Kharif Sowing Update:कमजोर मॉनसून से खरीफ बुवाई 23% घटी | धान, तिलहन और दलहन पर असर

Kharif Sowing Update:कमजोर मॉनसून से खरीफ बुवाई 23% घटी | धान, तिलहन और दलहन पर असर

Kharif Sowing Update: देशभर में मॉनसून की रफ्तार कमजोर पड़ने का असर अब खरीफ खेती पर साफ दिखाई देने लगा है। सामान्य से करीब 42 फीसदी कम बारिश के चलते खरीफ फसलों की बुवाई में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष खरीफ फसलों का कुल बुवाई रकबा घटकर 182.72 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 23 फीसदी कम है। सबसे अधिक असर धान, कपास, सोयाबीन, अरहर, तिलहन और अन्य वर्षा आधारित फसलों पर देखने को मिल रहा है, जहां किसानों ने बारिश की कमी के कारण बुवाई धीमी कर दी है।

Kharif Sowing Update
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कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जुलाई के पहले और दूसरे सप्ताह में व्यापक और अच्छी बारिश नहीं हुई, तो खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इसका असर किसानों की आय के साथ-साथ खाद्यान्न और तिलहन उत्पादन पर भी पड़ सकता है। हालांकि, मौसम विभाग ने जुलाई की शुरुआत में कई राज्यों में बारिश बढ़ने की संभावना जताई है, जिससे बुवाई में तेजी आने और स्थिति में कुछ सुधार की उम्मीद बनी हुई है। Kharif Sowing Update

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देशभर में कमजोर मॉनसून का असर अब खरीफ फसलों की बुवाई पर साफ नजर आने लगा है। 29 जून तक देश में मॉनसून सामान्य से करीब 42 फीसदी कम दर्ज किया गया, जिसके कारण खरीफ फसलों की बुवाई की रफ्तार काफी धीमी पड़ गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इस बार खरीफ बुवाई में लगभग 23 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है और अब तक केवल 182.72 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुवाई हो सकी है। Kharif Sowing Update

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई के शुरुआती दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो धान, सोयाबीन, कपास, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख खरीफ फसलों का रकबा और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे समय में सुपर अल नीनो की संभावित स्थिति ने भी किसानों और कृषि क्षेत्र की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, मौसम विभाग को उम्मीद है कि जुलाई के दौरान बारिश में सुधार होने पर बुवाई की गति तेज हो सकती है और स्थिति में कुछ राहत मिल सकती है। Kharif Sowing Update

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कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 29 जून तक देश में खरीफ फसलों की बुवाई केवल 182.72 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो सकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 236.46 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार बुवाई के रकबे में करीब 23 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। Kharif Sowing Update

हालांकि बीते कुछ दिनों में देश के कई हिस्सों में मॉनसून ने रफ्तार पकड़ी है, लेकिन खरीफ खेती के लिहाज से जुलाई का महीना सबसे अहम माना जाता है। इसलिए किसानों के साथ-साथ कृषि वैज्ञानिकों और नीति विशेषज्ञों की नजर अब जुलाई में होने वाली बारिश पर टिकी हुई है। Kharif Sowing Update

फसलों के रकबे की बात करें तो इस बार गन्ना ही एकमात्र प्रमुख फसल है, जिसकी बुवाई पिछले साल की तुलना में बढ़ी है। इसके विपरीत धान, अरहर, सोयाबीन, मूंगफली, मक्का, कपास और अन्य प्रमुख खरीफ फसलों के रकबे में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई के पहले पखवाड़े में सामान्य या उससे बेहतर बारिश नहीं हुई, तो बुवाई का दायरा और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इसका असर किसानों की आय के साथ-साथ देश के खाद्यान्न और तिलहन उत्पादन पर भी देखने को मिल सकता है। Kharif Sowing Update

अभी तक सिर्फ 16.5 फीसदी क्षेत्र में हुई खरीफ बुवाई

अधिकारियों के मुताबिक, खरीफ बुवाई का सीजन अभी शुरुआती चरण में है। 29 जून तक देश में सामान्य खरीफ बुवाई क्षेत्र 1104.46 लाख हेक्टेयर का केवल 16.5 फीसदी हिस्सा ही कवर हो पाया है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक यह आंकड़ा 21 फीसदी से अधिक था, जिससे साफ है कि इस बार मॉनसून की धीमी शुरुआत का सीधा असर खेती पर पड़ा है। Kharif Sowing Update

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कृषि अधिकारियों का कहना है कि यदि अगले दो सप्ताह के दौरान मॉनसून सक्रिय रहता है और देश के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में अच्छी बारिश होती है, तो बुवाई की रफ्तार तेज हो सकती है। हालांकि, पिछले वर्ष के स्तर तक पहुंचना आसान नहीं होगा, क्योंकि 2025 में समय पर और सामान्य से बेहतर मॉनसून के कारण खरीफ बुवाई काफी तेजी से हुई थी। ऐसे में जुलाई की बारिश इस सीजन की खेती और उत्पादन के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। Kharif Sowing Update

कपास की बुवाई में सबसे बड़ी गिरावट, धान और दलहन भी प्रभावित

खरीफ फसलों में इस बार सबसे अधिक गिरावट कपास की बुवाई में दर्ज की गई है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 29 जून तक कपास की बुवाई केवल 29.66 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 45.36 लाख हेक्टेयर थी। यानी कपास का रकबा करीब 35 फीसदी घट गया है, जो कमजोर मॉनसून का सबसे बड़ा असर माना जा रहा है।

धान की खेती भी इससे अछूती नहीं रही। इस वर्ष धान की रोपाई 25.75 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक यह 34.41 लाख हेक्टेयर थी। वहीं दलहन फसलों की बुवाई में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। इस बार कुल दलहन रकबा 14.92 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 21.46 लाख हेक्टेयर था। Kharif Sowing Update

दलहनी फसलों में सबसे ज्यादा असर अरहर पर देखने को मिला, जिसकी बुवाई 8.45 लाख हेक्टेयर से घटकर केवल 3.56 लाख हेक्टेयर रह गई। इसके अलावा मूंग का रकबा 8.63 लाख हेक्टेयर से घटकर 8.37 लाख हेक्टेयर और उड़द की बुवाई 2.51 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.07 लाख हेक्टेयर रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो इन फसलों के उत्पादन पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है। Kharif Sowing Update

तिलहन और मोटे अनाज की बुवाई भी रही कमजोर

कमजोर मॉनसून का असर तिलहन फसलों की बुवाई पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष तिलहन फसलों का कुल रकबा घटकर 16.99 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 36.41 लाख हेक्टेयर था। तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुवाई 19.97 लाख हेक्टेयर से घटकर केवल 6.92 लाख हेक्टेयर रह गई है। वहीं, मूंगफली का रकबा भी 15.29 लाख हेक्टेयर से घटकर 8.87 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो किसानों के लिए चिंता का विषय है। Kharif Sowing Update

मोटे अनाज (श्री अन्न) की बुवाई में भी गिरावट देखने को मिली है। इस वर्ष इसका कुल रकबा 31.84 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष के 36.41 लाख हेक्टेयर की तुलना में करीब 11.7 फीसदी कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण अधिकांश खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। हालांकि, यदि जुलाई में मॉनसून सक्रिय होता है और अच्छी बारिश होती है, तो बुवाई की रफ्तार बढ़ने के साथ स्थिति में कुछ सुधार आने की उम्मीद है। Kharif Sowing Update

ज्वार की बुवाई बढ़ी, लेकिन बाजरा और मक्का का रकबा घटा

मोटे अनाज (श्री अन्न) की फसलों में इस बार ज्वार ही एकमात्र ऐसी प्रमुख फसल रही, जिसकी बुवाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 29 जून तक ज्वार की बुवाई 3.38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 2.70 लाख हेक्टेयर थी। इससे संकेत मिलता है कि सीमित बारिश के बावजूद कुछ क्षेत्रों में किसानों ने ज्वार की खेती को प्राथमिकता दी है।

इसके विपरीत अन्य प्रमुख श्री अन्न फसलों की बुवाई में गिरावट दर्ज की गई है। बाजरा का रकबा 13.06 लाख हेक्टेयर से घटकर 11.34 लाख हेक्टेयर, रागी का रकबा 0.73 लाख हेक्टेयर से घटकर 0.66 लाख हेक्टेयर और मक्का की बुवाई 18.61 लाख हेक्टेयर से घटकर 15.71 लाख हेक्टेयर रह गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में यदि मॉनसून सक्रिय रहता है और पर्याप्त बारिश होती है, तो इन फसलों की बुवाई में भी तेजी आ सकती है।

अगले 2–3 दिनों में कई राज्यों में आगे बढ़ेगा मॉनसून

मौसम विभाग के अनुसार, अगले 2 से 3 दिनों के दौरान मॉनसून के और सक्रिय होने की संभावना है। इस दौरान मध्य प्रदेश के शेष हिस्सों, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और गुजरात के बाकी क्षेत्रों में भी मॉनसून के पहुंचने के अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। इससे लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मॉनसून इसी तरह सक्रिय बना रहता है और आगामी दिनों में अच्छी बारिश होती है, तो खरीफ फसलों की बुवाई की रफ्तार तेज हो सकती है। इससे धान, सोयाबीन, कपास, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों के रकबे में बढ़ोतरी की संभावना है, जिससे कृषि क्षेत्र और किसानों दोनों को राहत मिल सकती है।

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