जून 2026 के आखिर तक देश में मॉनसून उम्मीद के मुताबिक सक्रिय नहीं था और कई राज्यों में करीब 40 प्रतिशत तक बारिश की कमी दर्ज की गई थी। इससे खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होने लगी थी। लेकिन जुलाई के आरम्भ में मौसम ने अचानक करवट ली और July Heavy Rain के कारण देश के ज्यादातर हिस्सों में मूसलाधार बारिश हुई। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार 2 जुलाई से 8 जुलाई 2026 के दौरान देशभर में सामान्य से करीब 45% ज्यादा वर्षा दर्ज की गई, जिससे जून की बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो गई।
जून की कमी के बाद जुलाई में तेज हुई बारिश
जून के अंतिम सप्ताह तक किसानों को अच्छी बारिश का इंतजार था, लेकिन जुलाई शुरू होते ही बंगाल की खाड़ी में बने गहरे कम दबाव के क्षेत्र और पश्चिमी तट पर सक्रिय ट्रफ सिस्टम ने मॉनसून को मजबूत कर दिया। इसका प्रभाव पूरे देश में देखने को मिला और July Heavy Rain के चलते कई राज्यों में सामान्य से डेढ़ गुना या उससे भी ज्यादा बारिश दर्ज की गई। इससे खरीफ फसलों की बुवाई को नई गति मिली, हालांकि कई इलाकों में जलभराव की समस्या भी सामने आई।
सेंट्रल इंडिया में सामान्य से ढाई गुना ज्यादा बारिश
IMD के अनुसार 2 से 8 जुलाई के बीच सेंट्रल इंडिया में 157 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 66.3 मिलीमीटर होती है। यानी इस क्षेत्र में सामान्य से 137 प्रतिशत ज्यादा वर्षा हुई। July Heavy Rain के कारण मध्य भारत के कई जिलों में खेतों में पानी भर गया और धान, सोयाबीन तथा मक्का जैसी खरीफ फसलों पर जलभराव का खतरा बढ़ गया।
महाराष्ट्र में करीब चार गुना तक बरसा पानी
इस सप्ताह सबसे अधिक बारिश महाराष्ट्र में दर्ज की गई। कोंकण और गोवा में 706.9 मिलीमीटर वर्षा हुई, जबकि यहां सामान्य वर्षा 239.7 मिलीमीटर रहती है। यानी सामान्य से लगभग 195 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। वहीं मध्य महाराष्ट्र में 184.3 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि सामान्य वर्षा केवल 50.3 मिलीमीटर थी। इस तरह यहां सामान्य से 266 प्रतिशत ज्यादा यानी लगभग चार गुना बारिश दर्ज की गई। July Heavy Rain के कारण धान की नर्सरियों, सब्जियों और अन्य खरीफ फसलों में जलभराव का खतरा काफी बढ़ गया।
गुजरात, मध्य प्रदेश और ओडिशा में भी हुई मूसलाधार बारिश
जुलाई के पहले सप्ताह में गुजरात क्षेत्र में सामान्य से 156 प्रतिशत ज्यादा वर्षा दर्ज की गई, जबकि सौराष्ट्र और कच्छ में सामान्य से 158 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में सामान्य से 99 प्रतिशत और पूर्वी हिस्से में 100 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। ओडिशा में सामान्य से 192 प्रतिशत अधिक तथा छत्तीसगढ़ में 109 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज हुई। July Heavy Rain की वजह से इन राज्यों के कई जिलों में खेतों में पानी भर गया और किसानों को जलनिकासी की आवश्यकता महसूस हुई।
राजस्थान समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में बढ़ी बारिश
राजस्थान में भी जुलाई के पहले सप्ताह में मॉनसून पूरी तरह सक्रिय रहा। पूर्वी राजस्थान में सामान्य से 62 प्रतिशत ज्यादा और पश्चिमी राजस्थान में 58 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामान्य से 17 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। पंजाब और हरियाणा में भी सामान्य के आसपास अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिससे खरीफ फसलों को नमी मिली। हालांकि बिहार में अभी भी सामान्य से 65 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई, जबकि झारखंड में लगभग सामान्य बारिश हुई।
July Heavy Rain से किसानों के सामने बढ़ी नई चुनौती
लगातार हो रही July Heavy Rain ने जहां खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त नमी उपलब्ध कराई है, वहीं कई इलाकों में जलभराव की समस्या भी पैदा कर दी है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसलों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं, पौधों में सड़न बढ़ सकती है और फफूंद जनित रोग तेजी से फैल सकते हैं। विशेष रूप से धान की नर्सरी, सोयाबीन, मक्का, कपास और सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
महाराष्ट्र के किसानों के लिए IMD की सलाह
भारतीय मौसम विभाग ने कोंकण और मध्य महाराष्ट्र के किसानों को सलाह दी है कि धान और रागी की नर्सरियों के साथ-साथ सब्जियों के खेतों से अतिरिक्त पानी तुरंत निकालें। जलभराव लंबे समय तक रहने पर पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है और उत्पादन में गिरावट आ सकती है। July Heavy Rain के दौरान खेतों की नियमित निगरानी करना भी आवश्यक है।
उत्तर प्रदेश के किसानों को क्या करना चाहिए
उत्तर प्रदेश के किसानों को भारी बारिश के दौरान मूंग, उड़द, ज्वार, मूंगफली और तिल की बुआई कुछ समय के लिए रोकने की सलाह दी गई है। धान की नर्सरी और सब्जियों के खेतों से अतिरिक्त पानी निकालना बेहद आवश्यक बताया गया है ताकि पौधों की जड़ों को नुकसान न पहुंचे। July Heavy Rain के दौरान खेतों में अनावश्यक आवागमन से भी बचने की सलाह दी गई है।
गुजरात और मध्य प्रदेश के किसानों के लिए जरूरी सलाह
गुजरात में किसानों को खेतों में जमा पानी तुरंत बाहर निकालने की सलाह दी गई है ताकि फसलों की जड़ें सुरक्षित रहें। वहीं मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में सोयाबीन और मक्का की फसलों के लिए जलनिकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखने को कहा गया है। July Heavy Rain के दौरान खेतों की नालियों की सफाई और पानी के निकास की व्यवस्था बनाए रखना बेहद आवश्यक है।
बिहार, झारखंड, पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए सलाह
बिहार और झारखंड के किसानों को मूंग की तैयार फलियों की जल्द कटाई कर सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है। धान की नर्सरी में पानी का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी बताया गया है। पंजाब और हरियाणा के किसानों को कपास और मक्का के खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की सलाह दी गई है ताकि फसल की जड़ों को नुकसान न पहुंचे। July Heavy Rain के प्रभाव वाले क्षेत्रों में लगातार निगरानी करना भी आवश्यक है।
मॉनसून के साथ जुलाई में तेज हुई कपास बुवाई, 23% रकबे की कमी पूरी करना किसानों के लिए चुनौती
राजस्थान के किसानों को जलभराव से बचाने की सलाह
पूर्वी राजस्थान के किसानों को मूंगफली, ग्वार और कपास के खेतों में पानी रुकने नहीं देने की सलाह दी गई है। खेतों में बनी नालियों की सफाई करते रहें ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके। July Heavy Rain के दौरान जलभराव रोकना खरीफ फसलों की अच्छी बढ़वार के लिए बेहद जरूरी माना गया है।
आंधी, बिजली और भारी बारिश के दौरान बरतें सावधानी
भारतीय मौसम विभाग ने किसानों से अपील की है कि तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने के दौरान खेतों में काम न करें। अपने पशुओं को सुरक्षित पक्के शेड में रखें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचें। मछली पालन करने वाले किसान तालाबों के चारों ओर सुरक्षा जाल लगाएं ताकि ज्यादा पानी आने पर मछलियां बाहर न निकलें। July Heavy Rain के दौरान सुरक्षा संबंधी सभी सावधानियों का पालन करना किसानों और पशुओं दोनों के लिए आवश्यक है।
July Heavy Rain से खरीफ खेती को मिला लाभ, लेकिन सतर्क रहना भी आवश्यक
जुलाई के पहले सप्ताह में हुई July Heavy Rain ने जून की बारिश की कमी को काफी हद तक पूरा कर दिया है और खरीफ फसलों की बुवाई को नई रफ्तार मिली है। हालांकि जिन राज्यों में सामान्य से कई गुना अधिक वर्षा हुई है, वहां जलभराव और फसल नुकसान का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में किसानों को मौसम विभाग की सलाह के अनुसार खेतों से अतिरिक्त पानी निकालना, फसलों की नियमित निगरानी करना और मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखना चाहिए, ताकि खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
