MP Dairy Vikas Yojana 2026: मध्य प्रदेश में दूध उत्पादन और डेयरी कारोबार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। MP Dairy Vikas Yojana 2026 के तहत प्रदेश के डेयरी सेक्टर को मजबूत करने के लिए ₹2,973 करोड़ की योजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना का उद्देश्य दूध उत्पादकों और पशुपालकों को सहकारी डेयरी व्यवस्था से जोड़ना और दूध के संग्रहण, प्रसंस्करण तथा बिक्री की क्षमता बढ़ाना है। अगले पांच वर्षों में गांव-गांव तक दुग्ध सहकारी समितियों का विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही सांची ब्रांड की बिक्री और बाजार पहुंच बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
MP Dairy Vikas Yojana 2026 से 26 हजार गांवों तक पहुंचेगी डेयरी व्यवस्था
वर्तमान में मध्य प्रदेश के करीब 7,331 गांवों में दुग्ध सहकारी समितियां काम कर रही हैं। MP Dairy Vikas Yojana 2026 के तहत अगले पांच वर्षों में इन समितियों की पहुंच बढ़ाकर 26,000 गांवों तक करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे ज्यादा संख्या में किसान और पशुपालक सहकारी डेयरी नेटवर्क से जुड़ सकेंगे। गांवों में दूध की खरीद और संग्रहण की व्यवस्था मजबूत होने से दुग्ध उत्पादकों को स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है। MP Dairy Vikas Yojana 2026
रोजाना 52 लाख किलो दूध संग्रहण का लक्ष्य
योजना के तहत प्रदेश में दूध संग्रहण क्षमता को कई गुना बढ़ाने की तैयारी है। वर्तमान में करीब 12 लाख किलोग्राम दूध प्रतिदिन संग्रहित किया जाता है। इसे बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है। दूध संग्रहण नेटवर्क के विस्तार से अधिक किसानों का दूध सहकारी समितियों के माध्यम से बाजार तक पहुंच सकेगा। इससे डेयरी कारोबार को संगठित रूप देने में भी मदद मिलेगी। MP Dairy Vikas Yojana 2026
दूध प्रोसेसिंग क्षमता में होगा बड़ा इजाफा
मध्य प्रदेश में दूध प्रसंस्करण यानी प्रोसेसिंग क्षमता को भी बढ़ाया जाएगा। वर्तमान में प्रदेश की दूध प्रसंस्करण क्षमता करीब 17.8 लाख लीटर प्रतिदिन है। MP Dairy Vikas Yojana 2026 के तहत इसे बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ने से दूध से बनने वाले विभिन्न डेयरी उत्पादों के उत्पादन और बिक्री को भी बढ़ावा मिल सकता है।
सांची दूध की बिक्री बढ़ाने की तैयारी
मध्य प्रदेश के प्रमुख डेयरी ब्रांड सांची के विस्तार पर भी योजना में विशेष जोर दिया गया है। वर्तमान में सांची दूध के पैकेट की बिक्री करीब 7 लाख लीटर प्रतिदिन है। सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 35 लाख लीटर प्रतिदिन करना है। इसके लिए बिक्री नेटवर्क और बाजार पहुंच का विस्तार किया जाएगा। सांची की बिक्री बढ़ने से प्रदेश में दूध की मांग बढ़ाने और दुग्ध उत्पादकों के लिए बाजार को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान पर भी जोर
दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं की नस्ल सुधार पर भी ध्यान दिया जाएगा। योजना के तहत कृत्रिम गर्भाधान कवरेज को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में कृत्रिम गर्भाधान कवरेज करीब 15 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की योजना है। इससे बेहतर नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने और भविष्य में दूध उत्पादन में वृद्धि करने में मदद मिल सकती है।
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NDDB के साथ हुआ है समझौता
मध्य प्रदेश में डेयरी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मध्य प्रदेश शासन, एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन, संबद्ध दुग्ध संघों और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच 13 अप्रैल 2025 को सहकार्यता अनुबंध हुआ था। इसी समझौते के तहत NDDB ने ₹2,973 करोड़ की डेयरी विकास योजना पर सैद्धांतिक सहमति दी है। MP Dairy Vikas Yojana 2026 के जरिए डेयरी क्षेत्र की अधोसंरचना और संचालन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।
डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹500 करोड़ का अनुदान
राज्य सरकार की ओर से डेयरी क्षेत्र की अधोसंरचना के लिए ₹500 करोड़ का अनुदान दिया जाएगा। इसके अलावा भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत स्वीकृति के अनुसार करीब ₹241 करोड़ का राज्यांश भी शामिल है। इस राशि का उपयोग डेयरी से जुड़ी सुविधाओं के विकास और दूध संग्रहण, प्रसंस्करण तथा विपणन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।
किसानों और पशुपालकों को क्या होगा फायदा?
MP Dairy Vikas Yojana 2026 का सबसे बड़ा फायदा प्रदेश के दूध उत्पादकों और पशुपालकों को मिलने की उम्मीद है। दुग्ध सहकारी समितियों का नेटवर्क बढ़ने से अधिक किसानों को दूध बेचने के लिए संगठित बाजार मिल सकेगा। दूध संग्रहण और प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ने से बड़ी मात्रा में दूध को व्यवस्थित तरीके से बाजार तक पहुंचाना आसान होगा। वहीं सांची दूध की बिक्री बढ़ाने से भी दूध की मांग में वृद्धि हो सकती है।
योजना के जरिए सरकार का लक्ष्य दूध उत्पादन से लेकर संग्रहण, प्रसंस्करण और बिक्री तक पूरी डेयरी चेन को मजबूत करना है। अगले पांच वर्षों में तय लक्ष्यों के पूरा होने से मध्य प्रदेश के डेयरी सेक्टर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।
