देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार लगातार इथेनॉल उत्पादन बढ़ा रही है। लेकिन खरीफ 2026 सीजन में मक्के की बुवाई में आई कमी ने नई चिंता खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि Makke Ki Kam Buwai Ka Ethanol Blending Par Asar आने वाले महीनों में देखने को मिल सकता है। यदि मक्का उत्पादन अपेक्षा से कम रहता है, तो सरकार को इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और चावल पर अधिक निर्भर होना पड़ सकता है।
20 प्रतिशत Ethanol Blending लक्ष्य के लिए चाहिए 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल
भारत सरकार का लक्ष्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण करना है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर साल लगभग 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल की जरूरत होगी। वर्तमान में देश की कुल इथेनॉल उत्पादन क्षमता करीब 2,000 करोड़ लीटर तक पहुंच चुकी है। इसमें लगभग 900 करोड़ लीटर क्षमता चीनी उद्योग के पास है, जबकि शेष उत्पादन अनाज आधारित इथेनॉल संयंत्रों से होता है।इसी वजह से Makke Ki Kam Buwai Ka Ethanol Blending Par Asar सरकार की ऊर्जा नीति और कृषि क्षेत्र दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मक्के की बुवाई में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट
Makke Ki Kam Buwai Ka Ethanol Blending Par Asar सरकारी आंकड़ों के अनुसार 24 जुलाई तक देश में मक्के की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में 9.7 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों में यह गिरावट और अधिक चिंता बढ़ा रही है।कर्नाटक में मक्के का रकबा 34 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 37 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 16 प्रतिशत और राजस्थान में 3 प्रतिशत कम हुआ है। हालांकि मध्य प्रदेश में लगभग 8 प्रतिशत अधिक क्षेत्र में मक्के की खेती हुई है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन भी बुवाई के अनुरूप कम रहता है, तो Makke Ki Kam Buwai Ka Ethanol Blending Par Asar इथेनॉल उद्योग पर साफ दिखाई दे सकता है।
गन्ने की खेती लगभग स्थिर, मिल सकती है राहत
मक्का की तुलना में इस वर्ष गन्ने की स्थिति बेहतर दिखाई दे रही है। देश में लगभग 57.58 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 58.84 लाख हेक्टेयर था।उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में रकबे में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यदि चीनी उत्पादन सामान्य रहता है, तो गन्ने से बनने वाला इथेनॉल सरकार के लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है और Makke Ki Kam Buwai Ka Ethanol Blending Par Asar कुछ हद तक कम हो सकता है।
चावल पर बढ़ सकती है सरकार की निर्भरता
यदि मक्का और चीनी दोनों की उपलब्धता सीमित रहती है, तो सरकार इथेनॉल उत्पादन के लिए चावल का उपयोग बढ़ा सकती है। हाल ही में सरकार ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) के भंडार में टूटे चावल की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी है। इससे इथेनॉल उद्योग को अधिक मात्रा में टूटा चावल उपलब्ध हो सकेगा।हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चावल की मांग तेजी से बढ़ती है, तो कुछ गैर-बासमती चावल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। ऐसे में Makke Ki Kam Buwai Ka Ethanol Blending Par Asar खाद्यान्न बाजार पर भी प्रभाव डाल सकता है।
धान की बुवाई कई राज्यों में बढ़ी
इस बार उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार, असम और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में धान की बुवाई पिछले साल की तुलना में अधिक हुई है। वहीं मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, तेलंगाना और ओडिशा के कुछ क्षेत्रों में बुवाई अभी पिछड़ी हुई है। हालांकि हाल की बारिश के बाद इसमें सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।यदि धान का उत्पादन बेहतर रहता है, तो Makke Ki Kam Buwai Ka Ethanol Blending Par Asar काफी हद तक संतुलित किया जा सकता है और इथेनॉल उद्योग को पर्याप्त कच्चा माल मिल सकता है।
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विशेषज्ञों ने क्या कहा?
ग्रेन इथेनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (GEMA) के अध्यक्ष सी.के. जैन के अनुसार भारत का इथेनॉल उद्योग अब केवल एक फसल पर निर्भर नहीं है। खरीफ, रबी और गर्मी की विभिन्न फसलों से इथेनॉल का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे किसी एक फसल की कमी का असर पूरे उद्योग पर नहीं पड़ता।\उन्होंने कहा कि खरीफ की नई फसल बाजार में आने के बाद इथेनॉल संयंत्रों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता बेहतर हो जाएगी। उनके मुताबिक भारत अभी भी मक्का उत्पादन में आत्मनिर्भर है, इसलिए फिलहाल Makke Ki Kam Buwai Ka Ethanol Blending Par Asar को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है।
किसानों और बाजार पर क्या होगा असर?
यदि इथेनॉल उत्पादन के लिए चावल और गन्ने की मांग बढ़ती है, तो इन फसलों के बाजार भाव में मजबूती देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, यदि अगले सीजन में मक्के का उत्पादन बढ़ता है तो किसानों को भी बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहेगी।सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती खाद्य सुरक्षा और इथेनॉल उत्पादन के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी। आने वाले महीनों में मक्का, गन्ना और धान की वास्तविक पैदावार यह तय करेगी कि Makke Ki Kam Buwai Ka Ethanol Blending Par Asar कितना गहरा होगा और 20 प्रतिशत Ethanol Blending लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार किस फसल पर सबसे अधिक निर्भर रहेगी।
