Success Story Of Farmer Aakash Chorsiya आकाश चौरासिया मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के सागर कस्बे के एक छोटे किसान हैं, जो कम वर्षा के लिए जाना जाता है। उनके पास 2.5 एकड़ (1 हेक्टेयर) जमीन है। कम लागत और नवीन कृषि तकनीकों का उपयोग करते हुए, आकाश बहुस्तरीय फसल प्रणाली और खाद (वर्मीकम्पोस्ट), जैविक कीटनाशक और दूध उत्पादन जैसी अन्य संबंधित कृषि पद्धतियों से अपने खेत से लगभग 15 लाख रुपये कमाते हैं। Success Story Of Farmer Aakash Chorsiya

आकाश चौरसिया 32 साल के हैं। उनका जन्म मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में छोटे से शहर सागर में हुआ। आकाश का सपना डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना था। वह बचपन से सोचा करते थे कि आखिर लोग इतना बीमार क्या पड़ते हैं। फिर उन्हें इस बात का एहसास हो गया कि इनमें से ज्यादातर बीमारियों की वजह गड़बड़ खान-पान है। उन्होंने फैसला किया कि वह इस समस्या को खत्म करके रहेंगे। 2010 में इसी सोच के साथ जमीन के एक छोटे टुकड़े से उन्होंने ऑर्गेनिक खेती की शुरुआत की। उनका परिवार पहले से ही सुपारी की खेती करता था। Success Story Of Farmer Aakash Chorsiya
एक ही जमीन पर कई फसलें
फिर 2014 में आकाश को एक ही जमीन पर कई फसलें उगाने का आइडिया आया। किसान परिवार का होने के कारण वह किसानों की चुनौतियों से भी अच्छी तरह परिचित थे। उन्होंने फसलों की दो लेयर से मल्टी लेयर फार्मिंग की शुरुआत की। इसमें दो परत बनाई गईं। एक जमीन के अंदर और दूसरी सतह पर। सबसे पहले आकाश ने टमाटर और करेला उगाने से शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दूसरे कॉम्बिनेशन के साथ भी प्रयोग किए। जल्द ही आकाश का सामना पहली चुनौती से हुआ। यह समस्या थी घास और खरपतवार की। Success Story Of Farmer Aakash Chorsiya
इसके सॉल्यूशन के लिए आकाश ने सतह पर पत्तेदार फसलें लगानी शुरू कीं। इनमें पालक, धनिया, मेथी इत्यादि शामिल थीं। दरअसल, पत्तेदार फसलें तेजी से बढ़ती हैं। इसके चलते घास और खरपतवार के लिए काफी कम जगह बचती है। ऐसा करके उन्होंने घास की 80 फीसदी समस्या को कंट्रोल कर लिया। Success Story Of Farmer Aakash Chorsiya
अगली चुनौती जगह की कमी थी। इसका सॉल्यूशन आकाश को शहर की मल्टी स्टोरी बिल्डिंग से आया। उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि बहुमंजिला इमारतों में कैसे कम जगह में ज्यादा लोगों के रहने का बंदोबस्त होता है। फिर उन्होंने 6.5 फीट की ऊंचाई पर बांस से एक स्ट्रक्चर तैयार किया। उसके ऊपर एक जाली लगाई। इसका मकसद स्ट्रक्चर में थोड़ा प्रकाश और थोड़ी छाया पाना था। दो फसलें उगाने के बाद आकाश ने तीसरी लेयर के लिए क्रीपर्स यानी लताओं वाले पौधों का चयन किया। फिर चौथी लेयर में मौसमी फलों के पेड़ लगाए। इनमें आम, पपीता या चीकू शामिल थे। Success Story Of Farmer Aakash Chorsiya
और जाने – मल्टी लेयर फार्मिंग केसे करे
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क्या हैं मल्टीलेयर खेती के फायदे?
फसलों की कई परतें पानी को सूखने से रोकती हैं। आकाश चौरसिया बताते हैं, “खुले मैदान की तुलना में लगभग 80 प्रतिशत पानी की बचत होती है।” वह कहते हैं कि जहां एक खुले मैदान में एक फसल के लिए 100 लीटर पानी का उपयोग होता है, वहीं एक मल्टीलेयर खेत में चार फसलों के लिए उस पानी का केवल 30 प्रतिशत किया जाता है। इसलिए प्रत्येक फसल लगभग सात प्रतिशत पानी से बढ़ती है और खुले मैदान की तुलना में, लगभग 93 लीटर पानी की बचत होती है।” Success Story Of Farmer Aakash Chorsiya
चार तरह की फसलों से किसान को भी हर एक फसल से आय मिलती है। उदाहरण के लिए, मार्च से जुलाई तक पत्तेदार हरी सब्जियां, जैसे कि पालक से किसानों की अच्छी कमाई हो जाती है। अप्रैल से नवंबर तक, लाल लौकी की तरह लताएं फलती हैं। अगस्त में, अदरक जैसी अंडरग्राउंड फसल पक जाती है और बेचने के लिए तैयार रहती है। Success Story Of Farmer Aakash Chorsiya
वहीं, दिसंबर से जनवरी तक पपीते का पेड़ फल देता है। आकाश खुद मल्टीलेयर खेती से 30 लाख रुपये सलाना कमा रहे हैं। वह कहते हैं, “ऐसा एक भी हफ्ता नहीं है, जिसमें हमारी कमाई न होती हो।” वह जोर देते हुए कहते हैं कि यह मॉडल किसानों को आर्थिक रूप अधिक से स्वतंत्र बनाता है। Success Story Of Farmer Aakash Chorsiya

अब तक हजारों किसानों को दे चुके हैं ट्रेनिंग
खुले मैदान के मुकाबले इस तरह के मॉडल में 80 फीसदी पानी कम लगता है। इसके अलावा फसलों की कई परतें पानी सूखने से रोकती हैं। एक ही जगह चार तरह की फसल उगाने से किसान की आय बढ़ जाती है। वह खुद सालाना 30 लाख रुपये तक की इनकम कर लेते हैं। आकाश करीब 80,000 किसानों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दे चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने 12 लाख अन्य किसानों को मल्टीलेयर फार्मिंग के बारे में बताया है। आकाश को मल्टी लेयर फार्मिंग के लिए कई पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।
