं अच्छी वर्षा वाले क्षेत्रों में बैंगन, टमाटर और मिर्च के लगभग 45 दिन पुराने पौधों की रोपाई की जा सकती है।
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गन्ने की फसल में पाइरिला कीट से बचाव
लगातार बादल छाए रहने के कारण गन्ने की फसल में पाइरिला कीट का प्रकोप बढ़ सकता है। IMD फसल टिप्स के अनुसार मौसम साफ होने पर 5 प्रतिशत NSKE (नीम बीज अर्क) का छिड़काव करने से इस कीट का प्रभाव कम किया जा सकता है।समय पर कीट नियंत्रण अपनाने से गन्ने की उपज और गुणवत्ता दोनों सुरक्षित रहती हैं।
विदर्भ के किसानों के लिए क्या हैं IMD फसल टिप्स
विदर्भ में भारी बारिश, तेज हवा, आंधी और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए किसानों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत है। IMD फसल टिप्स के अनुसार सब्जियों और फलों की जल्द कटाई करें तथा सुरक्षित स्थान पर उनका भंडारण करें।सब्जियों की नर्सरी और बागों से अतिरिक्त पानी निकालें। नए लगाए गए पौधों को मजबूत सहारा दें ताकि तेज हवा से नुकसान न हो।
जिन क्षेत्रों में 75 से 100 मिमी तक अच्छी बारिश हो चुकी है, वहां मौसम साफ होने और मिट्टी में वापसा स्थिति बनने के बाद सोयाबीन, कपास, अरहर, उड़द, मूंग और ज्वार जैसी खरीफ फसलों की बुवाई की जा सकती है।
भारी बारिश में किसानों के लिए जरूरी सावधानियां
लगातार बारिश के दौरान खेतों में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए क्योंकि इससे जड़ों में सड़न और रोग बढ़ सकते हैं। नई बुवाई तभी करें जब खेत में पर्याप्त नमी हो और जलभराव समाप्त हो चुका हो।किसान नियमित रूप से मौसम विभाग की जानकारी पर नजर रखें, तैयार फसल की समय पर कटाई करें और तेज हवा वाले क्षेत्रों में पौधों को सहारा देना न भूलें। IMD फसल टिप्स का पालन करने से खरीफ फसलों को भारी बारिश से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
