Karnataka Me Aam Ke Daam Girne Se Kisan Pareshan होने की स्थिति अब गंभीर होती जा रही है। कर्नाटक के कोलार जिले में टमाटर किसानों के बाद अब आम उत्पादक किसान भी भारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। बाजार में आम की कीमतों में लगातार गिरावट और खेती की बढ़ती लागत के कारण किसान अपने वर्षों पुराने आम के बाग काटने को मजबूर हो गए हैं। किसानों का कहना है कि आम बेचने के बाद लागत तक नहीं निकल रही, जिससे खेती जारी रखना मुश्किल हो गया है।
20 एकड़ से अधिक आम के बाग काटे गए
कोलार तालुक के थोटली, मुदुवाडी, सुगातुर और होलूर समेत कई गांवों में पिछले एक सप्ताह के दौरान 20 एकड़ से अधिक क्षेत्र में लगे आम के बाग काटे जा चुके हैं। श्रीनिवासपुर, जिसे कर्नाटक का ‘मैंगो टाउन’ कहा जाता है, वहां से भी ऐसी ही तस्वीर सामने आई है। Karnataka Me Aam Ke Daam Girne Se Kisan Pareshan होने के कारण कई किसानों ने वर्षों पुराने पेड़ों को काटने का कठिन फैसला लिया है।
टमाटर संकट के बाद आम किसानों की बढ़ी मुश्किलें
कुछ दिन पहले इसी जिले के थोटली गांव में एक किसान ने टमाटर की कीमत गिरने के बाद अपनी पूरी फसल नष्ट कर दी थी। उस समय 15 किलो टमाटर की एक पेटी केवल 50 से 100 रुपये में बिक रही थी। अब आम के दाम में आई भारी गिरावट ने बागवानी किसानों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है। Karnataka Me Aam Ke Daam Girne Se Kisan Pareshan होने की वजह से बागवानी क्षेत्र में चिंता लगातार बढ़ रही है।
लागत भी नहीं निकल रही, किसान सरकार से राहत की मांग कर रहे
किसानों का कहना है कि खाद, दवा, सिंचाई, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर होने वाला खर्च भी आम बेचने के बाद वापस नहीं मिल पा रहा है। उनका आरोप है कि सरकार की ओर से पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिल रही और किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था भी नहीं बनाई गई है। Karnataka Me Aam Ke Daam Girne Se Kisan Pareshan किसानों ने सरकार से राहत पैकेज और उचित मूल्य सुनिश्चित करने की मांग की है।
नीलगिरी की खेती को माना जा रहा बेहतर विकल्प
प्रभावित किसानों का कहना है कि आम के पेड़ों की लकड़ी की कीमत बहुत कम मिलती है और इसे अधिकतर ईंट भट्टों या जलावन के रूप में खरीदा जाता है। इसके मुकाबले नीलगिरी की लकड़ी लगभग 10 हजार रुपये प्रति टन तक बिक जाती है, जबकि आम की लकड़ी का मूल्य करीब 500 रुपये प्रति टन ही मिलता है।किसानों के अनुसार नीलगिरी की खेती से हर वर्ष 2 से 3 लाख रुपये तक की आय संभव है। यही कारण है कि Karnataka Me Aam Ke Daam Girne Se Kisan Pareshan कई किसान अब आम की जगह नीलगिरी की खेती अपनाने की योजना बना रहे हैं।
किसानों ने कहा- अब आम की खेती छोड़नी पड़ेगी
लगातार नुकसान झेल रहे किसानों का कहना है कि जब निवेश की गई रकम भी वापस नहीं मिल रही तो आम की खेती जारी रखना संभव नहीं है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द उचित मूल्य और सरकारी सहायता नहीं मिली तो आने वाले समय में और भी अधिक आम के बाग काटे जाएंगे। Karnataka Me Aam Ke Daam Girne Se Kisan Pareshan होने की यह स्थिति पूरे क्षेत्र के बागवानी क्षेत्र पर असर डाल सकती है।
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किसान नेता ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार
किसान नेता रमेश ने कहा कि कोलार कर्नाटक का सबसे बड़ा आम उत्पादक जिला है, लेकिन पिछले दो वर्षों से किसानों को लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) जैसी व्यवस्था नहीं होने और प्रोसेसिंग यूनिट्स की कमी के कारण किसान लगातार घाटे में जा रहे हैं।उन्होंने बताया कि केवल थोटली गांव में ही चार किसानों ने लगभग 20 एकड़ क्षेत्र के आम के बाग काट दिए हैं। मदनहल्ली, होलूर, ऐथरसहल्ली और सुगातुर जैसे क्षेत्रों में भी यही स्थिति बनी हुई है। Karnataka Me Aam Ke Daam Girne Se Kisan Pareshan होने के कारण किसान संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
30 फीसदी आम के बाग खत्म होने का दावा
Karnataka Me Aam Ke Daam Girne Se Kisan Pareshan: किसान नेता रमेश का दावा है कि इस वर्ष कोलार जिले के करीब 30 प्रतिशत आम के बाग काटे जा रहे हैं। उनका कहना है कि जब बाजार में आम केवल 2 से 3 रुपये प्रति किलो बिकता है तो किसान तुड़ाई का खर्च भी नहीं निकाल पाते।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और जिला प्रशासन किसानों को उचित मूल्य दिलाने और प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित करने में विफल रहे हैं। कई किसान पेड़ों की जड़ें हटाने का खर्च भी नहीं उठा पा रहे हैं, इसलिए वे लकड़ी मुफ्त में देकर केवल जमीन साफ कराने को मजबूर हैं। Karnataka Me Aam Ke Daam Girne Se Kisan Pareshan की यह स्थिति अब पूरे बागवानी क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।
