Makka Mein Fall Armyworm Ka Niyantran: मक्का की फसल में इन दिनों फॉल आर्मीवर्म यानी इल्ली का खतरा बढ़ता जा रहा है। यह कीट मक्का के पौधे की गोभ और नई पत्तियों को नुकसान पहुंचाकर उसकी बढ़वार रोक सकता है। समय रहते इसकी पहचान और उचित नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है। ऐसे में किसानों के लिए Makka Mein Fall Armyworm Ka Niyantran करना बेहद जरूरी है।
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, किसानों को इस समय मक्का के खेत की नियमित निगरानी करनी चाहिए। शुरुआती अवस्था में कीट की पहचान होने पर नियंत्रण के उपाय अपनाकर फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। Makka Mein Fall Armyworm Ka Niyantran
मक्का की फसल में बढ़ रहा फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप
मक्का की कई फसलें इस समय 50 दिन या उससे अधिक की हो चुकी हैं। कई जगह पौधों में चौर निकलने लगे हैं, जबकि कुछ खेतों में भुट्टे भी आने शुरू हो गए हैं। फसल की इस अवस्था में फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकता है। यह कीट मुख्य रूप से मक्का के पौधे की गोभ और नई पत्तियों को खाता है।
शुरुआत में पत्तियों पर छोटे छेद और खाने के निशान दिखाई देते हैं। प्रकोप बढ़ने पर पौधे की पत्तियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकती हैं और उसकी सामान्य बढ़वार प्रभावित हो सकती है। इसलिए Makka Mein Fall Armyworm Ka Niyantran समय पर शुरू करना जरूरी है, ताकि कीट की संख्या बढ़ने से पहले ही फसल को सुरक्षित किया जा सके।
फॉल आर्मीवर्म की ऐसे करें पहचान
फॉल आर्मीवर्म की पहचान के लिए किसानों को मक्का के पौधों की नियमित जांच करनी चाहिए। खासकर पौधे की गोभ, नई पत्तियों और आसपास के हिस्से को ध्यान से देखना चाहिए। यदि पत्तियों पर इल्ली के खाने से बने छेद, खुरचने के निशान या गोभ में छोटी इल्ली दिखाई देती है तो खेत में फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप हो सकता है। यह कीट कई बार पौधे की गोभ के अंदर छिपा रहता है, इसलिए नियमित निगरानी जरूरी है। शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही Makka Mein Fall Armyworm Ka Niyantran के उपाय अपनाने से कीट को फैलने से रोका जा सकता है।
खेत में इन जगहों पर जरूर करें निगरानी
किसानों को मक्का के खेत में नियमित रूप से पौधों की जांच करनी चाहिए। खासतौर पर नई पत्तियों और पौधे की गोभ पर ध्यान देना जरूरी है। अगर कुछ पौधों में फॉल आर्मीवर्म के लक्षण दिखाई देते हैं तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह कीट तेजी से फैल सकता है। शुरुआती स्तर पर कार्रवाई करने से कीट का प्रकोप बढ़ने से रोका जा सकता है। नियमित खेत निरीक्षण Makka Mein Fall Armyworm Ka Niyantran का सबसे महत्वपूर्ण शुरुआती कदम है। Makka Mein Fall Armyworm Ka Niyantran
छोटी फसल में स्प्रे, बड़ी फसल में ड्रोन से छिड़काव
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, अगर मक्का की फसल छोटी है तो किसान सामान्य स्प्रे पंप की मदद से कीटनाशक का छिड़काव कर सकते हैं। वहीं, अगर फसल काफी बड़ी हो चुकी है तो बड़े खेतों में ड्रोन के माध्यम से छिड़काव करना सुविधाजनक हो सकता है। ड्रोन की मदद से बड़े क्षेत्र में कम समय में छिड़काव किया जा सकता है।
हालांकि किसी भी तरीके से कीटनाशक का इस्तेमाल करते समय उत्पाद के लेबल और कृषि विशेषज्ञ की सलाह का पालन करना जरूरी है। अगर खेत में इल्ली की संख्या कम है और कीट शुरुआती अवस्था में है, तो कुछ कृषि सलाह के अनुसार पौधे की गोभ में रेत डालने से भी शुरुआती नियंत्रण में मदद मिल सकती है। Makka Mein Fall Armyworm Ka Niyantran
फॉल आर्मीवर्म के नियंत्रण के लिए इन दवाओं का इस्तेमाल
Makka Mein Fall Armyworm Ka Niyantran करने के लिए Emamectin Benzoate 5 SG जैसे कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है। दिए गए कृषि सुझाव के अनुसार इसे करीब 1 ग्राम प्रति 2.5 लीटर पानी की दर से मिलाया जा सकता है। एक एकड़ फसल के लिए लगभग 200 लीटर पानी में घोल तैयार करके छिड़काव करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा Chlorantraniliprole 18.5 SC और Spinetoram 11.7 SC जैसे कीटनाशकों का भी फॉल आर्मीवर्म नियंत्रण के लिए उपयोग किया जाता है। इन दवाओं की सही मात्रा उत्पाद के लेबल, फसल की अवस्था और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही तय करनी चाहिए।
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दवा का छिड़काव मक्का की गोभ तक पहुंचना जरूरी
फॉल आर्मीवर्म अक्सर मक्का के पौधे की गोभ में छिपकर नुकसान करता है। इसलिए कीटनाशक का छिड़काव करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि दवा पौधे की गोभ तक अच्छी तरह पहुंचे। सिर्फ पत्तियों की ऊपरी सतह पर स्प्रे करने से कीट पर अपेक्षित प्रभाव नहीं मिल सकता है। इसलिए छिड़काव करते समय पौधे की गोभ और प्रभावित हिस्से को ध्यान में रखना जरूरी है। प्रभावी Makka Mein Fall Armyworm Ka Niyantran के लिए दवा का सही तरीके से इस्तेमाल उतना ही जरूरी है, जितना सही समय पर छिड़काव करना।
कीटनाशक की मात्रा बढ़ाकर न करें इस्तेमाल
किसानों को फॉल आर्मीवर्म के प्रकोप को देखकर कीटनाशक की मात्रा खुद से बढ़ाकर इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए। अधिक मात्रा में दवा का इस्तेमाल फसल और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कीटनाशक का छिड़काव हमेशा उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करें। साथ ही खेत की नियमित निगरानी करते रहें, ताकि फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप दोबारा बढ़ने पर समय रहते नियंत्रण किया जा सके। सही पहचान, नियमित निगरानी और समय पर उचित उपाय अपनाकर किसान मक्का की फसल को फॉल आर्मीवर्म से होने वाले नुकसान से काफी हद तक बचा सकते हैं।
