Monsoon Ki Deri Se Kapas Buwai Par Asar खरीफ 2026 सीजन में साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण देश के प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में बुवाई की रफ्तार धीमी पड़ गई है। 10 जुलाई 2026 तक देशभर में केवल 79.55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 93.95 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार कुल कपास रकबे में लगभग 15.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
मॉनसून की देरी से कपास बुवाई पर असर क्यों पड़ा?
Monsoon Ki Deri Se Kapas Buwai Par Asar का सबसे बड़ा कारण कई राज्यों में मॉनसून की देर से शुरुआत और कमजोर बारिश रही। कपास की फसल समय पर नमी मिलने पर ही अच्छी तरह बोई जा सकती है। इस बार बारिश में देरी होने से किसानों ने बुवाई टाल दी, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर कपास का रकबा पिछले साल की तुलना में 14.41 लाख हेक्टेयर कम हो गया।
गुजरात और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा गिरावट
देश के सबसे बड़े कपास उत्पादक राज्यों गुजरात और महाराष्ट्र में Monsoon Ki Deri Se Kapas Buwai Par Asar सबसे अधिक दिखाई दिया।महाराष्ट्र में इस बार 30.07 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 35.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई थी। यानी राज्य में 5.39 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई।वहीं गुजरात में कपास का रकबा 17.11 लाख हेक्टेयर से घटकर 9.32 लाख हेक्टेयर रह गया। यानी करीब 7.79 लाख हेक्टेयर की भारी गिरावट दर्ज हुई, जो इस सीजन की सबसे बड़ी कमी मानी जा रही है।
दक्षिण भारत में बेहतर रही कपास बुवाई
जहां पश्चिम भारत में Monsoon Ki Deri Se Kapas Buwai Par Asar स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, वहीं दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में स्थिति बेहतर रही।तेलंगाना में कपास की बुवाई बढ़कर 15.96 लाख हेक्टेयर पहुंच गई, जो राज्य के निर्धारित लक्ष्य का लगभग 76 प्रतिशत है। अच्छी बारिश और समय पर कृषि कार्य शुरू होने से किसानों को लाभ मिला।आंध्र प्रदेश में भी कपास का रकबा बढ़कर 2.40 लाख हेक्टेयर हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 0.78 लाख हेक्टेयर अधिक है।
राजस्थान, हरियाणा और अन्य राज्यों की स्थिति
Monsoon Ki Deri Se Kapas Buwai Par Asar केवल गुजरात और महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहा। राजस्थान में लगभग 1.28 लाख हेक्टेयर, हरियाणा में 0.90 लाख हेक्टेयर, ओडिशा में 0.66 लाख हेक्टेयर, कर्नाटक में 0.59 लाख हेक्टेयर और पंजाब में 0.43 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई।मध्य प्रदेश में कपास का रकबा लगभग स्थिर रहा, जबकि तमिलनाडु में पिछले वर्ष के बराबर ही बुवाई दर्ज की गई।
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राष्ट्रीय लक्ष्य से अभी पीछे है कपास की बुवाई
केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के लिए कपास बुवाई का लक्ष्य 116.12 लाख हेक्टेयर निर्धारित किया है। इसके मुकाबले 10 जुलाई तक केवल 79.55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुवाई पूरी हो सकी है।यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो Monsoon Ki Deri Se Kapas Buwai Par Asar कुछ हद तक कम हो सकता है और जुलाई के अंत तथा अगस्त की शुरुआत में बुवाई का रकबा बढ़ने की संभावना है।
कपास उत्पादन और बाजार पर क्या पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि Monsoon Ki Deri Se Kapas Buwai Par Asar आने वाले हफ्तों में भी बना रहता है, तो देश में कपास उत्पादन घट सकता है। इससे कच्चे कपास की उपलब्धता कम होने की आशंका बढ़ेगी।
कम उत्पादन का सीधा असर भारत के टेक्सटाइल उद्योग, सूती धागे के उत्पादन, कपास निर्यात और घरेलू बाजार में फाइबर की कीमतों पर पड़ सकता है। वैश्विक बाजार पहले से ही मौसम संबंधी जोखिमों का सामना कर रहा है, ऐसे में भारत में कपास की बुवाई की प्रगति आने वाले महीनों में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
