El Nino Impact on Farming: देश में खरीफ सीजन के बीच El Nino Impact on Farming को देखते हुए केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा की अध्यक्षता में एक हाई लेवल बैठक आयोजित की गई, जिसमें कृषि मंत्रालय, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और अन्य कई मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि यदि El Nino Impact on Farming बढ़ता है तो किसानों को कम से कम नुकसान हो और खेती का काम बिना किसी बड़ी बाधा के जारी रहे।
सरकार का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन मानसून और बारिश के पैटर्न पर लगातार नजर रखी जा रही है। कृषि से जुड़े सभी विभागों को राज्यों के साथ मिलकर जिला स्तर तक तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि El Nino Impact on Farming का असर सीमित रखा जा सके।
क्या होता है El Nino और खेती पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है?
El Nino Impact on Farming का संबंध प्रशांत महासागर के तापमान में होने वाले बदलाव से है। इस मौसमीय घटना का प्रभाव भारत के मानसून पर पड़ता है, जिससे कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश या अनियमित वर्षा हो सकती है। इसका सीधा प्रभाव खरीफ फसलों, सिंचाई, मिट्टी की नमी और उत्पादन पर पड़ता है। हालांकि भारतीय मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि हर बार El Nino Impact on Farming का मतलब सूखा नहीं होता। यदि मानसून के दौरान समय-समय पर अच्छी बारिश होती रहती है तो खेती पर इसका प्रभाव काफी कम हो सकता है। इसलिए किसानों को घबराने की बजाय मौसम के अपडेट पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है।
मानसून की स्थिति क्या कह रही है?
IMD के अनुसार इस वर्ष गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में मानसून सामान्य से लगभग 10 दिन देरी से पहुंचा था। हालांकि जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश होने से देश में वर्षा की कमी काफी हद तक कम हो गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि जुलाई और अगस्त के दौरान कमजोर से मध्यम El Nino Impact on Farming देखने को मिल सकता है। जुलाई का महीना खरीफ खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि पूरे मानसून सीजन की लगभग 30 प्रतिशत बारिश इसी महीने होती है। ऐसे में बारिश की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
262 संवेदनशील जिलों के लिए तैयार किया गया विशेष कृषि प्लान
कृषि मंत्रालय ने बताया कि El Nino Impact on Farming को ध्यान में रखते हुए देश के 262 संवेदनशील जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिक (District Agriculture Contingency) योजना को अपडेट किया गया है। इन योजनाओं में यह तय किया गया है कि यदि समय पर बारिश नहीं होती है तो किसान कौन-सी वैकल्पिक फसलें बो सकते हैं, कम पानी वाली फसलों का चयन कैसे करें, बुवाई का समय कैसे बदलें और सिंचाई की उपलब्धता के अनुसार खेती कैसे करें। इससे El Nino Impact on Farming के दौरान किसानों का नुकसान कम किया जा सकेगा।
ICAR और कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को देंगे वैज्ञानिक सलाह
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) को El Nino Impact on Farming से निपटने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
कृषि वैज्ञानिक किसानों को नियमित रूप से सलाह देंगे कि—
- बुवाई का सही समय क्या हो।
- कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली किस्मों का चयन कैसे करें।
- खेत में नमी कैसे बनाए रखें।
- कीट और रोगों से फसल की सुरक्षा कैसे करें।
- मौसम बदलने पर वैकल्पिक खेती कैसे अपनाएं।
इसका उद्देश्य किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी समय पर पहुंचाना है ताकि El Nino Impact on Farming का प्रभाव कम किया जा सके।
फसलों की हर सप्ताह होगी निगरानी
सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर Crop Weather Monitoring Group बनाया है, जो हर सप्ताह बैठक करेगा। इस दौरान बारिश, फसल बुवाई, जलाशयों में पानी, कीट एवं रोगों की स्थिति और बाजार के रुझानों की समीक्षा की जाएगी। यदि किसी जिले में El Nino Impact on Farming अधिक दिखाई देता है तो वहां तुरंत कृषि सलाह, वैकल्पिक फसल योजना और राहत संबंधी कदम उठाए जाएंगे। इससे किसानों को समय रहते आवश्यक जानकारी मिल सकेगी।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और KCC पर विशेष अभियान
सरकार ने उन जिलों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है जहां El Nino Impact on Farming की संभावना ज्यादा है। इन क्षेत्रों में किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा ताकि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में फसल नुकसान की भरपाई हो सके। साथ ही ज्यादा से ज्यादा किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) उपलब्ध कराने का अभियान भी चलाया जाएगा, जिससे आवश्यकता पड़ने पर उन्हें आसानी से कृषि ऋण मिल सके।
सिंचाई और जल प्रबंधन पर रहेगा विशेष ध्यान
यदि बारिश सामान्य से कम होती है तो सिंचाई सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। इसलिए सरकार ने जलाशयों, नहरों और भूजल की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि El Nino Impact on Farming को देखते हुए वर्षा जल संरक्षण, ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर सिंचाई और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का अधिक उपयोग करें। इससे कम पानी में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
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पशुपालकों के लिए भी सरकार की तैयारी
El Nino Impact on Farming केवल फसलों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पशुपालन पर भी असर डाल सकता है। यदि बारिश कम होती है तो हरे चारे का उत्पादन घट सकता है। इसी कारण पशुपालन विभाग को सूखे चारे, हरे चारे और पशु आहार की उपलब्धता का नियमित आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर राज्यों के साथ मिलकर चारा विकास कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे ताकि पशुपालकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
किसानों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि El Nino Impact on Farming की स्थिति में किसानों को मौसम विभाग की सलाह के अनुसार ही खेती करनी चाहिए। यदि बारिश में देरी होती है तो लंबी अवधि वाली फसलों की बजाय कम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों का चयन करना बेहतर रहेगा। खेत में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग, समय पर निराई-गुड़ाई और जल संरक्षण तकनीकों का उपयोग करें। किसान कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करें तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ अवश्य लें। इससे El Nino Impact on Farming के कारण होने वाले संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
