Madhumakhi Palan Business kese shuru kare मधु, परागकण आदि की प्राप्ति के लिए मधुमक्खियाँ पाली जातीं हैं। यह एक कृषि उद्योग है। मधुमक्खियां फूलों के रस को शहद में बदल देती हैं और उन्हें छत्तों में जमा करती हैं। जंगलों से मधु एकत्र करने की परंपरा लंबे समय से लुप्त हो रही है। Madhumakhi Palan Business kese shuru kare
बाजार में शहद और इसके उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण मधुमक्खी पालन अब एक लाभदायक और आकर्षक उद्यम के रूप में स्थापित हो चला है। मधुमक्खी पालन के उत्पाद के रूप में शहद और मोम आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। मधुमक्खी कीट वर्ग का सामाजिक प्राणी है जो खुद के बनाए हुए मोम के छत्ते में संघ बनाकर रहता है, जिसमें एक रानी कई सौ नर एवं शेष श्रमिक होते हैं। एक छत्ते में इनकी संख्या लगभग 20हजार से 50हजार तक होती है। इनके छत्ते से प्राप्त शहद बहुत पौष्टिक होता है।

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मधुमक्खियों की प्रमुख प्रजातियां
- एपिस मेलिफेरा (Apis Mellifera) – ज्यादा शहद उत्पादन
- एपिस सेराना (Apis Cerana) – भारतीय परिस्थितियों के लिए उपयुक्त
- डमरू मधुमक्खी (Apis Dorsata) – जंगली, पालन कठिन
कैसे करें शुरू
मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए किसान को सबसे पहले सही जगह का चयन करना चाहिए. जगह ऐसी होनी चाहिए जहां आसपास फूलों वाली फसलें या पेड़-पौधे ज्यादा हों. इसके अलावा छत्तों को धूप और बारिश से बचाने का भी ध्यान रखना जरूरी है. Madhumakhi Palan Business kese shuru kare
पोषण प्रबंध
मधुमक्खी पालन व्यवसाय प्रारम्भ करने से पूर्व यह आवश्यक है की मधुमक्खी पालन का एक महत्त्वपूर्ण भाग है।इसके बिल्कुल मध्य में एक छड़ व जाली वर्षभर का योजना प्रारूप तैयार किया जाए।मधुमक्खियों के पोषण पराग व मकरंद द्वारा होता है, जो ये विभीन्न फूलों से प्राप्त करती हैं।अत: मधुमक्खीपालक को चाहिए कि वो व्यवसाय आरम्भ करने से पूर्व ये सुनिश्चित कर ले किस माह में किस वनस्पति या फसल से पूरे वर्ष पराग व मकरंद प्राप्त होते रहेंगे। Madhumakhi Palan Business kese shuru kare
इमली, नीमसफेदा कचनार, रोहिड़ा लिसोड़ा, अडूसा, रीठा आदि वृक्षों से, नींबू, अमरुद, आम अंगूर,अनार आदि फलों की फसलों से, मिर्च, बैंगन, टमाटर, चना मेथी, लौकी, करेला, तुराई ककड़ी, कटेला आदि सब्जियों से, सरसों कपास, सूरजमुखी, तारामीरा आदि फसलों से पराग व मकरंद मधुमक्खियों को प्रचुर मात्रा में मिल जाता है।पराग व मकरंद प्राप्ति का मासिक योजना प्रारूप तैयार करने से मौनगृहों के स्थानांतरण की सूविधा हो जाती है।
पराग व मकरंद प्राकृतिक रूप से प्राप्त नहीं होने की दशा में मधुमक्खियों को कृत्रिम भोजन की भी व्यवस्था की जाती है।कृत्रिम भोजन के रूप में उन्हें चीनी का घोल दिया जाता है।यह घोल एक पात्र में लेकर उसे मौनगृह में रख देते हैं।इसके अलावा मधुमक्खियों का कृत्रिम भोजन उड़द से भी बनाया जा सकता हैं।इसे असप्लिमेंट कहते हैं।इसे बनाने के लिए लगभग एक सौ ग्राम साबुत उड़द अंकुरित करके उसे पीसा जाता है।इस पीसी हुई डाल में दो चम्मच मिलाकर एक समांग मिश्रण तैयार कर लेते हैं।यह मिश्रण भोजन के रूप में प्रयोग में लाया जाता है।इससे मधुमक्खियों को थोड़े समय तक फूलों से प्राप्त होने वाला भोजन हो जाता है।
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मधुमक्खी पालन के लिए स्थान निर्धारण
- ऐसे स्थान का चयन आवश्यक है जिसके चारों तरफ 2-3 किमी. के क्षेत्र में पेड़-पौधे बहुतायत में, हों जिनसे पराग व मकरंद अधिक समय तक उपलब्ध हो सके।
- बॉक्स स्थापना हेतु स्थान समतल व पानी का उचित निकास होना चाहिए।
स्थान के पास का बाग़ या फलौद्यान अधिक घना नहीं होना चाहिए ताकि गर्मी के मौसम में हवा का आवागमन सुचारू हो सके।
- जहाँ मौनगृह स्थापित होना है, वह स्थान छायादार होना चाहिए।
- वह स्थान दीमक व चीटियों से नियंतित्र होना आवश्यक है।
दो मौनगृह के मध्य चार से पांच मीटर का फासला होना आवश्यक है, उन्हें पंक्ति में नहीं लगाकर बिखरे रूप में लगाना चाहिए।एक स्थान पर 50 से 100 मौनगृह स्थापित किये जा सकते हैं।
हर बॉक्स के सामने पहचान के लिए कोई खास पेड़ या निशानी लगनी चाहिए ताकि मधुमक्खी अपने ही मौनगृह में प्रवेश करें।
मौनगृह को मोमी पतंगे के प्रकोप से बचाने के उपाय किए जाने चाहिए।
निरीक्षण के सयम यह ध्यान देना चाहिए कि मौनगृह में नमी तो नहीं है अन्यथा उसे धुप दिखाकर सुखा देना चाहिए। Madhumakhi Palan Business kese shuru kare

शहद निष्कासन
मधुखंड में स्थित चौखटों में जब 75 से 80 प्रतिशत तक तक शहद जमा हो जाए तो उस शहद का निष्कासन किया जाता है।इसके लिए सबसे पहले चौखटों से मधुमक्खियाँ झाड़कर मधु खंड में डाल देते हैं इसके पश्चात चाकू से या तेज गर्म पानी डालकर छत्ते से मोम की ऊपरी परत उतारते हैं।फिर इस चौखट को शहद निष्कासन यंत्र में रखकर हैंडिल द्वारा घुमाते हैं, इसमें अपकेन्द्रिय बल द्वारा शहद बाहर निकल जाता है व छत्ते की संरचना को भी कोई नुकसान नहीं पहूंचता।
इस चौखट को पुन: मधुखंड में स्थापित कर दिया जाता है एवं मधुमक्खियाँ छत्ते के टूटे हुए भागों को ठीक करके पुन: शहद भरना प्रारंभ कर देती हैं।इस प्रकार प्राप्त शहद को मशीन से निकाल कर एक टंकी में 48-50 घंटे तक डाल देते हैं, ऐसा करने से शहद में मिले हवा के बूलबूले, मोम आदि शहद की ऊपरी सतह पर व अन्य मैली वस्तुएँ नीचे सतह पर बह जाती है।शहद को बारीक़ कपड़े से छानकर व प्रोसेसिंग के उपरांत स्वच्छ व सूखी बोतलों में भरकर बाजार में बेचा जा सकता है।इस प्रकार न तो छत्ते और न ही लार्वा, प्यूपा आदि नष्ट होते हैं और शहद भी शुद्ध प्राप्त होता है।
