Mahesh Raghuvanshi PMFME Success Story in MP: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के गैरतगंज के किसान महेश रघुवंशी ने सरकारी योजना का लाभ उठाकर अपनी किस्मत बदल दी है। कभी पारंपरिक खेती से कम आमदनी के कारण परेशान रहने वाले महेश आज अपनी आटा मिल के सफल उद्यमी बन चुके हैं। उनकी कहानी Mahesh Raghuvanshi PMFME Success Story in MP के रूप में उन किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो खेती के साथ अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं।
महेश रघुवंशी ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना यानी PMFME की मदद से आधुनिक आटा मिल यूनिट स्थापित की। योजना के तहत उन्हें 35 प्रतिशत अनुदान सहायता मिली और बैंक लोन की मदद से उन्होंने अपना कारोबार शुरू किया। आज उनकी यूनिट में रोजाना करीब 30 से 35 क्विंटल आटा और दलिया तैयार हो रहा है।
खेती में कम आमदनी ने बदला महेश का रास्ता
रायसेन जिले के गैरतगंज निवासी महेश रघुवंशी पहले पारंपरिक तरीके से खेती करते थे। खेती में लगातार बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और फसलों से मिलने वाले कम मुनाफे के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं हो पा रही थी। सालभर खेत में मेहनत करने के बाद भी आमदनी परिवार की जरूरतों के अनुसार पर्याप्त नहीं रहती थी। महेश ने महसूस किया कि सिर्फ पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने के बजाय कृषि से जुड़े किसी व्यवसाय की शुरुआत की जाए। इसी दौरान उन्हें PMFME योजना की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया। यहीं से Mahesh Raghuvanshi PMFME Success Story in MP की शुरुआत हुई।
उद्यानिकी कार्यालय से मिली योजना की जानकारी
PMFME योजना के बारे में जानकारी मिलने के बाद महेश ने गैरतगंज विकासखंड के उद्यानिकी कार्यालय से संपर्क किया। यहां उन्हें योजना से संबंधित जरूरी जानकारी और मार्गदर्शन मिला। अधिकारियों की मदद से उन्होंने आटा उद्योग स्थापित करने की योजना तैयार की और इसके लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी की। महेश के लिए सरकारी योजना की जानकारी मिलना कारोबार शुरू करने की दिशा में पहला बड़ा कदम था। उन्होंने अपनी जरूरत और स्थानीय बाजार को ध्यान में रखते हुए आटा मिल स्थापित करने का फैसला किया।
35 प्रतिशत अनुदान से मिली बड़ी मदद
महेश रघुवंशी ने PMFME योजना के तहत आटा मिल यूनिट स्थापित करने के लिए आवेदन किया। भारतीय स्टेट बैंक से उनका लोन स्वीकृत हुआ। इसके साथ ही उन्हें परियोजना लागत पर 35 प्रतिशत अनुदान सहायता मिली। सरकारी अनुदान और बैंक लोन की मदद से महेश ने आधुनिक मशीनों से अपनी आटा मिल शुरू की।
उन्होंने अपनी यूनिट का नाम वेदांश ओवर सीज फ्लोर मिल रखा। आधुनिक मशीनरी के कारण यूनिट में कम समय में बड़ी मात्रा में आटा और दलिया तैयार किया जा रहा है। Mahesh Raghuvanshi PMFME Success Story in MP इस बात का उदाहरण है कि सरकारी सहायता का सही तरीके से इस्तेमाल करके किसान अपनी कृषि आधारित छोटी यूनिट को व्यवसाय में बदल सकते हैं।
रोजाना 30 से 35 क्विंटल आटा और दलिया का उत्पादन
महेश रघुवंशी की आटा मिल में रोजाना करीब 30 से 35 क्विंटल आटा और दलिया तैयार किया जा रहा है। उनकी यूनिट में आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिली है। उनके तैयार किए गए उत्पाद गैरतगंज और रायसेन के अलावा भोपाल तथा आसपास के बाजारों में भी पहुंच रहे हैं। स्थानीय बाजार में उत्पादों की मांग के कारण कारोबार को लगातार आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। Mahesh Raghuvanshi PMFME Success Story in MP
आटा मिल शुरू करने के बाद महेश की आमदनी में भी बड़ा बदलाव आया है। खेती से होने वाली सीमित आय की तुलना में अब खाद्य प्रसंस्करण व्यवसाय उनके लिए कमाई का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। यही वजह है कि Mahesh Raghuvanshi PMFME Success Story in MP ग्रामीण क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण की संभावनाओं को सामने लाती है।
हर महीने 80 से 90 हजार रुपये तक की कमाई
महेश रघुवंशी के मुताबिक, उनकी आटा मिल से अब हर महीने करीब 80 से 90 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है। उत्पादन और बिक्री का दायरा बढ़ने के साथ उनका व्यवसाय भी मजबूत हो रहा है। हालांकि किसी भी व्यवसाय में वास्तविक कमाई बाजार की मांग, कच्चे माल की कीमत, उत्पादन क्षमता, बिजली, मजदूरी, पैकेजिंग और परिवहन जैसे खर्चों पर निर्भर करती है।
इसके बावजूद महेश ने यह साबित किया है कि कृषि से जुड़े खाद्य प्रसंस्करण व्यवसाय को सही तरीके से चलाकर आय का नया स्रोत बनाया जा सकता है। Mahesh Raghuvanshi PMFME Success Story in MP में सबसे खास बात यही है कि एक किसान ने अपनी पारंपरिक खेती के अनुभव को खाद्य प्रसंस्करण व्यवसाय से जोड़कर नई पहचान बनाई।
8 से 10 लोगों को मिला रोजगार
महेश रघुवंशी की आटा मिल सिर्फ उनकी आमदनी का जरिया नहीं बनी, बल्कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं। उनकी यूनिट में करीब 8 से 10 स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का माध्यम बन सकती हैं।
इससे गांव और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं और किसानों को अपनी उपज से जुड़े व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिलता है। महेश की कहानी इस लिहाज से भी खास है। Mahesh Raghuvanshi PMFME Success Story in MP एक ऐसे किसान की कहानी है, जिसने खुद का रोजगार तैयार करने के साथ दूसरे लोगों को भी काम का अवसर दिया।
2026-27 के बजट में PMFME के लिए 200 करोड़ रुपये
कृषक कल्याण वर्ष 2026 के दौरान मध्य प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। राज्य के 2026-27 के बजट में PMFME योजना के तहत 200 करोड़ रुपये के प्रावधान की जानकारी दी गई है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा मिलने से किसान अपनी कृषि उपज की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग करके उसके मूल्य में बढ़ोतरी कर सकते हैं। इससे खेती के अलावा आय के नए साधन तैयार करने की संभावना बढ़ती है। Mahesh Raghuvanshi PMFME Success Story in MP
ऐसे समय में महेश रघुवंशी की कहानी किसानों के लिए एक उदाहरण बनकर सामने आती है। Mahesh Raghuvanshi PMFME Success Story in MP यह बताती है कि सरकारी सहायता के साथ कृषि आधारित कारोबार की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
ये भी देखे: प्याज के थोक भाव में 160 फीसदी उछाल, लासलगांव मंडी में 4550 रुपये क्विंटल पहुंचा रेट
आटा मिल कारोबार में बाजार की भूमिका
आटा मिल शुरू करने वाले किसानों और युवाओं के लिए सिर्फ मशीनरी और सरकारी सहायता ही पर्याप्त नहीं होती। कारोबार को सफल बनाने के लिए स्थानीय बाजार में आटे की मांग, ग्राहकों की जरूरत, पैकेजिंग और बिक्री नेटवर्क पर भी ध्यान देना जरूरी है। महेश ने अपने उत्पादों को स्थानीय बाजार से जोड़ने पर ध्यान दिया। गैरतगंज और रायसेन के साथ भोपाल तथा आसपास के बाजारों तक उत्पाद पहुंचने से उनके कारोबार का दायरा बढ़ा है। Mahesh Raghuvanshi PMFME Success Story in MP से यह भी समझ आता है कि खाद्य प्रसंस्करण व्यवसाय में उत्पादन के साथ-साथ बाजार तक पहुंच बनाना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
किसानों और युवाओं के लिए बन रही प्रेरणा
महेश रघुवंशी का कहना है कि PMFME योजना उनके जैसे छोटे किसानों और युवाओं के लिए काफी मददगार साबित हुई है। सरकारी सहायता के कारण वे अपनी आटा मिल स्थापित कर सके और आज खुद के साथ दूसरे लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। उनकी सलाह है कि किसान खेती के साथ-साथ खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी संभावनाएं तलाशें।
अपनी उपज की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के जरिए किसान अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। Mahesh Raghuvanshi PMFME Success Story in MP ऐसे युवाओं के लिए खास तौर पर प्रेरणादायक है, जो कम पूंजी में कृषि आधारित व्यवसाय शुरू करने के अवसर तलाश रहे हैं।
खेती से उद्यमिता तक पहुंचा सफर
महेश रघुवंशी का सफर दिखाता है कि किसान अपनी पारंपरिक खेती के साथ कृषि आधारित उद्योग भी शुरू कर सकते हैं। PMFME योजना के तहत मिली सहायता, बैंक लोन और आधुनिक मशीनरी की मदद से उन्होंने आटा मिल स्थापित की और इसे बाजार से जोड़ा। आज रोजाना 30 से 35 क्विंटल तक उत्पादन और 80 से 90 हजार रुपये तक की मासिक आमदनी उनके कारोबार की सफलता को दर्शाती है। Mahesh Raghuvanshi PMFME Success Story in MP
साथ ही 8 से 10 लोगों को रोजगार देकर उनकी यूनिट ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी योगदान दे रही है। इसी वजह से Mahesh Raghuvanshi PMFME Success Story in MP किसानों और युवाओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। यह कहानी बताती है कि खेती से जुड़े उत्पादों की प्रोसेसिंग और बेहतर मार्केटिंग के जरिए किसान अपनी आमदनी के नए रास्ते तलाश सकते हैं।

1 Comment