खरीफ सीजन के दौरान DAP Fertilizer Shortage एक बार फिर किसानों के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। कई राज्यों में डीएपी और यूरिया की सीमित उपलब्धता के कारण किसान समय पर उर्वरक नहीं खरीद पा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में केवल डीएपी पर निर्भर रहने के बजाय एसएसपी (Single Super Phosphate) और नैनो यूरिया जैसे वैकल्पिक उर्वरकों का उपयोग करना अधिक लाभदायक हो सकता है। ये विकल्प लागत कम करने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद करते हैं।
खरगोन में DAP Fertilizer Shortage के बीच किसान हुए परेशान
मध्य प्रदेश का खरगोन जिला प्रमुख कृषि क्षेत्रों में शामिल है। यहां खरीफ सीजन में लगभग 3.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास, सोयाबीन, मक्का और मिर्च की खेती की जाती है। इस वर्ष करीब 2.10 लाख हेक्टेयर में बीटी कॉटन और लगभग 48 हजार हेक्टेयर में मिर्च की खेती की गई है। बुवाई पूरी होने के बाद किसान फसल की देखभाल में लगे हैं, लेकिन DAP Fertilizer Shortage के कारण उन्हें समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार और सहकारी समितियों में वैकल्पिक उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन अधिकांश किसान अभी भी इनके उपयोग के बारे में पूरी जानकारी नहीं रखते।
SSP है डीएपी का बेहतर और किफायती विकल्प
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) DAP Fertilizer Shortage के दौरान सबसे प्रभावी विकल्पों में से एक माना जाता है। एसएसपी में लगभग 16 प्रतिशत फॉस्फोरस, 11 प्रतिशत सल्फर और कैल्शियम मौजूद होता है, जो पौधों की जड़ों के विकास और बेहतर बढ़वार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एसएसपी में मौजूद सल्फर फसल की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करता है। यही वजह है कि कई कृषि विशेषज्ञ इसे डीएपी की कमी के दौरान अपनाने की सलाह देते हैं।
DAP Fertilizer Shortage में SSP क्यों साबित हो सकता है फायदेमंद
डीएपी की तुलना में एसएसपी का असर धीरे-धीरे दिखाई देता है, लेकिन इसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। यह मिट्टी की संरचना को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है और लगातार उपयोग से मिट्टी को कठोर नहीं होने देता।
कीमत के लिहाज से भी एसएसपी किसानों के लिए राहत देने वाला विकल्प है। जहां डीएपी की एक बोरी सामान्यतः 1350 से 1500 रुपये तक मिलती है, वहीं एसएसपी की एक बोरी लगभग 300 से 400 रुपये में उपलब्ध हो जाती है। ऐसे में DAP Fertilizer Shortage के दौरान किसान कम लागत में बेहतर पोषण प्रबंधन कर सकते हैं।
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केवल डीएपी पर निर्भर रहना सही नहीं
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को केवल डीएपी का उपयोग करने के बजाय संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाना चाहिए। कपास, सोयाबीन और मिर्च जैसी फसलों में एसएसपी के साथ पोटाश और यूरिया का संतुलित उपयोग बेहतर परिणाम देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रति एकड़ लगभग 200 किलोग्राम एसएसपी, 25 किलोग्राम पोटाश और 140 से 150 किलोग्राम यूरिया का उपयोग किया जा सकता है। यूरिया की पूरी मात्रा एक बार में डालने के बजाय इसे चार बराबर भागों में बांटकर अलग-अलग चरणों में देना अधिक लाभदायक माना जाता है।
नैनो यूरिया भी DAP Fertilizer Shortage का मजबूत विकल्प
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार DAP Fertilizer Shortage के समय नैनो यूरिया भी किसानों के लिए अच्छा विकल्प बन सकता है। नैनो यूरिया पौधों को पत्तियों के माध्यम से नाइट्रोजन उपलब्ध कराता है, जिससे पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग होता है।
500 मिलीलीटर नैनो यूरिया की एक बोतल लगभग 45 किलोग्राम पारंपरिक यूरिया के बराबर प्रभाव देने में सक्षम मानी जाती है। इससे परिवहन, भंडारण और श्रम लागत में भी कमी आती है। सही समय पर इसका छिड़काव करने से फसल की बढ़वार और उत्पादन में सुधार देखा जा सकता है।
मिट्टी की सेहत बनाए रखने में SSP की अहम भूमिका
लगातार डीएपी के अधिक उपयोग से मिट्टी में पोषक तत्वों का असंतुलन पैदा हो सकता है। इसके विपरीत एसएसपी मिट्टी में सल्फर और कैल्शियम की उपलब्धता बढ़ाता है तथा मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद करता है। इसलिए DAP Fertilizer Shortage के दौरान ही नहीं बल्कि संतुलित पोषण प्रबंधन के लिए भी एसएसपी का उपयोग उपयोगी माना जाता है।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को क्या सलाह दी
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि किसान घबराने के बजाय स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह लेकर उर्वरकों का चयन करें। डीएपी की कमी होने पर एसएसपी, पोटाश और नैनो यूरिया का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करने से फसल को पर्याप्त पोषण मिल सकता है। संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने से उत्पादन लागत कम करने के साथ अच्छी पैदावार भी प्राप्त की जा सकती है।
