Parval Par Fal Badhane Ke Liye Kya Kare परवल की खेती कम समय में ज्यादा मुनाफे के लिए बेहतरीन है. बाजार में इसकी डिमांड और अच्छी कीमत किसानों को मालामाल बनाने की ताकत रखती है. पर क्या आपके परवल के खेत में भी फूलों की भरमार होती है, लेकिन फल गिनती के ही निकलते हैं? Parval Par Fal Badhane Ke Liye Kya Kare
अगर हां, तो समझ लीजिए आप अकेले नहीं हैं. बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, इस समस्या के पीछे कई वैज्ञानिक कारण भी जुड़े हुए हैं. अच्छी बात ये है कि अगर इन कारणों को सही तरीके से समझ लिया जाए, तो परवल की पैदावार में 40 से 70 फीसगी तक बढ़ोतरी संभव है. Parval Par Fal Badhane Ke Liye Kya Kare

परवल की खेती आज के समय में उन किसानों के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं है. जो कम मेहनत और छोटे निवेश में बड़ी सफलता पाना चाहते हैं. अक्सर हम पारंपरिक फसलों के चक्कर में पड़े रहते हैं. लेकिन परवल एक ऐसी नकदी फसल है जिसकी डिमांड मंडियों में हमेशा बनी रहती है. इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि एक बार सही तरीके से बेल लगा दी जाए.तो यह कई महीनों तक लगातार फल देती रहती है. गर्मियों से लेकर बारिश के मौसम तक परवल की कीमतें काफी अच्छी रहती हैं, जिससे किसानों की जेब में हर रोज नकद पैसा आता है. Parval Par Fal Badhane Ke Liye Kya Kare
परवल द्विलिंगी फसल
डॉ. एस. के. सिंह ने बताया कि परवल द्विलिंगी फसल है, जिसमें नर और मादा फूल अलग-अलग पौधों पर होते हैं. फल केवल मादा फूल से बनता है, इसलिए खेत में 10 मादा पौधों पर 1 नर पौधे का संतुलन जरूरी है. अनुपात बिगड़ने पर परागण प्रभावित होता है और फूल गिरने लगते हैं. Parval Par Fal Badhane Ke Liye Kya Kare
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बढ़ा सकते हैं उत्पादन
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के पादप रोग विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. एस. के. सिंह के अनुसार यह समस्या केवल लापरवाही नहीं, बल्कि कई वैज्ञानिक कारणों से जुड़ी है. परवल की संरचना, नर-मादा पौधों का अनुपात, परागण, हार्मोन संतुलन, सूक्ष्म पोषक तत्व और मौसम ये सभी कारक तय करते हैं कि फूल फल में बदलेगा या झड़ जाएगा. सही प्रबंधन से उत्पादन 40 से 70 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है. Parval Par Fal Badhane Ke Liye Kya Kare
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परवल की खासियत यह है कि इसके नर और मादा फूल अलग-अलग पौधों पर उगते हैं. यदि खेत में नर पौधे ज्यादा और मादा पौधे कम हो जाएं, तो परागण ठीक से नहीं हो पाता. इसका सीधा असर फल बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है और उत्पादन घट जाता है. इसलिए सही अनुपात बनाए रखना बेहद जरूरी है. Parval Par Fal Badhane Ke Liye Kya Kare
परवल में फल बनने के लिए मधुमक्खियों और अन्य कीटों द्वारा परागण बेहद जरूरी होता है. लेकिन अत्यधिक कीटनाशकों का उपयोग, पर्यावरण में बदलाव और मधुमक्खियों की संख्या में कमी इस प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं. जब परागण सही नहीं होता, तो फूल सूखकर गिर जाते हैं और फल बनने की संभावना खत्म हो जाती है.
परवल की अच्छी फसल के लिए 22 से 28 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है. अगर तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाए या अचानक मौसम में बदलाव हो जाए, तो पराग की गुणवत्ता प्रभावित होती है. इससे फल बनने की क्षमता कम हो जाती है और उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ता है. Parval Par Fal Badhane Ke Liye Kya Kare
फसल के सही विकास के लिए बोरॉन, पोटाश और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व बेहद जरूरी होते हैं. बोरॉन की कमी होने पर फूल कमजोर हो जाते हैं और झड़ने लगते हैं. वहीं, ज्यादा नाइट्रोजन और पोटाश की कमी भी पौधे के हार्मोन संतुलन को बिगाड़ देती है. Parval Par Fal Badhane Ke Liye Kya Kare
अगर किसान सही तकनीक अपनाएं, जैसे नर-मादा पौधों का संतुलन बनाए रखना, मधुमक्खी बक्सों का उपयोग, सुबह के समय हाथ से परागण, संतुलित पोषण और समय पर छिड़काव, तो उत्पादन में 40 से 70 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है.

