Success Story Of Organic Farmer Yogesh Joshi 2 बीघा खेत पर शुरू की थी जीरे की खेती, आज करोडो का है टर्न ओवर!

Success Story Of Organic Farmer Yogesh Joshi 2 बीघा खेत पर शुरू की थी जीरे की खेती, आज करोडो का है टर्न ओवर!

Success Story Of Organic Farmer Yogesh Joshi योगेश के घर वाले चाहते थे कि वे सरकारी नौकरी की तैयारी करे लेकिन योगेश ने खेती को चुना और 7 किसानों के साथ मिलकर जीरे की आर्गेनिक खेती शुरू की। आज उनका यह सफर लाखो किसानों के साथ जापान और अमेरिका तक पहुँच चुका है! Success Story Of Organic Farmer Yogesh Joshi

24 की उम्र से ऑर्गेन‍िक खेती के ब‍िजनेस में लगे, आज करोड़ों में कमाई

सफलता की यह कहानी राजस्थान के जालोर जिले के उस युवा किसान की हैं जिसके घरवाले चाहते थे कि वह सरकारी नौकरी करें, लेकिन वह मन बना चुका था कि खेतीबाड़ी में ही अपना भविष्य तलाश करेगा। इस नौजवान का नाम योगेश जोशी हैं, जिन्होंने अपने पिता भीखाराम और चाचा पोपटलाल की लाख समझाइशों के बावजूद भी सरकारी नौकरी के बारे में एक बार भी नहीं सोचा और जुट गए जैविक खेती करने में। Success Story Of Organic Farmer Yogesh Joshi

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योगेश जोशी ने कहा कि देश के बाकी युवाओं की तरह मेरे घर वाली भी नहीं चाहते थे कि मैं खेती करूं. मैंने स्नातक के बाद ऑर्गेनिक फॉर्मिंग में डिप्लोमा किया था. वो चाहते थे अगर खेती में रुचि है तो खेती से जुड़ी नौकरी कर लूं लेकिन किसानी तो बिल्कुल नहीं. लेकिन मैं ठान चुका था,

उनके पिता से लेकर चाचा-चाची और चचेरे भाई-बहन तक, परिवार के लगभग सभी सदस्य सरकारी नौकरी में थे, ऐसे में कृषि क्षेत्र में कदम रखना घाटे का सौदा लग रहा था। आखिर राजस्थान का जालोर जिला सूखाग्रस्त क्षेत्र है। लेकिन योगेश, जो जैविक खेती को बढ़ावा देने वाली एक निजी कंपनी के साथ काम कर रहे थे, जानते थे कि एक दशक बाद किसान जैविक खेती की ओर रुख करेंगे और सरकारी नीतियां उनका समर्थन करेंगी। Success Story Of Organic Farmer Yogesh Joshi

योगेश ने कैसे की शुरुआत?

उन्होंने हिम्मत जुटाई, अपनी नौकरी छोड़ दी चूंकि उस वक़्त जैविक खेती का इतना माहौल नहीं था, इसलिए शुरुआत में योगेश ने इस बात पर फोकस किया कि इस क्षेत्र में कौनसी उपज लगाई जाए जिससे ज्यादा मुनाफ़ा हो, बाज़ार मांग भी जिसकी ज्यादा रहती हो। उन्हें पता चला कि जीरे को नगदी फसल कहा जाता है और उपज भी बम्पर होती है,और अपनी दो बीघा (0.61 एकड़) जमीन पर जीरा उगाना शुरू कर दिया।

पहले दो चक्रों में उनकी फसल को नुकसान हुआ और जब उन्हें सफलता मिली, तो उन्होंने जिले भर के 300 किसानों से संपर्क किया ताकि वे भी ऐसा ही करें। उन्होंने इसे ही उगाने का फैसला किया। 2 बीघा खेत में जीरे की जैविक खेती की, वे असफल हुए पर हिम्मत नहीं हारी।

केवल 7 किसानों को समझाइश के बाद जैविक खेती से जोड़कर शुरुआत करने वाले योगेश की शुरुआती राह आसान नहीं रही। उनसे जुड़े किसानों को तो इस बात का भी भरोसा नहीं था कि बिना यूरिया, डीएपी, पेस्टिसाइड्स डाले खेती संभव भी हो सकती है?

ऐसे में योगेश ने जोधपुर स्थित काजरी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अरुण के. शर्मा से संपर्क किया, वे इनके गाँव सांचोर आए और जैविक खेती के संबंध में प्रशिक्षण दिया। पहली बार इन किसानों को जीरे की फसल में कामयाबी मिली। Success Story Of Organic Farmer Yogesh Joshi

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सात किसानों से शुरू हुआ कारवां लाखो किसानो तक पंहुचा

योगेश ने काजरी के वैज्ञानिकों की मदद से जैविक खाद और फसल रक्षा के लिए दवाइयां बनानी सीखीं। उनके प्रयोग से अच्छे परिणाम मिले थे और सात किसानों से शुरू हुआ कारवां आज लाखो किसानो तक पहुंच गया. योगेश बताते हैं, “रसायनमुक्त खेती को व्यवसायिक रूप देने के लिए मैंने रैपिड ऑर्गेनिक कंपनी बनाई. जिसके जरिए मेरी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा किसानों को इसमें जोड़ा जाए और उन्हें अच्छा मुनाफा दिलाया जा सके. Success Story Of Organic Farmer Yogesh Joshi

10 साल में मिली कामयाबी

आज किसानों का यह समूह जीरे के अलावा वरियाली, धनिया, मैथी, सुआ, कलौंजी, किनोवा, चिया सीड, गेंहू, बाजरा, मस्टर्ड सहित पश्चिमी राजस्थान में आसानी से हो सकने वाली सभी फसलों की जैविक खेती कर रहा है। फर्म ‛रैपिड ऑर्गेनिक’ देश की पहली कंपनी है जो जीरे को लेकर ट्रेड फेयर में उतर रही है।

योगेश के साथ मिलकर खेती करने वाले ईश्वर सिंह ने बताया कि योगेश जोशी ने जैविक खेती का फार्मूला लाया तब से उनके साथ मिलकर खेती कर रहा हूं. मुझे जोशी की कंपनी ही बीज उपलब्ध करवाती है और जैविक दवाई घर पर ही तैयार की जाती है. साथ ही बुवाई के समय हमारी फसल का भाव तय हो जाता है ओर हमें कम खर्च में ज्यादा मुनाफा मिल रहा है.

आज योगेश रैपिड ऑर्गेनिक के गर्वित सह-मालिक हैं  यह एक ऐसा ब्रांड है जिसकी पूरे भारत में मौजूदगी है और इसके दो सबसे बड़े ग्राहक जापान और अमेरिका में स्थित हैं। उन्होंने अपनी पत्नी अरुणा जोशी को भी ब्रांड के निदेशक के रूप में नियुक्त किया है Success Story Of Organic Farmer Yogesh Joshi

ये दोनों तीन संगठनों का संचालन करते हैं – इंडियन एग्रो, जहां किसान अपनी उपज बेचते हैं, रैपिड ऑर्गेनिक, जहां से वे आगे ग्राहकों को बेचते हैं और एक किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) जिसके माध्यम से किसानों को प्रशिक्षित किया जाता है और वे सीधे रैपिड ऑर्गेनिक को अपनी उपज बेच सकते हैं।

रैपिड ऑर्गेनिक को यूरोपीय संघ के जैविक विनियमन, अमेरिकी कृषि विभाग, एनपीओपी, जापानी कृषि मानकों और कनाडा के जैविक शासन द्वारा प्रमाणित किया गया है।वह संविदा खेती, अपने ब्रांड को विकसित करने, किसानों को सशक्त बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को व्यवसाय में शामिल करने के बारे में जानकारी देते हैं।

जैविक खेती को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए, पति-पत्नी की इस जोड़ी को महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी और भारत के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी सहित कई बार सम्मानित किया जा चुका है। Success Story Of Organic Farmer Yogesh Joshi

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विदेश में जाती है उपज


योगेश ने अब तक 10,000 किसानों को जैविक खेती प्रमाणपत्र हासिल करने में भी मदद की है। योगेश की कंपनी किसानों से 2-3 हजार टन जैविक फसल खरीदती है और उन्हें भारत और विदेशों में बेचती है। योगेश के जैविक खाद्य पदार्थ की बिक्री जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप और अन्य देश में होती है।

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