Pyaj Ka Bhav 2026: प्याज के थोक भाव में 160 फीसदी उछाल, लासलगांव मंडी में 4550 रुपये क्विंटल पहुंचा रेट

Pyaj Ka Bhav 2026: प्याज के थोक भाव में 160 फीसदी उछाल, लासलगांव मंडी में 4550 रुपये क्विंटल पहुंचा रेट

Pyaj Ka Bhav 2026: देश में प्याज की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। गर्मियों में भंडारित प्याज का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है, वहीं खरीफ प्याज की रोपाई में एक महीने से ज्यादा की देरी हुई है। इसका सीधा असर मंडियों में प्याज की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। ऐसे में किसान, व्यापारी और आम उपभोक्ता लगातार Pyaj Ka Bhav 2026 को लेकर जानकारी तलाश रहे हैं।

Pyaj Ka Bhav 2026 महाराष्ट्र की सबसे प्रमुख प्याज मंडियों में शामिल लासलगांव APMC में प्याज का औसत थोक भाव 22 जून को 1,740 रुपये प्रति क्विंटल था। 5 सितंबर तक यह बढ़कर 4,550 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया। इस तरह करीब तीन महीने से भी कम समय में प्याज के भाव में लगभग 160 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह करीब दो साल का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है।

लासलगांव मंडी में प्याज के भाव में तेज उछाल

लासलगांव मंडी को देश की प्रमुख प्याज मंडियों में गिना जाता है। यहां कीमतों में होने वाला बदलाव देश के कई अन्य बाजारों पर भी असर डालता है। इस समय मंडी में आवक और उपलब्ध स्टॉक को लेकर दबाव बना हुआ है, जिसकी वजह से कीमतों में तेजी देखी जा रही है। अगर Pyaj Ka Bhav 2026 की मौजूदा स्थिति की बात करें, तो लासलगांव में औसत थोक भाव 4,550 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। इससे पहले सितंबर 2024 में प्याज का भाव 4,770 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा था।

खरीफ प्याज की रोपाई में हुई बड़ी देरी

प्याज की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह खरीफ प्याज की खेती में देरी है। महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में मानसून की बारिश देर से होने के कारण किसानों को समय पर रोपाई करने में परेशानी हुई। नासिक में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। यहां खरीफ प्याज की खेती का सामान्य रकबा करीब 30,000 हेक्टेयर रहता है, लेकिन अब तक केवल 2,358 हेक्टेयर में ही रोपाई हो सकी है। Pyaj Ka Bhav 2026

यानी सामान्य रकबे का करीब 3 फीसदी हिस्सा ही अभी फसल के तहत आया है। आमतौर पर सितंबर की शुरुआत तक किसान करीब 70 फीसदी रोपाई पूरी कर लेते हैं। इस साल बारिश में देरी के कारण खेती का पूरा चक्र पिछड़ गया है। इससे आने वाले समय में पुराने प्याज का स्टॉक खत्म होने और नई फसल आने के बीच सप्लाई गैप बन सकता है। Pyaj Ka Bhav 2026

नवंबर तक सीमित रह सकती है नई प्याज की आवक

आमतौर पर खरीफ प्याज की नई फसल अक्टूबर के मध्य से मंडियों में पहुंचना शुरू हो जाती है। लेकिन इस साल रोपाई में देरी के कारण फसल की खुदाई और मंडियों में आवक भी प्रभावित होने की आशंका है। कृषि अधिकारियों के मुताबिक, प्याज की बड़ी आवक नवंबर के दूसरे हिस्से में शुरू होने की उम्मीद है। दिसंबर से बाजार में सप्लाई सामान्य होने की संभावना जताई जा रही है। अगर नई फसल की आवक में और देरी हुई, तो Pyaj Ka Bhav 2026 में आगे भी तेजी देखने को मिल सकती है। Pyaj Ka Bhav 2026

कर्नाटक और राजस्थान में भी प्याज की खुदाई पिछड़ी

नेशनल हॉर्टिकल्चरल रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन के पूर्व निदेशक आरपी गुप्ता के अनुसार, खरीफ प्याज की रोपाई करीब एक महीने पिछड़ गई है। इसका असर नई फसल की उपलब्धता पर पड़ सकता है। बेंगलुरु और कर्नूल की मंडियों में नई प्याज की थोड़ी आवक शुरू हो गई है, लेकिन अभी इसकी मात्रा काफी कम है। वहीं कर्नाटक और राजस्थान में प्याज की खुदाई भी करीब एक महीने देर से हो रही है। Pyaj Ka Bhav 2026

इन राज्यों से अक्टूबर के अंत तक सप्लाई धीरे-धीरे बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि मंडियों में नियमित आवक नवंबर के अंत तक ही सामान्य होने की संभावना है। यही वजह है कि किसान और व्यापारी Pyaj Ka Bhav 2026 पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

नासिक में गर्मियों के प्याज का स्टॉक तेजी से घटा

प्याज की कीमतों में तेजी का दूसरा बड़ा कारण गर्मियों में भंडारित प्याज का तेजी से खत्म होना है। कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक, नासिक में गर्मियों के प्याज की भंडारण क्षमता करीब 24 लाख टन है। इसमें से लगभग 80 फीसदी स्टॉक पहले ही बिक चुका है। अब करीब 5 से 6 लाख टन प्याज बचा होने का अनुमान है। अधिकारियों के मुताबिक, यह स्टॉक सितंबर के अंत या अक्टूबर के मध्य तक ही चल सकता है। अगर इसके बाद खरीफ प्याज की पर्याप्त आवक शुरू नहीं हुई, तो बाजार में 3 से 4 सप्ताह तक सप्लाई की कमी पैदा हो सकती है। ऐसी स्थिति में कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है।

क्या आगे भी बढ़ेंगे प्याज के दाम?

फिलहाल प्याज की कीमतों का रुख खरीफ फसल की रोपाई, मौसम और नई फसल की मंडी आवक पर निर्भर करेगा। अगर अक्टूबर और नवंबर में पर्याप्त प्याज मंडियों में पहुंचता है, तो दिसंबर से कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, अगर फसल की खुदाई और आवक में और देरी हुई तो मंडियों में प्याज की कमी बनी रह सकती है।

ऐसे में Pyaj Ka Bhav 2026 आने वाले हफ्तों में भी किसानों और व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा। कुल मिलाकर, पुराने स्टॉक में कमी और खरीफ प्याज की फसल में देरी ने बाजार में सप्लाई का दबाव बढ़ा दिया है। नवंबर तक नई फसल की पर्याप्त आवक नहीं हुई तो प्याज के दाम ऊंचे स्तर पर बने रहने की संभावना है।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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