Ghanjeevamrit Aur Jeevamrit Se Prakritik Kheti Kaise Kare: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में किसान अब खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने के लिए प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) बहराइच के मार्गदर्शन में किसान केला और धान की सह-फसली खेती में प्राकृतिक तरीकों का प्रयोग कर रहे हैं। इस खेती में घनजीवामृत और जीवामृत जैसे प्राकृतिक घटकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
अगर आप भी जानना चाहते हैं कि Ghanjeevamrit Aur Jeevamrit Se Prakritik Kheti Kaise Kare, तो खेत की तैयारी, घनजीवामृत की मात्रा और फसल की बढ़वार के दौरान जीवामृत के इस्तेमाल को सही तरीके से समझना जरूरी है।
प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे बहराइच के किसान
बहराइच में पिछले कुछ समय से किसानों के बीच प्राकृतिक खेती को लेकर रुचि बढ़ी है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक किसानों को खेत की तैयारी से लेकर फसल की देखभाल तक प्राकृतिक खेती की तकनीकों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इसी क्रम में कुछ किसान केला और धान की सह-फसली खेती भी कर रहे हैं। इसमें रासायनिक उर्वरकों और रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल न करके प्राकृतिक घटकों के जरिए फसल प्रबंधन करने का प्रयास किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. नंदन सिंह के अनुसार, प्राकृतिक खेती में सही समय पर खेत की तैयारी और प्राकृतिक इनपुट का उचित इस्तेमाल महत्वपूर्ण है।
Ghanjeevamrit Aur Jeevamrit Se Prakritik Kheti Kaise Kare?
Ghanjeevamrit Aur Jeevamrit Se Prakritik Kheti Kaise Kare यह समझने के लिए सबसे पहले खेत की तैयारी पर ध्यान देना जरूरी है। प्राकृतिक खेती में फसल की बुआई से पहले मिट्टी में पर्याप्त मात्रा में प्राकृतिक खाद मिलाई जाती है। इसके बाद फसल की अवस्था के अनुसार जीवामृत का प्रयोग किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में मात्रा और समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अलग-अलग फसल और मिट्टी की स्थिति के अनुसार जरूरत अलग हो सकती है, इसलिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना उपयोगी रहता है।
बुआई से 10 से 15 दिन पहले डालें घनजीवामृत
प्राकृतिक खेती में खेत की तैयारी बुआई से पहले ही शुरू कर दी जाती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बुआई से करीब 10 से 15 दिन पहले प्रति एकड़ लगभग 5 क्विंटल घनजीवामृत खेत में डालकर मिट्टी में अच्छी तरह मिला देना चाहिए। घनजीवामृत को खेत में समान रूप से फैलाने के बाद मिट्टी में मिलाने से यह खेत के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचता है। इसके बाद खेत को बुआई के लिए तैयार किया जाता है। Ghanjeevamrit Aur Jeevamrit Se Prakritik Kheti Kaise Kare
बुआई के समय भी करें घनजीवामृत का इस्तेमाल
Ghanjeevamrit Aur Jeevamrit Se Prakritik Kheti Kaise Kare बुआई के समय प्रति एकड़ करीब 1 क्विंटल घनजीवामृत के इस्तेमाल की सलाह दी गई है। इसके बाद फसल की बुआई की जाती है। घनजीवामृत की वास्तविक मात्रा फसल, मिट्टी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। इसलिए किसानों को अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ से मात्रा की पुष्टि करनी चाहिए। Ghanjeevamrit Aur Jeevamrit Se Prakritik Kheti Kaise Kare
फसल की बढ़वार में जीवामृत का छिड़काव
Ghanjeevamrit Aur Jeevamrit Se Prakritik Kheti Kaise Kare फसल के शुरुआती विकास के दौरान जीवामृत का इस्तेमाल किया जाता है। जब पौधे करीब 20 से 25 दिन के हो जाएं, तब जीवामृत का पहला छिड़काव किया जा सकता है। इसके लिए 20 लीटर पानी में लगभग 1 लीटर जीवामृत मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। इसके बाद तैयार घोल का फसल पर छिड़काव किया जाता है। फसल जैसे-जैसे बढ़ती है, उसकी जरूरत के अनुसार जीवामृत और पानी की मात्रा में बदलाव किया जा सकता है। छिड़काव का समय और मात्रा फसल की अवस्था तथा स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार तय करना बेहतर रहता है।
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केला और धान की सह-फसली खेती में प्राकृतिक तरीका
बहराइच में केला और धान की सह-फसली खेती को प्राकृतिक खेती के साथ जोड़कर प्रयोग किया जा रहा है। किसानों का उद्देश्य दोनों फसलों को एक ही खेत में उगाते हुए रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करना है। सह-फसली खेती में फसलों की दूरी, पानी की जरूरत, मिट्टी की स्थिति और पोषक तत्वों की आवश्यकता का ध्यान रखना जरूरी होता है। कृषि वैज्ञानिक किसानों को इन्हीं पहलुओं के आधार पर खेती की तकनीक समझा रहे हैं। Ghanjeevamrit Aur Jeevamrit Se Prakritik Kheti Kaise Kare
प्राकृतिक खेती में मिट्टी की सेहत पर ध्यान
प्राकृतिक खेती का एक महत्वपूर्ण पहलू मिट्टी की गुणवत्ता और जैविक गतिविधियों को बनाए रखना है। किसान रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करके प्राकृतिक स्रोतों से खेत की जरूरत पूरी करने का प्रयास कर रहे हैं। घनजीवामृत और जीवामृत जैसे प्राकृतिक इनपुट का इस्तेमाल करते समय उनकी गुणवत्ता, सही मात्रा और उचित समय का ध्यान रखना जरूरी है। बिना जानकारी के किसी भी इनपुट की अधिक मात्रा का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। Ghanjeevamrit Aur Jeevamrit Se Prakritik Kheti Kaise Kare
किसानों के लिए जरूरी सावधानियां
प्राकृतिक खेती अपनाने से पहले किसानों को अपनी मिट्टी और फसल की जरूरत को समझना चाहिए। खेत में किसी भी प्राकृतिक खाद या घोल का इस्तेमाल निर्धारित मात्रा और उचित समय पर करना जरूरी है। साथ ही, फसल में कीट या रोग दिखाई देने पर केवल अनुमान के आधार पर उपचार करने के बजाय कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लेना बेहतर रहता है। बहराइच में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीक समझाने और शुरुआती समस्याओं को दूर करने में मदद कर रहे हैं। इससे किसान धीरे-धीरे घनजीवामृत और जीवामृत के इस्तेमाल को अपनी खेती की प्रक्रिया में शामिल कर रहे हैं।
