1056 लाख हेक्टेयर के पार पहुंचा रकबा, कई राज्यों में घटा धान का क्षेत्रफल Kharif Fasal Ki Buwai 2026

1056 लाख हेक्टेयर के पार पहुंचा रकबा, कई राज्यों में घटा धान का क्षेत्रफल Kharif Fasal Ki Buwai 2026

देश में Kharif Fasal Ki Buwai 2026 अब तेजी से पूरी हो रही है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 21 अगस्त 2026 तक देश में 1,056.7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है। यह खरीफ सीजन के सामान्य रकबे 1,104.46 लाख हेक्टेयर का करीब 96 फीसदी है। पिछले साल इसी अवधि में 1,072.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई थी। इस तरह इस साल कुल रकबा पिछले वर्ष की तुलना में करीब 0.3 फीसदी कम है। हालांकि, अगस्त के तीसरे सप्ताह में बुवाई की रफ्तार तेज हुई है। Kharif Fasal Ki Buwai 2026 के दौरान 15 से 21 अगस्त के बीच किसानों ने 40 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसलें बोईं। Kharif Fasal Ki Buwai 2026

Kharif Fasal Ki Buwai 2026 में तेजी से घटा अंतर

इस साल खरीफ फसलों की बुवाई शुरुआत में पिछले वर्ष की तुलना में पीछे चल रही थी, लेकिन अब यह अंतर तेजी से कम हो रहा है। 7 अगस्त तक पिछले साल के मुकाबले बुवाई का अंतर करीब 2 फीसदी था। इसके बाद किसानों ने तेजी से खेतों में बुवाई और रोपाई का काम पूरा किया। पिछले साल 15 से 21 अगस्त के बीच करीब 35 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हुई थी, जबकि इस साल इसी अवधि में 40 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में बुवाई हुई है। इससे Kharif Fasal Ki Buwai 2026 की कुल स्थिति में सुधार हुआ है।

धान की बुवाई का रकबा 3.2 फीसदी घटा

खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान की बुवाई का रकबा इस साल पिछले वर्ष की तुलना में कम है। 21 अगस्त तक देश में 405.10 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई है। पिछले साल इसी अवधि में धान का रकबा 418.29 लाख हेक्टेयर था। इस हिसाब से धान का क्षेत्रफल करीब 3.2 फीसदी कम है। हालांकि, 7 अगस्त तक धान के रकबे में करीब 4.4 फीसदी की कमी थी।

पिछले दो सप्ताह में धान की रोपाई तेज होने के कारण यह अंतर घटकर 3.2 फीसदी रह गया है। Kharif Fasal Ki Buwai 2026 के तहत सरकार ने खरीफ सीजन में 12.315 करोड़ टन चावल उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में धान की रोपाई और अंतिम रकबे पर किसानों और सरकार की नजर रहेगी।

इन राज्यों में घटा धान का रकबा

धान की खेती के रकबे में कई राज्यों में कमी दर्ज की गई है। कर्नाटक में धान का क्षेत्रफल 3.09 लाख हेक्टेयर, तेलंगाना में 2.45 लाख हेक्टेयर और झारखंड में 1.88 लाख हेक्टेयर घटा है। इसके अलावा मध्य प्रदेश में 1.75 लाख हेक्टेयर, ओडिशा में 1.63 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 1.50 लाख हेक्टेयर, आंध्र प्रदेश में 1.26 लाख हेक्टेयर और तमिलनाडु में 1.18 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज हुई है। उत्तर प्रदेश में धान का रकबा 0.70 लाख हेक्टेयर और गुजरात में 0.27 लाख हेक्टेयर घटा है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि Kharif Fasal Ki Buwai 2026 में फसलवार और राज्यवार स्थिति एक जैसी नहीं रही है।

दलहन की बुवाई में हुआ इजाफा

खरीफ सीजन में दलहन की बुवाई का रकबा पिछले साल की तुलना में बढ़ा है। 21 अगस्त तक दलहन की बुवाई 113.63 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह रकबा 112.14 लाख हेक्टेयर था। दलहन में अरहर की बुवाई 43.44 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 43.86 लाख हेक्टेयर हो गई है। उड़द का रकबा भी 21.72 लाख से बढ़कर 24.38 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। हालांकि, मूंग की बुवाई में कमी आई है। मूंग का रकबा 33.93 लाख हेक्टेयर से घटकर 32.68 लाख हेक्टेयर रह गया है। Kharif Fasal Ki Buwai 2026 में दलहन का बढ़ता रकबा कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।

तिलहन में मामूली गिरावट, मूंगफली का रकबा बढ़ा

तिलहन फसलों की कुल बुवाई में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। 21 अगस्त तक तिलहन का रकबा 188.37 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 188.69 लाख हेक्टेयर था। सोयाबीन की बुवाई 122.76 लाख हेक्टेयर से घटकर 121.35 लाख हेक्टेयर रह गई है। वहीं, मूंगफली का रकबा 48.22 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 48.79 लाख हेक्टेयर हो गया है। सरकार ने इस खरीफ सीजन में कुल 2.892 करोड़ टन तिलहन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें सोयाबीन के लिए 1.485 करोड़ टन और मूंगफली के लिए 1.135 करोड़ टन उत्पादन लक्ष्य शामिल है।

मोटे अनाज का रकबा 1.9 फीसदी घटा

Kharif Fasal Ki Buwai 2026 के दौरान मोटे अनाज के क्षेत्रफल में भी कमी दर्ज की गई है। 21 अगस्त तक मोटे अनाज की बुवाई 176.36 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 179.81 लाख हेक्टेयर था। ज्वार और बाजरा की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, जबकि रागी और मक्का का रकबा घटा है। मक्का की बुवाई 93.30 लाख हेक्टेयर से घटकर 89.51 लाख हेक्टेयर रह गई है। मोटे अनाज की बुवाई में यह बदलाव किसानों की फसल पसंद और अलग-अलग राज्यों में मौसम तथा खेती की परिस्थितियों से भी जुड़ा हो सकता है।

कपास की बुवाई भी पिछले साल से कम

खरीफ सीजन की प्रमुख नकदी फसल कपास का रकबा भी इस साल थोड़ा कम हुआ है। 21 अगस्त तक कपास की बुवाई 108.45 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल इसी अवधि में यह रकबा 108.73 लाख हेक्टेयर था। इस तरह कपास के क्षेत्रफल में मामूली कमी आई है। Kharif Fasal Ki Buwai 2026 में कपास का रकबा भले ही थोड़ा कम रहा हो, लेकिन यह अंतर बहुत ज्यादा नहीं है। वहीं, जूट और मेस्ता का रकबा 6.23 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 6.34 लाख हेक्टेयर हो गया है।

गन्ने की बुवाई का रकबा भी घटा

गन्ने की खेती का कुल रकबा भी पिछले साल की तुलना में थोड़ा कम है। 21 अगस्त तक गन्ने की बुवाई 58.44 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 58.87 लाख हेक्टेयर थी। गन्ने के रकबे में सबसे ज्यादा कमी बिहार में 0.30 लाख हेक्टेयर, उत्तराखंड में 0.20 लाख हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 0.14 लाख हेक्टेयर दर्ज हुई है। इसके विपरीत उत्तर प्रदेश में गन्ने का रकबा 0.36 लाख हेक्टेयर और हरियाणा में 0.21 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। इससे स्पष्ट है कि Kharif Fasal Ki Buwai 2026 में गन्ने की स्थिति भी राज्यवार अलग-अलग रही है।

खरीफ बुवाई में आगे कैसी रहेगी स्थिति?

21 अगस्त तक देश में खरीफ फसलों का कुल रकबा सामान्य क्षेत्रफल के करीब 96 फीसदी तक पहुंच चुका है। अगस्त के तीसरे सप्ताह में बुवाई की तेज रफ्तार को देखते हुए आने वाले दिनों में यह अंतर और कम होने की उम्मीद है। धान, सोयाबीन, मक्का, कपास और गन्ने जैसी कुछ प्रमुख फसलों के रकबे में कमी आई है, जबकि दलहन और मूंगफली जैसी फसलों में बढ़ोतरी हुई है। कुल मिलाकर Kharif Fasal Ki Buwai 2026 अब अंतिम चरण में पहुंच रही है। आने वाले दिनों में बुवाई के अंतिम आंकड़ों से यह साफ होगा कि खरीफ सीजन में किस फसल का क्षेत्रफल कितना रहा और उत्पादन पर इसका क्या असर पड़ सकता है।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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