देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने के बाद Cotton Sowing Acreage में तेजी देखने को मिल रही है। जून में कमजोर बारिश और कई राज्यों में मॉनसून की देरी के कारण कपास की बुवाई गत वर्ष की तुलना में काफी पीछे चल रही थी। अब जुलाई में लगातार हो रही अच्छी बारिश के कारण किसानों ने बड़े स्तर पर बुवाई शुरू कर दी है। इसके बावजूद गत वर्ष की तुलना में लगभग 23 प्रतिशत रकबे की कमी को अगले 20 दिनों के भीतर पूरा करना सरल नहीं होगा।
5 जुलाई तक पिछले साल से काफी पीछे रहा Cotton Sowing Acreage
कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार 5 जुलाई तक देश में Cotton Sowing Acreage 63.18 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा है। गत वर्ष इसी अवधि में करीब 82 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई पूरी हो चुकी थी। इसका मतलब है कि इस बार अभी भी लगभग 23 प्रतिशत क्षेत्र में बुवाई बाकी है। कृषि आयुक्त पी.के. सिंह ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में बारिश बेहतर होने के बाद बुवाई की गति लगातार बढ़ रही है और आने वाले दिनों में रकबे का अंतर तेजी से कम होने की उम्मीद है।
मानसून की देरी और अल नीनो की आशंका से प्रभावित हुआ Cotton Sowing Acreage
इस वर्ष जून के दौरान कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। इसके साथ ही अल नीनो की आशंका के कारण भी कई किसानों ने जल्दबाजी में कपास की बुवाई नहीं की। किसान पर्याप्त नमी का इंतजार करते रहे ताकि बीज का अंकुरण बेहतर हो सके। अब जब जुलाई में लगातार अच्छी बारिश हो रही है, तब Cotton Sowing Acreage में तेजी देखने को मिल रही है और खेतों में बुवाई का काम तेज हो गया है।
30 जुलाई तक बुवाई पूरी करना किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में कपास की बुवाई 15 जुलाई तक पूरी हो जाती है। लेकिन इस वर्ष मानसून देर से आने के कारण कई राज्यों में बुवाई की अवधि 30 जुलाई तक बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि Cotton Sowing Acreage 30 जुलाई के बाद बढ़ता है तो फसल की शुरुआती बढ़वार प्रभावित हो सकती है। देर से बोई गई फसल में उत्पादन कम होने, कीटों का प्रकोप बढ़ने और मौसम संबंधी जोखिम ज़्यादा रहने की संभावना रहती है।
महाराष्ट्र सहित प्रमुख राज्यों में बढ़ी Cotton Sowing Acreage की रफ्तार
देश के सबसे बड़े कपास उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में अच्छी बारिश के पश्चात् किसानों ने तेजी से बुवाई शुरू कर दी है। गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी खेतों में गतिविधियां बढ़ गई हैं। वहीं पंजाब, हरियाणा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में भी Cotton Sowing Acreage लगातार बढ़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई के बाकी दिनों में मानसून सामान्य बना रहता है तो अधिकांश राज्यों में बुवाई का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है।
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हरियाणा और राजस्थान में भी लौट रही कपास की खेती
गत खरीफ सीजन में हरियाणा के सिरसा और फतेहाबाद जैसे जिलों में सिंचाई संकट और कम बारिश के कारण कई किसानों ने कपास की खेती कम कर दी थी। इस बार बेहतर मॉनसूनी बारिश के चलते किसानों का रुझान फिर से कपास की ओर बढ़ा है। राजस्थान के कई जिलों में भी किसान तेजी से कपास की बुवाई कर रहे हैं, जिससे Cotton Sowing Acreage में लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है।
समय पर Cotton Sowing Acreage पूरा होने से बढ़ेगा उत्पादन
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि समय पर की गई कपास की बुवाई से पौधों की बढ़वार बेहतर होती है और फूल एवं बॉल बनने की प्रक्रिया भी संतुलित रहती है। यदि Cotton Sowing Acreage निर्धारित समय के भीतर पूरा हो जाता है तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर रहने की संभावना रहती है। वहीं देर से बुवाई होने पर फसल मौसम के उतार-चढ़ाव, कीटों और रोगों के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हो जाती है।
जुलाई का मौसम तय करेगा Cotton Sowing Acreage की अंतिम तस्वीर
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई का शेष समय Cotton Sowing Acreage के लिए सबसे महत्वपूर्ण रहेगा। यदि अगले दो से तीन सप्ताह तक पर्याप्त बारिश होती रही तो गत वर्ष के मुकाबले बना 23% का अंतर काफी हद तक कम किया जा सकता है। वहीं यदि बारिश में फिर से कमी आती है तो कई क्षेत्रों में कपास का कुल रकबा प्रभावित हो सकता है। इसलिए किसान मौसम की स्थिति को देखते हुए तेजी से बुवाई पूरी करने में जुटे हुए हैं।
