पंजाब में लगातार धान-गेहूं की खेती से मिट्टी की गुणवत्ता पर बढ़ा खतरा Punjab Me Dhan Gehun Ki Kheti Se Mitti Ki Gunwatta Par Asar

पंजाब में लगातार धान-गेहूं की खेती से मिट्टी की गुणवत्ता पर बढ़ा खतरा Punjab Me Dhan Gehun Ki Kheti Se Mitti Ki Gunwatta Par Asar

पंजाब में वर्षों से लगातार धान और गेहूं की खेती किए जाने का असर अब मिट्टी की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। Punjab Me Dhan Gehun Ki Kheti Se Mitti Ki Gunwatta Par Asar को लेकर पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के अध्ययन में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। केंद्र सरकार ने भी लोकसभा में माना है कि राज्य में धान का रकबा लगातार बढ़ रहा है, जबकि कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी अधिक पानी मांगने वाली फसलों की खेती की जा रही है। Punjab Me Dhan Gehun Ki Kheti Se Mitti Ki Gunwatta Par Asar अब कृषि विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन चुका है। इसी कारण सरकार फसल विविधीकरण और भूजल संरक्षण को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।

PAU की रिपोर्ट में मिट्टी को लेकर क्या सामने आया?

Punjab Me Dhan Gehun Ki Kheti Se Mitti Ki Gunwatta Par Asar पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि लंबे समय तक एक ही फसल चक्र अपनाने से मिट्टी की प्राकृतिक संरचना कमजोर हो रही है। लोकसभा में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने बताया कि लगातार धान-गेहूं की खेती, बार-बार पडलिंग (Puddling), गहरी जुताई और दलहनी फसलों व हरी खाद का उपयोग नहीं करने से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसानों ने समय रहते फसल चक्र में बदलाव नहीं किया तो भविष्य में उत्पादन क्षमता और मिट्टी की उर्वरता दोनों पर असर पड़ सकता है। Punjab Me Dhan Gehun Ki Kheti Se Mitti Ki Gunwatta Par Asar का प्रभाव आने वाले वर्षों में और अधिक दिखाई दे सकता है।

धान की पडलिंग से मिट्टी की गुणवत्ता क्यों हो रही प्रभावित?

Punjab Me Dhan Gehun Ki Kheti Se Mitti Ki Gunwatta Par Asar का एक बड़ा कारण धान की रोपाई के दौरान की जाने वाली पडलिंग प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में खेत में पानी भरकर मिट्टी तैयार की जाती है, जिससे मिट्टी की प्राकृतिक संरचना बदल जाती है।इसके कारण मिट्टी में हवा और पानी का आवागमन कम हो जाता है तथा नीचे की परत सख्त बन जाती है। इससे जड़ों का विकास प्रभावित होता है और फसल को आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। यही वजह है कि Punjab Me Dhan Gehun Ki Kheti Se Mitti Ki Gunwatta Par Asar लगातार बढ़ता जा रहा है।

मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए किसानों को क्या करना चाहिए?

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार Punjab Me Dhan Gehun Ki Kheti Se Mitti Ki Gunwatta Par Asar को कम करने के लिए किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनानी होगी। इसके लिए फसल चक्र में दलहनी फसलें शामिल करना, हरी खाद का उपयोग, संतुलित उर्वरकों का प्रयोग, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM), जैविक खाद डालना तथा फसल अवशेषों को खेत में मिलाना जरूरी है।इन उपायों से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, कार्बनिक पदार्थों की मात्रा में सुधार होता है और लंबे समय तक बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि Punjab Me Dhan Gehun Ki Kheti Se Mitti Ki Gunwatta Par Asar को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका फसल विविधीकरण है।

पंजाब में धान का रकबा लगातार क्यों बढ़ रहा है?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021-22 में पंजाब में 29.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती थी, जो 2025-26 में बढ़कर 32.68 लाख हेक्टेयर हो गई। वहीं गेहूं का रकबा 35.25 लाख हेक्टेयर से घटकर 34.58 लाख हेक्टेयर रह गया।इसी अवधि में मक्का, दलहन और तिलहन जैसी वैकल्पिक फसलों का कुल रकबा 8.6 प्रतिशत से घटकर 6.2 प्रतिशत रह गया, जबकि बागवानी फसलों का हिस्सा 6.3 प्रतिशत से बढ़कर 7.2 प्रतिशत हो गया। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि Punjab Me Dhan Gehun Ki Kheti Se Mitti Ki Gunwatta Par Asar बढ़ने का एक कारण वैकल्पिक फसलों का कम होना भी है।

कम वर्षा वाले इलाकों में भी बढ़ रही धान की खेती

Punjab Me Dhan Gehun Ki Kheti Se Mitti Ki Gunwatta Par Asar केवल पंजाब तक सीमित नहीं है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अध्ययन के अनुसार देश के 68 ऐसे जिलों, जहां सालाना 650 मिमी से कम वर्षा होती है, वहां भी लगभग 28.9 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जा रही है। यह देश के कुल धान क्षेत्रफल का लगभग 5.67 प्रतिशत है।विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे क्षेत्रों में धान की खेती भूजल स्तर पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है और Punjab Me Dhan Gehun Ki Kheti Se Mitti Ki Gunwatta Par Asar जैसी समस्याओं को और गंभीर बना सकती है।

कम बारिश वाले जिलों में भी हो रही गन्ने की खेती

सरकार ने बताया कि 91 ऐसे जिलों, जहां सालाना 700 मिमी से कम वर्षा होती है, वहां लगभग 7.21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती की जा रही है। यह देश के कुल गन्ना क्षेत्र का करीब 10.76 प्रतिशत है।इसी वजह से सरकार स्थानीय जल उपलब्धता के अनुसार फसल चयन और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि Punjab Me Dhan Gehun Ki Kheti Se Mitti Ki Gunwatta Par Asar को कम करने के लिए पानी की उपलब्धता के अनुसार खेती करना जरूरी है।

सरकार क्यों दे रही है फसल विविधीकरण पर जोर?

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि Punjab Me Dhan Gehun Ki Kheti Se Mitti Ki Gunwatta Par Asar जैसी समस्याओं से बचने के लिए किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फसलों का चयन करना चाहिए।

सरकार का मानना है कि फसल विविधीकरण अपनाने से भूजल संरक्षण होगा, मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी और किसानों की आय में भी स्थिरता आएगी। इसलिए दलहन, तिलहन, मक्का और बागवानी फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। Punjab Me Dhan Gehun Ki Kheti Se Mitti Ki Gunwatta Par Asar को कम करने के लिए सरकार और कृषि वैज्ञानिक लगातार किसानों को जागरूक भी कर रहे हैं।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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