El Nino 2026-27: मॉनसून की विदाई के बीच इन राज्यों में होगी बारिश, जानें किसानों पर क्या होगा असर

El Nino 2026-27: मॉनसून की विदाई के बीच इन राज्यों में होगी बारिश, जानें किसानों पर क्या होगा असर

El Nino 2026-27: मॉनसून की विदाई शुरू हो चुकी है, लेकिन देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है। बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्यों में आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इसी बीच El Nino 2026-27 को लेकर भी मौसम विशेषज्ञों और किसानों के बीच चर्चा बढ़ गई है। माना जा रहा है कि अल नीनो की स्थिति का असर आने वाले समय में मौसम और मानसून के पैटर्न पर देखने को मिल सकता है।

मॉनसून उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों से वापस लौटना शुरू हो गया है। हालांकि, देश के पूर्वी और मध्य हिस्सों में मौसम प्रणाली सक्रिय रहने के कारण सीजन की आखिरी बारिश का दौर जारी रह सकता है। ऐसे में किसानों के लिए आने वाले दिनों का मौसम काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। El Nino 2026-27

मॉनसून की विदाई के बीच इन राज्यों में बारिश के आसार

मॉनसून की वापसी के दौरान ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण पूर्वी तट और मध्य भारत के कई इलाकों में बारिश हो सकती है। मौसम प्रणाली के आगे बढ़ने से कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर तेज बारिश भी देखने को मिल सकती है। हालांकि, बारिश की तीव्रता और अवधि अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रह सकती है।

El Nino 2026-27 देश में बारिश की कमी अभी भी बनी हुई

मॉनसून सीजन के दौरान देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस सप्ताह देश में कुल मॉनसूनी बारिश की कमी करीब 15 फीसदी रही। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में बारिश की कमी कुछ कम हुई है। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में भी स्थिति में थोड़ा सुधार देखने को मिला है। वहीं मध्य भारत में बारिश की कमी करीब 6 फीसदी के आसपास बनी हुई है। उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की कमी लगभग 10 फीसदी तक पहुंच गई है। इस तरह देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की स्थिति एक जैसी नहीं है। कहीं पर्याप्त बारिश हुई है तो कहीं अभी भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।

बंगाल की खाड़ी का कम दबाव बढ़ाएगा बारिश

बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र मौजूदा मौसम के लिए महत्वपूर्ण है। इसके पूर्वी तट की ओर बढ़ने के कारण ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। मॉनसून की विदाई के समय होने वाली यह बारिश खरीफ फसलों के लिए उपयोगी हो सकती है। हालांकि, जिन क्षेत्रों में खेतों में पहले से पर्याप्त नमी है, वहां लगातार बारिश होने पर जलभराव की समस्या भी पैदा हो सकती है।

खरीफ फसलों की बुवाई में आया सुधार

बारिश के बीच खरीफ फसलों की बुवाई में भी प्रगति हुई है। 18 सितंबर तक देश में कुल खरीफ फसलों की बुवाई करीब 1,103.9 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई थी। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में बुवाई का अंतर भी कुछ कम हुआ है। हालांकि, सभी फसलों की स्थिति समान नहीं है। कुछ फसलों का रकबा पिछले साल से आगे निकल गया है, जबकि धान और कपास जैसी प्रमुख फसलें अभी भी पीछे चल रही हैं।

तिलहन की बुवाई में अच्छी प्रगति

इस खरीफ सीजन में तिलहन की बुवाई में अच्छी प्रगति देखने को मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक, तिलहन का रकबा पहली बार पिछले साल की समान अवधि से थोड़ा आगे निकल गया है। दलहन की बुवाई भी लगभग स्थिर बनी हुई है। तिलहन और दलहन दोनों ही खरीफ सीजन की महत्वपूर्ण फसलें हैं। इनके रकबे में सुधार होने से आने वाले समय में उत्पादन की स्थिति पर भी असर पड़ सकता है। El Nino 2026-27

El Nino 2026-27 धान की बुवाई अभी भी पिछले साल से पीछे

धान की खेती करने वाले किसानों के लिए इस साल बुवाई का रकबा चिंता का विषय बना हुआ है। 18 सितंबर तक देश में करीब 429.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई हुई थी, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा लगभग 445.9 लाख हेक्टेयर था। इस तरह धान की बुवाई करीब 16.6 लाख हेक्टेयर पीछे चल रही है। ऐसे क्षेत्रों में जहां पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, वहां आने वाले दिनों की बारिश फसल के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। दूसरी ओर, अत्यधिक बारिश से जलभराव होने पर धान की फसल को नुकसान भी हो सकता है।

El Nino 2026-27 कपास की बुवाई में भी कमी

कपास की बुवाई का रकबा भी पिछले साल की तुलना में थोड़ा कम है। 18 सितंबर तक करीब 109.6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई थी। पिछले साल इसी समय यह रकबा लगभग 110.6 लाख हेक्टेयर था। यानी इस साल कपास की बुवाई करीब 1 लाख हेक्टेयर कम है। वहीं गन्ने और जूट-मेस्टा की बुवाई के रकबे में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। El Nino 2026-27

मध्य और पश्चिम भारत में जलाशयों में पानी बेहतर

El Nino 2026-27 मध्य और पश्चिम भारत के जलाशयों में पानी की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में जलाशयों का जलस्तर 10 साल के औसत से ऊपर है। इससे सिंचाई और आगामी फसल गतिविधियों के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर स्थिति बेहतर रह सकती है। हालांकि, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बुवाई की गति और जलाशयों में पानी का स्तर अपेक्षाकृत कमजोर बताया गया है।

El Nino 2026-27 का मौसम पर क्या असर पड़ सकता है?

El Nino 2026-27 को लेकर मौसम विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है। अल नीनो प्रशांत महासागर के समुद्री सतह के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी से जुड़ी जलवायु स्थिति है। इसका प्रभाव दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम और बारिश के पैटर्न पर पड़ सकता है। कुछ रिपोर्टों में El Nino 2026-27 के प्रभाव के आगे भी बने रहने की संभावना जताई गई है। हालांकि, अल नीनो का प्रभाव हर साल और हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं होता। भारत में मानसून पर इसका असर अन्य मौसम प्रणालियों, समुद्र की स्थिति और स्थानीय परिस्थितियों के साथ मिलकर निर्धारित होता है।

किसानों के लिए मॉनसून की आखिरी बारिश क्यों जरूरी?

मॉनसून की विदाई के बीच पूर्वी और मध्य भारत में होने वाली बारिश खरीफ फसलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। जिन क्षेत्रों में बारिश की कमी है, वहां अच्छी बारिश से मिट्टी में नमी की स्थिति सुधर सकती है और फसलों को फायदा मिल सकता है। वहीं, अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में किसानों को खेतों में जल निकासी का ध्यान रखना जरूरी है। खासकर धान, कपास और अन्य खरीफ फसलों में लगातार बारिश होने पर फसल की स्थिति पर नजर रखना जरूरी रहेगा।

आगे मौसम पर रहेगी किसानों की नजर

मॉनसून की वापसी शुरू होने के बावजूद देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाली मौसम प्रणालियां पूर्वी और मध्य भारत के मौसम को प्रभावित कर सकती हैं। वहीं El Nino 2026-27 को लेकर आने वाले महीनों में मौसम विशेषज्ञों की निगरानी जारी रहेगी। किसानों के लिए जरूरी है कि वे अपने क्षेत्र के स्थानीय मौसम पूर्वानुमान, बारिश की स्थिति और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार सिंचाई, जल निकासी और फसल प्रबंधन की योजना बनाएं।

author
Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

Related Articles