Al Nino Ka Khatra इन दिनों एक खास मौसम प्रणाली सक्रिय है, जो हवा के रुख को बदल रही है. इससे समुद्र का तापमान और बढ़ सकता है और अल नीनो बनने की संभावना मजबूत हो जाती है. इसके अलावा 30 दिन का साउदर्न ऑसिलेशन इंडेक्स -7.7 तक गिर गया है, जो यह दिखाता है कि प्रशांत महासागर में दबाव का संतुलन बदल रहा है. Al Nino Ka Khatra
मौसम के बदलते मिजाज के बीच इस साल एक बार फिर अल नीनो असर दिखा सकता है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक मई से जुलाई के बीच इसके बनने की संभावना है. अगर ऐसा होता है, तो इसका असर सिर्फ गर्मी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बारिश और खासकर भारत के मानसून पर भी पड़ सकता है. यही वजह है कि आने वाले महीनों का मौसम थोड़ा अनिश्चित नजर आ रहा है Al Nino Ka Khatra

Al Nino Ka Khatra
क्या है अल नीनो
अल नीनो ) एक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है—खासकर भारत में बारिश (मानसून), खेती और तापमान पर।
सामान्य स्थिति में तेज ट्रेड विंड (हवाएं) गर्म पानी को ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया की तरफ धकेलती हैं। लेकिन अल नीनो के समय ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे गर्म पानी वापस दक्षिण अमेरिका (पेरू-इक्वाडोर) की ओर फैल जाता है। यही बदलाव मौसम को बिगाड़ देता है। Al Nino Ka Khatra
अल नीनो के संकेत क्यों मिल रहे हैं
दुनिया भर के मौसम मॉडल यह बता रहे हैं कि प्रशांत महासागर का पानी लगातार गर्म हो रहा है. अभी स्थिति सामान्य है, यानी न तो पूरी तरह अल नीनो है और न ही ला नीना, लेकिन तापमान धीरे-धीरे बढ़ रहा है.
12 अप्रैल तक नीनो 3.4 इंडेक्स -0.27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य सीमा में है. लेकिन इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे साफ है कि समुद्र के अंदर और ऊपर दोनों जगह गर्मी बढ़ रही है. Al Nino Ka Khatra
समुद्र के अंदर क्या हो रहा है
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र के भीतर तापमान बढ़ने से आने वाले दिनों में सतह का तापमान भी बढ़ सकता है. इसके साथ ही हवा और समुद्र के बीच तालमेल भी बहुत अहम होता है. अगर यह संतुलन मजबूत बना रहता है, तो अल नीनो पूरी तरह विकसित हो सकता है. हालांकि अभी यह कहना मुश्किल है कि इसका असर कब और कितना होगा. Al Nino Ka Khatra
दुनिया में पहले से ज्यादा गर्मी
दुनिया भर में तापमान पहले ही सामान्य से ज्यादा बना हुआ है. एपीईसी क्लाइमेट सेंटर के अनुसार आने वाले महीनों में भी ज्यादातर जगहों पर तापमान औसत से ज्यादा रहेगा. इसका मतलब है कि गर्मी का असर बना रहेगा और कई जगहों पर लू जैसी स्थिति देखने को मिल सकती है. Al Nino Ka Khatra
हवाओं का बदलता रुख
इन दिनों एक खास मौसम प्रणाली सक्रिय है, जो हवा के रुख को बदल रही है. इससे समुद्र का तापमान और बढ़ सकता है और अल नीनो बनने की संभावना मजबूत हो जाती है. इसके अलावा 30 दिन का साउदर्न ऑसिलेशन इंडेक्स -7.7 तक गिर गया है, जो यह दिखाता है कि प्रशांत महासागर में दबाव का संतुलन बदल रहा है.
और जाने – गर्मी का कहर! ये 4 लक्षण दिखें तो तुरंत संभालें अपने पशु, वरना हो सकता है भारी नुकसान
हिंद महासागर की स्थिति
हिंद महासागर फिलहाल सामान्य स्थिति में है और इसका इंडेक्स +0.06 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. हालांकि कुछ संकेत ऐसे भी हैं कि आगे चलकर यह सकारात्मक स्थिति में जा सकता है. अगर ऐसा होता है, तो यह भारत के मानसून को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है और अल नीनो के असर को कम कर सकता है. Al Nino Ka Khatra
बारिश का असर हर जगह अलग होगा
मौसम मॉडल यह भी बता रहे हैं कि इस बार बारिश हर जगह एक जैसी नहीं होगी. कहीं सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है, तो कहीं कम. भारत, उत्तरी ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में अच्छी बारिश के संकेत हैं, लेकिन यह पूरी तरह तय नहीं है और समय के साथ बदल सकता है. Al Nino Ka Khatra
भारत पर क्या असर पड़ेगा
भारत के लिए यह स्थिति काफी महत्वपूर्ण है. आमतौर पर जब मौसम सामान्य रहता है, तो मानसून भी ठीक रहता है. लेकिन अगर अल नीनो बनता है, तो बारिश का पैटर्न बिगड़ सकता है. कई बार इसके कारण मानसून कमजोर पड़ जाता है और सूखे जैसी स्थिति भी बन सकती है. हालांकि अगर हिंद महासागर का प्रभाव सकारात्मक रहता है, तो कुछ राहत मिल सकती है.

अभी भी बनी हुई है अनिश्चितता
सबसे बड़ी बात यह है कि अभी मौसम को लेकर पूरी तरह स्पष्टता नहीं है. कुछ मॉडल कहते हैं कि अल नीनो जल्दी बनेगा, जबकि कुछ इसे धीरे-धीरे बनने वाला मानते हैं. इसलिए आने वाले समय में मौसम तेजी से बदल सकता है और अभी सटीक अनुमान लगाना आसान नहीं है.
