भारत में बाजरे की खेती करने वाले किसान ऐसी उन्नत किस्मों की तलाश में रहते हैं जो कम समय में अधिक उत्पादन देने के साथ-साथ रोगों का भी बेहतर सामना कर सकें। HHB 299 Bajra Ki Sabse Adhik Upaj Dene Wali Variety इसी दिशा में विकसित की गई एक उन्नत हाइब्रिड किस्म है। इसे चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (CCSHAU), हिसार ने विकसित किया है। यह किस्म अधिक उत्पादन, जोगिया रोग प्रतिरोधक क्षमता, सूखा सहनशीलता और बेहतर पोषण के कारण किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। अब इस किस्म के बीज हरियाणा के अलावा देश के अन्य राज्यों में भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे अधिक किसानों को इसका लाभ मिलेगा।
HHB 299 Bajra Ki Sabse Adhik Upaj Dene Wali Variety अब दूसरे राज्यों में भी उपलब्ध
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने अपनी उन्नत बाजरा किस्मों HHB 299 Bajra Ki Sabse Adhik Upaj Dene Wali Variety और एचएचबी-67 संशोधित-2 के प्रसार के लिए कई निजी बीज कंपनियों के साथ तकनीकी समझौते किए हैं। इस पहल के तहत आंध्र प्रदेश के कुरनूल स्थित चक्रा सीड्स सहित अन्य कंपनियां इन बीजों का उत्पादन और वितरण करेंगी। विश्वविद्यालय का उद्देश्य किसानों तक प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीज समय पर पहुंचाना है ताकि कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल किया जा सके और देशभर में उन्नत बाजरा खेती को बढ़ावा मिले।
HHB 299 Bajra Ki Sabse Adhik Upaj Dene Wali Variety की विशेषताएं
HHB 299 Bajra Ki Sabse Adhik Upaj Dene Wali Variety लगभग 80 से 82 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। यह एक हाईब्रिड किस्म है जिसमें लगभग 73 पीपीएम आयरन पाया जाता है, जिससे इसका पोषण मूल्य सामान्य किस्मों की तुलना में अधिक है। इसकी बालियां मध्यम लंबाई की और शंक्वाकार होती हैं। उचित कृषि प्रबंधन अपनाने पर यह किस्म 49 मन प्रति एकड़ तक उपज देने की क्षमता रखती है। इसके अलावा यह जोगिया रोग के प्रति प्रतिरोधी होने के कारण किसानों के लिए अधिक सुरक्षित विकल्प मानी जाती है। सूखे की स्थिति में भी इसका प्रदर्शन बेहतर रहता है, जिससे यह वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए भी उपयुक्त साबित होती है।
49 मन प्रति एकड़ तक उत्पादन देने की क्षमता
आज के समय में किसान ऐसी बाजरा किस्म चाहते हैं जिससे कम लागत में अधिक मुनाफा प्राप्त हो सके। HHB 299 Bajra Ki Sabse Adhik Upaj Dene Wali Variety इसी कारण तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसान समय पर बुवाई करें, संतुलित उर्वरकों का उपयोग करें और फसल की उचित देखभाल करें, तो यह किस्म 49 मन प्रति एकड़ तक पैदावार देने की क्षमता रखती है। यही विशेषता इसे अन्य कई पारंपरिक बाजरा किस्मों से अलग बनाती है।
बाजरे का जोगिया रोग क्या है?
जोगिया रोग, जिसे हरित बाली रोग या डाउनी मिल्ड्यू (Downy Mildew) भी कहा जाता है, बाजरे की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है। इस रोग से प्रभावित पौधे सामान्य रूप से विकसित नहीं हो पाते और उनकी वृद्धि रुक जाती है। पत्तियों पर पीलापन दिखाई देने लगता है तथा उनकी निचली सतह पर सफेद फफूंद जैसी परत बन जाती है। कई बार बालियों की जगह घास जैसी हरी संरचना विकसित हो जाती है, जिससे दाने नहीं बनते और उत्पादन में भारी गिरावट आती है। HHB 299 Bajra Ki Sabse Adhik Upaj Dene Wali Variety को इस रोग के प्रति प्रतिरोधी बनाया गया है, जिससे किसानों को फसल नुकसान का जोखिम कम रहता है।
HHB-67 संशोधित-2 भी किसानों के लिए बेहतर विकल्प
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित एचएचबी-67 संशोधित-2 भी किसानों के लिए एक उन्नत हाइब्रिड बाजरा किस्म है। यह पहले की एचएचबी-67 संशोधित किस्म का रोग प्रतिरोधी संस्करण है। इसे हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के बारानी क्षेत्रों के लिए वर्ष 2021 में अनुशंसित किया गया था। यह किस्म जल्दी पकती है, सूखे की स्थिति में अच्छा प्रदर्शन करती है और अगेती, मध्यम तथा पछेती सभी प्रकार की बुवाई के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इसके दानों और सूखे चारे की गुणवत्ता भी काफी अच्छी होती है, जिससे पशुपालकों को भी लाभ मिलता है।
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अन्य उन्नत बाजरा किस्में भी हैं बेहतर विकल्प
यदि किसान HHB 299 Bajra Ki Sabse Adhik Upaj Dene Wali Variety के अलावा अन्य विकल्प तलाश रहे हैं, तो आरएचबी-234, जीएचबी-538 और पूसा-605 जैसी उन्नत किस्मों पर भी विचार कर सकते हैं। आरएचबी-234 लगभग 80 से 81 दिनों में तैयार होती है और अच्छी उपज देने के साथ हरित बाली रोग प्रतिरोधी भी है। जीएचबी-538 कम अवधि में पकने वाली किस्म है, जबकि पूसा-605 कम पानी वाले क्षेत्रों में बेहतर उत्पादन देने के लिए जानी जाती है।
किसानों के लिए क्यों फायदेमंद है यह किस्म?
यदि किसान अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और सूखा सहनशीलता वाली बाजरा किस्म अपनाना चाहते हैं, तो HHB 299 Bajra Ki Sabse Adhik Upaj Dene Wali Variety एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। यह किस्म न केवल उत्पादन बढ़ाने में मदद करती है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण दाने और बेहतर आर्थिक लाभ भी प्रदान करती है। प्रमाणित बीजों का उपयोग, संतुलित पोषण प्रबंधन और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार खेती करने पर किसान इस उन्नत बाजरा किस्म से अधिकतम उत्पादन और बेहतर मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं।
