IMD Weather Update: मॉनसून की धीमी शुरुआत, खरीफ फसल पर बढ़ा खतरा

IMD Weather Update: मॉनसून की धीमी शुरुआत, खरीफ फसल पर बढ़ा खतरा

IMD Weather Update: इस वर्ष जून महीने में देशभर में मॉनसून की शुरुआत अपेक्षाकृत धीमी रही, जिसके कारण सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। कम वर्षा का सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई, खेतों की नमी और किसानों की तैयारियों पर देखने को मिल रहा है। कई राज्यों में किसान पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जिससे बुवाई का कार्य प्रभावित हो रहा है। IMD Weather Update

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मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले अगले तीन महीनों में भी बारिश में कोई बड़ी बढ़ोतरी होने की संभावना कम दिखाई दे रही है। यदि यही स्थिति बनी रहती है, तो धान, सोयाबीन, मक्का, कपास और अन्य खरीफ फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही उर्वरकों (खाद) की मांग, सिंचाई की आवश्यकता और कृषि लागत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। ऐसे में किसानों के लिए मौसम की ताजा जानकारी के आधार पर खेती की रणनीति बनाना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। IMD Weather Update

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इस वर्ष देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार अपेक्षा से धीमी रही है। जून का महीना समाप्त होने के बावजूद अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, जून के अंत तक देशभर में औसतन करीब 40 प्रतिशत वर्षा की कमी रहने का अनुमान है, जिससे कृषि क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। IMD Weather Update

कम बारिश का सबसे अधिक असर खरीफ सीजन की बुवाई पर पड़ रहा है, क्योंकि धान, सोयाबीन, मक्का, कपास और दालों जैसी प्रमुख फसलें समय पर होने वाली मानसूनी बारिश पर निर्भर करती हैं। कई राज्यों में किसान पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जिसके कारण बुवाई का काम धीमा पड़ गया है। यदि आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो फसल उत्पादन, सिंचाई की लागत और किसानों की आय पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। IMD Weather Update

जून में सामान्य से काफी कम हुई बारिश

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 29 जून तक देशभर में लगभग 9.21 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य औसत की तुलना में करीब 42 प्रतिशत कम रही। पूरे जून महीने के दौरान मॉनसून की रफ्तार धीमी बनी रही, जिसका असर कई राज्यों में खेती और खरीफ फसलों की बुवाई पर देखने को मिला। IMD Weather Update

सबसे अधिक चिंता की बात यह रही कि जून के दूसरे पखवाड़े में बारिश की कमी और बढ़ गई, जहां सामान्य से करीब 47 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। हालांकि, महीने के अंतिम कुछ दिनों में कई राज्यों में मॉनसूनी गतिविधियां तेज हुईं, जिससे वर्षा की कुल कमी में कुछ सुधार देखने को मिला। इसके बावजूद जून के अंत तक देशभर में बारिश की कमी करीब 39 से 40 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो कृषि क्षेत्र और किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। IMD Weather Update

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अगले तीन महीनों में भी राहत मिलने के संकेत कम

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, इस वर्ष पूरे दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना बनी हुई है। विभाग का अनुमान है कि इस बार मानसून का प्रदर्शन दीर्घकालिक औसत (LPA) के लगभग 90 प्रतिशत के आसपास रह सकता है, जो सामान्य से कम माना जाता है। IMD Weather Update

यदि जून का महीना लगभग 10 सेंटीमीटर वर्षा के साथ समाप्त होता है, तो खरीफ फसलों के लिए जुलाई से सितंबर के दौरान अच्छी और लगातार बारिश होना बेहद आवश्यक होगा। हालांकि, मौजूदा मौसम पूर्वानुमान और विभिन्न मौसम मॉडल फिलहाल किसी बड़े सुधार के संकेत नहीं दे रहे हैं। IMD Weather Update

कई अंतरराष्ट्रीय मौसम मॉडल भी अगले तीन महीनों में देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा की संभावना जता रहे हैं। ऐसे में किसानों, कृषि विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि कमजोर मॉनसून का सीधा असर खेती, जल संसाधनों और फसल उत्पादन पर पड़ सकता है। IMD Weather Update

जुलाई का मौसम करेगा खरीफ सीजन की दिशा तय

मॉनसून के पूरे सीजन में जुलाई सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है, क्योंकि कुल मौसमी वर्षा का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी महीने दर्ज होता है। यही वजह है कि किसान, कृषि वैज्ञानिक और मौसम विशेषज्ञ अब जुलाई की बारिश पर विशेष नजर बनाए हुए हैं। यदि इस महीने सामान्य या उससे अधिक बारिश होती है, तो जून में हुई वर्षा की कमी की काफी हद तक भरपाई हो सकती है। लेकिन यदि जुलाई में भी बारिश कमजोर रहती है, तो खरीफ फसलों की बुवाई, फसल विकास और उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका बढ़ जाएगी।

खाद की मांग और खेती की लागत पर भी दिखेगा असर

कम बारिश का प्रभाव केवल फसलों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर उर्वरकों (खाद) की मांग पर भी पड़ता है। खरीफ सीजन में किसान बुवाई के तुरंत बाद फसलों को पहली बार खाद देते हैं, लेकिन जिन क्षेत्रों में मानसून देर से पहुंचा है या अब तक पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है, वहां बुवाई का काम भी धीमा पड़ा है। इसके कारण खाद के उपयोग में भी देरी हो रही है।

सरकारी अनुमान के अनुसार, खरीफ सीजन के लिए बड़ी मात्रा में उर्वरकों की आवश्यकता रहने वाली है। हालांकि, यदि आने वाले हफ्तों में बारिश सामान्य से कम रहती है, तो विशेष रूप से वर्षा आधारित (रेनफेड) कृषि क्षेत्रों में खाद की वास्तविक मांग घट सकती है। इससे कृषि बाजार, उर्वरक बिक्री और किसानों की फसल प्रबंधन रणनीति पर भी असर पड़ने की संभावना है।

विशेषज्ञों ने दी यह सलाह

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का कहना है कि उर्वरकों की खपत काफी हद तक मॉनसून और बुवाई की स्थिति पर निर्भर करती है. अगर लगातार अच्छी बारिश होती है और बुवाई तेजी से आगे बढ़ती है, तभी खाद की मांग बढ़ेगी. वहीं बारिश में देरी होने पर किसान खाद का उपयोग भी देर से करेंगे.

किसानों को क्या करना चाहिए?

ऐसे में किसान मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमानों पर लगातार नजर रखें. जल्दबाजी में बुवाई करने के बजाय पर्याप्त बारिश का इंतजार करें और अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि विभाग की सलाह के अनुसार ही फसल और उर्वरकों का इस्तेमाल करें

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